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प्रशासन ने साधी चुप्पी, जनप्रतिनिधियों ने फेरी निगाहें, अब जानलेवा बना बुखार
Updated Tue, 02 Oct 2018 10:44 PM IST
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02पीबीटीपी-5 से 12
प्रशासन ने साधी चुप्पी, जानलेवा बना बुखार
एक माह के जलभराव ने नौगवां गांव के वार्ड छह में फैला संक्रामक रोग
एक महिला की हो गई मौत, 30 से अधिक बीमार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। एक माह से नौगवां पकड़िया में चल रही जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे रहा। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हो सकी। नतीजतन इस नजरअंदाजगी के चलते वार्ड छह के लोगों को अब जानलेवा बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। गंदगी के प्रकोप के बाद इलाके में संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। इसमें एक महिला की सोमवार को जान भी चली गई। 30 से अधिक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। ग्रामीण चंदा कर समस्या के समाधान का प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण ये सब नाकाफी साबित हो रहा है।
शहर से सटे नौगवा पकड़िया के वार्ड छह में चोक नाले व नालियों के कारण जलभराव की समस्या लगभग एक माह से बनी हुई है। अधिकांश परिवार संक्रामक रोग की चपेट में आ चुके हैं, हर परिवार को कोई न कोई सदस्य बुखार की चपेट में है। यहां की रहने वाली 40 वर्षीय तारावती पत्नी बुद्धसेन की सोमवार रात बरेली शहर के निजी अस्पताल में तेज बुखार से मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि दस दिन पूर्व तेज बुखार आने पर शहर के निजी अस्पताल में इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नहीं होने पर वह सोमवार सुबह तारावती को बरेली ले गए। जहां तेज बुखार आने पर रात में तारावती ने दम तोड़ दिया। मृतका का बेटा उजागर उसकी पत्नी लौंगश्री, इंद्रजीत समेत 30 से अधिक लोग अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। वार्ड की कोई गली ऐसी नहीं जहां जलभराव न हो। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बूढ़ों तक को गंदे पानी से होकर निकलना पड़ रहा है। यहीं नहीं तारावती की मौत की सूचना पर अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंचे उनके संबंधियों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
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यह लोग बीमार
वार्ड के बुद्धसेन, आरती, इंद्रजीत, विजय, प्रियंका, शिवानी, नैना, चाहत, पायल, यश, अंजू, रुबी, सुखदेई, अवधेश समेत तीस से अधिक लोग संक्रामक रोग की चपेट में है।
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सजग होते अफसर तो बच सकती थी जान
करीब एक माह नौगवा पकड़िया के वार्ड छह में जलभराव की समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित कर अफसरों को आगाह किया था कि अगर पूरनपुर रोड की तरफ बंद पड़ा नाला खोल दिया जाए तो जलभराव की समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन न तो अफसरों ने इस समस्या को गंभीरता से लिया नाहीं जनप्रतिनिधियों ने। नतीजतन जलभराव से फैल रहे संक्रामक रोग की चपेट में आने से तारावती की जान चली गई।
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बंद नाला खुले तो बने बात
वार्ड के रहने वाले इंद्रजीत, पायल, सोमवीर, पायल आदि ने बताया कि पूरनपुर रोड की तरफ बना एक बड़ा नाला पिछले काफी से बंद पड़ा है। अगर यह नाला जिला प्रशासन खुलवा देता तो जलभराव की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। यह नाला सालों से बंद पड़ा है। इसको खुलवाने के लिए प्रशासनिक अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों से तक गुहार लगाई गई लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम दौड़ी
वार्ड में तेजी से फैल रहे संक्रामक रोग की चपेट में आने से दर्जनों लोगों के बुखार की चपेट में आने व महिला की मौत की जानकारी जब अमर उजाला ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी। तो आननफानन में सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. सीएम चतुर्वेदी टीम के साथ वार्ड पहुंचे और लोगों से बातचीत कर मेडिकल कैंप लगवाने के साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मृतका के परिजनों से भी बातचीत की।
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02पीबीटीपी-13
घर में ठीक तरीक से खाना पीना भी नहीं हो पा रहा। परिवार के सभी सदस्य संक्रामक रोग की चपेट में आ चुकी हैं। बीते दिनों चंदा के पैसे से इंजन मंगाकर पानी निकलवा गया था। बाद में फिर वह स्थिति हो गई। हर गली में पानी भरा है। अब तक समस्या का स्थाई समाधान नहीं कराया जा सका है। प्यारेलाल
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02पीबीटीपी-14
सुबह शाम घर तक पहुंचने के लिए गंदे पानी के बीच होकर निकलना पड़ता है। पांव में छाले पडने के साथ ही परिवार के तीन सदस्य बुखार की चपेट में है। बदबू आने के कारण घर में रहना भी मुश्किल हो रहा है। अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी हमारी समस्या को लेकर कतई गंभीर नहीं है। सोमवीर
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वर्जन
इस संबंध में डीएम, एडीएम, प्रभारी सीडीओ से संपर्क करना चाह तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। जबकि प्रभारी सीडीओ का नंबर स्विच ऑफ बता रहा था।
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प्रशासन ने साधी चुप्पी, जानलेवा बना बुखार
एक माह के जलभराव ने नौगवां गांव के वार्ड छह में फैला संक्रामक रोग
एक महिला की हो गई मौत, 30 से अधिक बीमार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। एक माह से नौगवां पकड़िया में चल रही जलभराव की समस्या को लेकर प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे रहा। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हो सकी। नतीजतन इस नजरअंदाजगी के चलते वार्ड छह के लोगों को अब जानलेवा बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। गंदगी के प्रकोप के बाद इलाके में संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। इसमें एक महिला की सोमवार को जान भी चली गई। 30 से अधिक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। ग्रामीण चंदा कर समस्या के समाधान का प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण ये सब नाकाफी साबित हो रहा है।
शहर से सटे नौगवा पकड़िया के वार्ड छह में चोक नाले व नालियों के कारण जलभराव की समस्या लगभग एक माह से बनी हुई है। अधिकांश परिवार संक्रामक रोग की चपेट में आ चुके हैं, हर परिवार को कोई न कोई सदस्य बुखार की चपेट में है। यहां की रहने वाली 40 वर्षीय तारावती पत्नी बुद्धसेन की सोमवार रात बरेली शहर के निजी अस्पताल में तेज बुखार से मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि दस दिन पूर्व तेज बुखार आने पर शहर के निजी अस्पताल में इलाज कराया लेकिन कोई सुधार नहीं होने पर वह सोमवार सुबह तारावती को बरेली ले गए। जहां तेज बुखार आने पर रात में तारावती ने दम तोड़ दिया। मृतका का बेटा उजागर उसकी पत्नी लौंगश्री, इंद्रजीत समेत 30 से अधिक लोग अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे है। वार्ड की कोई गली ऐसी नहीं जहां जलभराव न हो। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बूढ़ों तक को गंदे पानी से होकर निकलना पड़ रहा है। यहीं नहीं तारावती की मौत की सूचना पर अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंचे उनके संबंधियों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
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यह लोग बीमार
वार्ड के बुद्धसेन, आरती, इंद्रजीत, विजय, प्रियंका, शिवानी, नैना, चाहत, पायल, यश, अंजू, रुबी, सुखदेई, अवधेश समेत तीस से अधिक लोग संक्रामक रोग की चपेट में है।
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सजग होते अफसर तो बच सकती थी जान
करीब एक माह नौगवा पकड़िया के वार्ड छह में जलभराव की समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित कर अफसरों को आगाह किया था कि अगर पूरनपुर रोड की तरफ बंद पड़ा नाला खोल दिया जाए तो जलभराव की समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन न तो अफसरों ने इस समस्या को गंभीरता से लिया नाहीं जनप्रतिनिधियों ने। नतीजतन जलभराव से फैल रहे संक्रामक रोग की चपेट में आने से तारावती की जान चली गई।
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बंद नाला खुले तो बने बात
वार्ड के रहने वाले इंद्रजीत, पायल, सोमवीर, पायल आदि ने बताया कि पूरनपुर रोड की तरफ बना एक बड़ा नाला पिछले काफी से बंद पड़ा है। अगर यह नाला जिला प्रशासन खुलवा देता तो जलभराव की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। यह नाला सालों से बंद पड़ा है। इसको खुलवाने के लिए प्रशासनिक अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों से तक गुहार लगाई गई लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम दौड़ी
वार्ड में तेजी से फैल रहे संक्रामक रोग की चपेट में आने से दर्जनों लोगों के बुखार की चपेट में आने व महिला की मौत की जानकारी जब अमर उजाला ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी। तो आननफानन में सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. सीएम चतुर्वेदी टीम के साथ वार्ड पहुंचे और लोगों से बातचीत कर मेडिकल कैंप लगवाने के साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मृतका के परिजनों से भी बातचीत की।
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घर में ठीक तरीक से खाना पीना भी नहीं हो पा रहा। परिवार के सभी सदस्य संक्रामक रोग की चपेट में आ चुकी हैं। बीते दिनों चंदा के पैसे से इंजन मंगाकर पानी निकलवा गया था। बाद में फिर वह स्थिति हो गई। हर गली में पानी भरा है। अब तक समस्या का स्थाई समाधान नहीं कराया जा सका है। प्यारेलाल
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सुबह शाम घर तक पहुंचने के लिए गंदे पानी के बीच होकर निकलना पड़ता है। पांव में छाले पडने के साथ ही परिवार के तीन सदस्य बुखार की चपेट में है। बदबू आने के कारण घर में रहना भी मुश्किल हो रहा है। अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी हमारी समस्या को लेकर कतई गंभीर नहीं है। सोमवीर
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इस संबंध में डीएम, एडीएम, प्रभारी सीडीओ से संपर्क करना चाह तो उन्होंने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। जबकि प्रभारी सीडीओ का नंबर स्विच ऑफ बता रहा था।