{"_id":"5ac8c2404f1c1bb5618b620e","slug":"131523106368-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टाइगर रिजर्व में नहीं लागू हुई गैंडा परियोजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टाइगर रिजर्व में नहीं लागू हुई गैंडा परियोजना
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Sat, 07 Apr 2018 08:23 PM IST
विज्ञापन
tiger reserve
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले का जंगल टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद भले ही वनों से सटे इलाकों के लोगों ने अपने अधिकार को लेकर विरोध किया था लेकिन शासन और प्रशासन के जनप्रतिनिधियों एवं आला अफसरों ने घोषणाएं की थी कि वनों से सटे लोगों को इससे रोजगार के बड़े साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। टाइगर रिजर्व में गैंडा परियोजना लागू करने के लिए सर्वे कराया गया। टाइगर सफारी के लिए भी अफसरों ने शासन स्तर पर प्रयास किए। रेस्क्यू सेंटर भी बनाने की घोषणा की गई थी। स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टाइगर रिजर्व के चूका बीच में आकर यहां पर्यटन के रूप में भी बढ़ावा देने की घोषणाएं की थी। सच्चाई यह है जो योजनाएं यहां से बनाकर भेजी गई वह ठंडे बस्ते में चली गईं।
टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां सबसे पहले तत्कालीन सपा सरकार के प्रतिनिधियों और तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन ने यहां का दौरा किया था। जिसमें टाइगर रिजर्व को यह निर्देश दिए गए थे कि अतिशीघ्र गैंडा परियोजना लागू करने के लिए टाइगर रिजर्व में भूमिका चिह्नित कर सर्वे किया जाए ताकि असम से गैंडे यहां भेजे जा सके। जनपद के लोगों को भी इस घोषणा की खुशी हुई थी कि अब यहां दुधवा की तरह क्षेत्र का विकास होगा और विदेशी पर्यटक भी यहां आएंगे। अफसरों के निर्देश के बाद टाइगर रिजर्व में भूमि का चयन कर सर्वे शुरू किया यह सर्वे महोफ एवं बराही जंगल की सीमा पर भूमि का चयन किया गया। महोफ रेंज के 1200 हेक्टेयर और बराही जंगल की 300 हेक्टेयर मिलाकर लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वे किया गया था। जिसमें वहां की भौगोलिक स्थिति, ग्रासलैंड, पानी के साधन सर्वे में शामिल की गई थीं, क्योंकि इसी इलाके के एक किनारे पर शारदा डैम भी है। गैंडे नमी और दलदली भूमि को अधिक पसंद करते हैं। सपा की सरकार चली गई और वर्तमान सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
टाइगर सफारी के भी तेजी से शुरू हुए थे प्रयास
टाइगर सफारी के लिए आला अफसरों ने प्रयास शुरू किए थे। इसके लिए तत्कालीन वनसंरक्षक वीके सिंह ने बराही जंगल के बरूआ कुठारा क्षेत्र का चयन किया था। इसका प्रोजेक्ट बना कर शासन को भेजा था हालांकि मौके पर बरूआ कुठारा की भूमि पर अवैध कब्जे हैं। क्षेत्राधिकारी बराही अनिल शाह कहते हैं की टोटल टाइगर रिजर्व के कोर एरिया की भूमि है लेकिन राजस्व प्रशासन के सहयोग से ही पुलिस बल लेकर उस पर कब्जा मिल सकता है। दूसरे प्रदेश सरकार ने भी टाइगर सफारी के लिए यह कहकर हाथ खींच लिए इसके लिए केंद्र सरकार के भी कई विभागों से अनुमति लेनी होगी ऐसे में टाइगर रिजर्व में एक रेस्क्यू सेंटर खोल दिया जाए।
विज्ञापन
रेस्क्यू सेंटर खोलने के भी हुए प्रयास
जब टाइगर सफारी का मामला ठंडे बस्ते में चला गया तो वनसंरक्षक वीके सिंह ने रेस्क्यू सेंटर के लिए भी प्रयास तेज किए। इसके लिए माला जंगल में 10 हेक्टेयर रकबा चिह्नित किया गया। इसमें भी नतीजा शून्य ही निकला। टाइगर रिजर्व को प्रदेश सरकार से आज तक कुछ हाथ नहीं लग सका और इसी कारण जंगलों में बाघ और तेंदुए घटने लगे। अब तक कई बाघों की मौत हो चुकी है हाल ही में बराही के जंगल में एक घायल बाघ देखा गया था यदि रेस्क्यू सेंटर यहां खुला होता तो घायल बाघ को बेहोश कर इलाज किया जा सकता था।
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां सबसे पहले तत्कालीन सपा सरकार के प्रतिनिधियों और तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन ने यहां का दौरा किया था। जिसमें टाइगर रिजर्व को यह निर्देश दिए गए थे कि अतिशीघ्र गैंडा परियोजना लागू करने के लिए टाइगर रिजर्व में भूमिका चिह्नित कर सर्वे किया जाए ताकि असम से गैंडे यहां भेजे जा सके। जनपद के लोगों को भी इस घोषणा की खुशी हुई थी कि अब यहां दुधवा की तरह क्षेत्र का विकास होगा और विदेशी पर्यटक भी यहां आएंगे। अफसरों के निर्देश के बाद टाइगर रिजर्व में भूमि का चयन कर सर्वे शुरू किया यह सर्वे महोफ एवं बराही जंगल की सीमा पर भूमि का चयन किया गया। महोफ रेंज के 1200 हेक्टेयर और बराही जंगल की 300 हेक्टेयर मिलाकर लगभग 1500 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वे किया गया था। जिसमें वहां की भौगोलिक स्थिति, ग्रासलैंड, पानी के साधन सर्वे में शामिल की गई थीं, क्योंकि इसी इलाके के एक किनारे पर शारदा डैम भी है। गैंडे नमी और दलदली भूमि को अधिक पसंद करते हैं। सपा की सरकार चली गई और वर्तमान सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
टाइगर सफारी के भी तेजी से शुरू हुए थे प्रयास
टाइगर सफारी के लिए आला अफसरों ने प्रयास शुरू किए थे। इसके लिए तत्कालीन वनसंरक्षक वीके सिंह ने बराही जंगल के बरूआ कुठारा क्षेत्र का चयन किया था। इसका प्रोजेक्ट बना कर शासन को भेजा था हालांकि मौके पर बरूआ कुठारा की भूमि पर अवैध कब्जे हैं। क्षेत्राधिकारी बराही अनिल शाह कहते हैं की टोटल टाइगर रिजर्व के कोर एरिया की भूमि है लेकिन राजस्व प्रशासन के सहयोग से ही पुलिस बल लेकर उस पर कब्जा मिल सकता है। दूसरे प्रदेश सरकार ने भी टाइगर सफारी के लिए यह कहकर हाथ खींच लिए इसके लिए केंद्र सरकार के भी कई विभागों से अनुमति लेनी होगी ऐसे में टाइगर रिजर्व में एक रेस्क्यू सेंटर खोल दिया जाए।
विज्ञापन
रेस्क्यू सेंटर खोलने के भी हुए प्रयास
जब टाइगर सफारी का मामला ठंडे बस्ते में चला गया तो वनसंरक्षक वीके सिंह ने रेस्क्यू सेंटर के लिए भी प्रयास तेज किए। इसके लिए माला जंगल में 10 हेक्टेयर रकबा चिह्नित किया गया। इसमें भी नतीजा शून्य ही निकला। टाइगर रिजर्व को प्रदेश सरकार से आज तक कुछ हाथ नहीं लग सका और इसी कारण जंगलों में बाघ और तेंदुए घटने लगे। अब तक कई बाघों की मौत हो चुकी है हाल ही में बराही के जंगल में एक घायल बाघ देखा गया था यदि रेस्क्यू सेंटर यहां खुला होता तो घायल बाघ को बेहोश कर इलाज किया जा सकता था।