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दशरथ विश्वामित्र और ताड़का वध का प्रसंग सुनाया
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:32 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी आश्रम में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन बुधवार को महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में दशरथ विश्वामित्र संवाद और ताड़का वध जनकपुर भ्रमण की कथा सुनाते हुए बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि संत को सदैव ही जनकल्याण की चिंता सताती रहती है। जब भी विश्वामित्र जी यज्ञ करते थे तो मारीच सुबाहु का आतंक सताने लगता थे। इससे विश्वामित्र बड़े चिंतित हुए। विश्वामित्र जी ने ध्यान लगाकर देखा तो उन्होंने जान लिया कि इन सब दुष्टों का अंत करने वाले राम रूप में दशरथ के घर अवतरित हो चुके हैं। विश्वामित्र अवध में जाकर राम लखन को लेकर आए और उन्होंने ताड़का का वध किया। विश्वामित्र जी का यज्ञ पूर्ण करवाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूम उठे। ब्यूरो
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क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी आश्रम में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन बुधवार को महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में दशरथ विश्वामित्र संवाद और ताड़का वध जनकपुर भ्रमण की कथा सुनाते हुए बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि संत को सदैव ही जनकल्याण की चिंता सताती रहती है। जब भी विश्वामित्र जी यज्ञ करते थे तो मारीच सुबाहु का आतंक सताने लगता थे। इससे विश्वामित्र बड़े चिंतित हुए। विश्वामित्र जी ने ध्यान लगाकर देखा तो उन्होंने जान लिया कि इन सब दुष्टों का अंत करने वाले राम रूप में दशरथ के घर अवतरित हो चुके हैं। विश्वामित्र अवध में जाकर राम लखन को लेकर आए और उन्होंने ताड़का का वध किया। विश्वामित्र जी का यज्ञ पूर्ण करवाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूम उठे। ब्यूरो