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यहां तो डीएम का आदेश भी नहीं मानते अफसर
Updated Fri, 02 Feb 2018 07:08 PM IST
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यहां तो डीएम का आदेश भी नहीं मानते अफसर
एफआईआर का आदेश कागजों में सिमटा, नहीं हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। विकास कार्यों के नाम पर लाखों का गोलमाल करने वाले प्रधान और सचिव पर अफसर मेहरबान हैं। वह डीएम के आदेश का माखौल उड़ा रहे हैं। यही वजह है कि भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाने पर भी महीनों से उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। पिछले दो महीनों में जांच में भ्रष्टाचार के आरोप मिलने पर डीएम की अनुमति पर प्रधानों व सचिवों पर एफआईआर तो कुछ से रिकवरी करने के आदेश दिए गए, लेकिन यह आदेश कागजों में सिमट कर रह गए। अभी तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। आलम यह है कि जुगलबंदी के चलते कभी अफसर तो कभी संबंधित विभाग के लिपिक कार्रवाई न हो पाए इसलिए फाइल दबा कर बैठ जाते हैं।
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केस-1
विकास खंड मरौरी की ग्राम पंचायत नाकूड़ में ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम शीतल वर्मा ने विकास कार्याें में हुए घोटाले की जांच कराई थी। जांच में ग्राम प्रधान भगवानदास और पंचायत सचिव ठाकुरदास पर ग्राम निधि के तहत 1.96 लाख रुपये का गोलमाल किए जाने का मामला सही पाया गया था। इस मामले में डीएम के आदेश पर डीडीओ ने 27 जनवरी को प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करने के साथ पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक एफआईआर नहीं हो सकी।
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केस-2
बरखेड़ा ब्लॉक के बहादुरपुर हुकमी के प्रधान के खिलाफ 2010-2014 के बीच मनरेगा से हुए कार्यों में
गड़बड़ी की शिकायत पर डीएम शीतल वर्मा के आदेश पर डीडीओ ने 29 जनवरी को प्रधान पर एफआईआर का आदेश जारी करते हुए तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई को कहा था। यह मामला भी अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। प्रधान को बचाने में जुटे अफसर एफआईआर का आदेश जारी कर भूल गए। अब मामले में दोबारा जांच की बात की जा रही है।
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केस-3
विकास खंड माधोटांडा की ग्राम पंचायत जमुनियां खास में प्रधानमंत्री आवास योजना कि पहली किस्त में लाभार्थियों से 20-20 हजार रुपये वसूलने की शिकायत की जांच में भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाने पर ग्राम प्रधान शंकर सिंह के खिलाफ 12 जनवरी को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए थे। इस प्रकरण में प्रधान को बचाने में लगे डीडीओ की फटकार भी लगी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ना हीं सचिव की भूमिका संलिप्त होने की जांच की गई।
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वर्जन-
भ्रष्टाचार के आरोप सही मिलने व जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्रधान व सचिव के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। डीडीओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। आदेश जारी होने के बाद एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? इसकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर शिथिलता बरती गई है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ
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यहां तो डीएम का आदेश भी नहीं मानते अफसर
एफआईआर का आदेश कागजों में सिमटा, नहीं हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। विकास कार्यों के नाम पर लाखों का गोलमाल करने वाले प्रधान और सचिव पर अफसर मेहरबान हैं। वह डीएम के आदेश का माखौल उड़ा रहे हैं। यही वजह है कि भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाने पर भी महीनों से उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। पिछले दो महीनों में जांच में भ्रष्टाचार के आरोप मिलने पर डीएम की अनुमति पर प्रधानों व सचिवों पर एफआईआर तो कुछ से रिकवरी करने के आदेश दिए गए, लेकिन यह आदेश कागजों में सिमट कर रह गए। अभी तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। आलम यह है कि जुगलबंदी के चलते कभी अफसर तो कभी संबंधित विभाग के लिपिक कार्रवाई न हो पाए इसलिए फाइल दबा कर बैठ जाते हैं।
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केस-1
विकास खंड मरौरी की ग्राम पंचायत नाकूड़ में ग्रामीणों की शिकायत पर डीएम शीतल वर्मा ने विकास कार्याें में हुए घोटाले की जांच कराई थी। जांच में ग्राम प्रधान भगवानदास और पंचायत सचिव ठाकुरदास पर ग्राम निधि के तहत 1.96 लाख रुपये का गोलमाल किए जाने का मामला सही पाया गया था। इस मामले में डीएम के आदेश पर डीडीओ ने 27 जनवरी को प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करने के साथ पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक एफआईआर नहीं हो सकी।
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केस-2
बरखेड़ा ब्लॉक के बहादुरपुर हुकमी के प्रधान के खिलाफ 2010-2014 के बीच मनरेगा से हुए कार्यों में
गड़बड़ी की शिकायत पर डीएम शीतल वर्मा के आदेश पर डीडीओ ने 29 जनवरी को प्रधान पर एफआईआर का आदेश जारी करते हुए तत्कालीन सचिव पर कार्रवाई को कहा था। यह मामला भी अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। प्रधान को बचाने में जुटे अफसर एफआईआर का आदेश जारी कर भूल गए। अब मामले में दोबारा जांच की बात की जा रही है।
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केस-3
विकास खंड माधोटांडा की ग्राम पंचायत जमुनियां खास में प्रधानमंत्री आवास योजना कि पहली किस्त में लाभार्थियों से 20-20 हजार रुपये वसूलने की शिकायत की जांच में भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाने पर ग्राम प्रधान शंकर सिंह के खिलाफ 12 जनवरी को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए थे। इस प्रकरण में प्रधान को बचाने में लगे डीडीओ की फटकार भी लगी थी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ना हीं सचिव की भूमिका संलिप्त होने की जांच की गई।
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भ्रष्टाचार के आरोप सही मिलने व जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्रधान व सचिव के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। डीडीओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। आदेश जारी होने के बाद एफआईआर क्यों नहीं कराई गई? इसकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर शिथिलता बरती गई है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, सीडीओ
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