विज्ञापन

हर राेज घ्ाुट रहा गाोमती का दम

Bareily Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 06:59 PM IST
गाोमती के पाट पर हाो रही ख्ाेती
गाोमती के पाट पर हाो रही ख्‍ाेती
विज्ञापन
ख़बर सुनें
पीलीभीत। अवध नगरी समेत 14 शहरों के लिए जीवनदायी कही जाने वाली गोमती का दम घुट रहा है। इस नदी को प्रदूषण मुक्त व अविरल बनाने के नाम पर केंद्र व राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन अपने ही जिले में गोमती अस्तित्व के लिए जूझ रही है। जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं है। गोमती आस्था से जुड़े लोग आज भी किसी भागीरथ का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन
नदी के पाट को खेत का हिस्सा बनाया
गोमती मूलत: भूजल पर आधारित नदी है। सदानीरा कही जाने वाली इस नदी का मुख्य स्रोत माधोटांडा की फुलहर झील है। इसके अस्तित्व व प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने को अरसे से लंबी चौड़ी घोषणाएं होती आ रही हैं। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि उद्गम स्थल माधोटांडा से लेकर शाहजहांपुर बार्डर के समीप बंजारघाट तक नदी पर कब्जा कर लिया गया। शहबाजपुर, हरीपुर, इटौरिया ताल्लुके अजीतपुर, शिंभुआ व बंजारघाट में लोगों ने नदी को अपने खेतों में मिला लिया। मामला कोर्ट में होने का हवाला देकर जिला प्रशासन भी लचर पैरवी के साथ कब्जा हटाने में लाचारी जता रहा है।

बंद हो गए गोमती के जल स्रोत
गोमती मूलत: भूजल पर आधारित नदी है। फुल्हर झील इसका मुख्य स्रोत माना जाता है। कई झीलों से निकले पानी की वजह से इसमें पूर्व में पूरे साल पानी भरा रहता था, लेकिन जमीन की बढ़ती भूख ने गोमती के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया। झील के आसपास व रास्ते में पड़ने वाली झीलों को लोगों ने पाट लिया।

पुनर्जीवन के लिए चले अभियान बेअसर
कुछ साल पूर्व माधोटांडा से गोमती के संरक्षण के अभियान की शुरुआत हुई थी। 960 किमी लंबी यात्रा के बाद इसका समापन भी गंगा में समाहित होने वाले स्थान पर किया गया। इसमें स्वामी विज्ञानानंद गंगा, जैविक कृषि विशेषज्ञ राजकुमार, पर्यावरणविद् चंद्रभूषण तिवारी जैसे दिग्गज भी शामिल हुए, लेकिन इस अभियान का असर आज तक देखने को नहीं मिला। हालांकि तत्कालीन प्रदेश सरकार के कार्यकाल में गोमती की चौड़ाई बढ़ाने व अविरल धारा बहाने संबंधी प्रोजेक्टों पर कार्य चलता रहा है।

अतिक्रमण चिह्नित तो हुए लेकिन हटाए नहीं गए
गोमती के उद्धार के लिए लखनऊ में समय-समय पर कई जिलाधिकारियों की बैठक हुई। प्रोजेक्टों को अमल में लाने के दिशा निर्देश भी दिए गए, लेकिन दुर्भाग्य था कि यह कार्य मनरेगा से कराने के आदेश दिए गए थे, दूसरे जगह-जगह अतिक्रमण को चिह्नित तो किया गया, लेकिन उस भूमि को खाली नहीं कराया गया। इसकी वजह से नदी की हालत नहीं सुधरी।

योगी सरकार पर टिकी निगाहें
गोमती को संजीवनी देने के लिए वर्षों से सरकारी व स्वयंसेवी संगठन घोषणाएं करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उन पर अमल नहीं हुआ। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर लखनऊ में हुए कार्यक्रम में गोमती की सफाई को लेकर योजना बनाने का इशारा किया है। इससे नदी की आस्था से जुड़े लोग अब प्रदेश सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।

यह है गोमती की रफ्तार में रोड़ा
- नदी के मुख्य भाग का सिकुड़ना
- नदी के रकवे में खेती होना
- गोमती के तटीय क्षेत्रों में जंगल का समाप्त होना
- भूजल के अत्यधिक दोहन से नदी के जलस्तर में कमी।

फैक्ट फाइल-
- 960 किमी लंबी है गोमती नदी
- गाजीपुर पहुंचकर गंगा में होती है समाहित
- 22 छोटी नदियां मिलती हैं गोमती में
- गोमती तट पर हैं 15 से अधिक आस्था केंद्र

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Chandigarh

हरियाणा में पंचायत का फरमान, मुस्लिम न दाढ़ी रखेंगे और न पढ़ेंगे नमाज...हिंदी में रखेंगे नाम

रोहतक की एक पंचायत ने नया फरमान जारी किया है। फरमान के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के लोग सार्वजिनक स्थल पर नमाज नहीं पढ़ेंगे और वो दाढ़ी भी नहीं रख सकेंगे।

19 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

गन्ना किसानों पर मेनका गांधी का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल, अब दी ये सफाई

सोशल मीडिया पर पीलीभीत सांसद मेनका गांधी का गन्ना किसानों को लेकर एक वीडियो वायरल होने के बाद बवाल हो गया। विरोधी उनपर जमकर निशाना साधने लगे। इसके बाद मेनका गांधी ने सफाई दी।

17 मई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree