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92 हजार ऋण धारक, माफी सिर्फ 52 हजार को

Fri, 06 Jul 2018 12:20 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत Updated Fri, 06 Jul 2018 12:20 AM IST
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Still 40 k farmers have to pay back loan
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योगी सरकार ने किसानों का ऋण माफ करने के लिए ऋण मोचन योजना शुरू की थी लेकिन इसका वास्तविक लाभ बैंक से ऋण लेने के बाद लंबे समय तक जमा न करने वालों को ही मिला जबकि नियमित रूप से किश्त जमा करने वाले किसान इससे वंचित रह गए और आज भी इसे चुकाने के लिए परेशान हैं। इनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
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जिले में लगभग 2.50 लाख किसान हैं जिसमें ऋण मोचन योजना के लिए विभिन्न बैंकों के माध्यम से लगभग 92 हजार किसानों के खाते कृषि विभाग को प्राप्त हुए थे। इसमें ऐसे ऋण खातों को लिया गया था जिन्होंने 31 मार्च 2017 के बाद इनमें ऋण वापसी न की हो। एनआईसी के माध्यम से इन खातों को कंप्यूटर में फीड कराने के बाद शासन की वेबसाइट पर डाला गया जहां विभिन्न फिल्टर लगाने के बाद पहले चरण में 34498 किसानों का ऋण माफ किया गया। इसके बाद विभिन्न स्तर से प्राप्त करीब 20 हजार शिकायतों के निस्तारण के बाद 4750 का ऋण और माफ किया गया। यह ऋण खाते चालू हालत में थे जबकि 12900 ऐसे किसानों का ऋण माफ किया गया जिनके खाते एनपीए हो गए थे। इस तरह जिले में 52148 किसानों का लगभग 250 करोड़ रुपया माफ किया गया।
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ठगे गए ईमानदारी से ऋण अदा करने वाले
प्रदेश सरकार की ऋण मोचन योजना में भले ही 52 हजार किसानों को लाभ मिला हो लेकिन बैंक में अपनी गुडविल बनाकर रखने वाले अथवा ऐसे छोटे और सीमांत किसान जो ब्याज की धनराशि बढ़ने के डर से समय-समय पर किस्तें जमा करते रहे ठगे गए। दरअसल ऋण मोचन योजना अप्रैल 2017 के बाद लागू की गई जबकि कई किसानों ने अपना ऋण खाता रिन्यूवल करने के लिए पुराना लोन जमाकर नए सिरे से ऋण हासिल कर लिया था।
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बैंकों की रही चांदी
ऋण योजना में भले ही शासन ने तमाम बंदिशें लगा रखी थीं लेकिन बैंक की चांदी रही। सूची में नाम भेजने से लेकर शासन से मिली धनराशि खाते में दर्ज करने और पुन: ऋण देने के नाम पर जमकर चांदी काटी गई।


माफी की आस में बढ़ गई रकम
ऋण माफी की आस में कई किसानों ने अपना ऋण जमा नहीं किया। माफ न होने पर शिकायत की और अंतिम सुनवाई के बाद भी जब ऋण माफी में नाम शामिल नहीं हुआ तो इसे अदा करने बैंक पहुंचे लेकिन इस बीच तीन चार माह का समय बीतने पर ब्याज बढ़ गया जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
 
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