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कलेक्ट्रेट के दो बाबूओं को मिली अनिवार्य सेवानिवृति
Updated Tue, 01 Aug 2017 07:18 PM IST
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पीलीभीत। विकास भवन के प्रधान लिपिक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के बाद अब दूसरे दिन डीएम की अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग कमेटी ने तहसीलों में तैनात कलक्ट्रेट के दो बाबुओं को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी है। दो दिन में हुई तीन कार्रवाई से बाबुओं में हड़कंप मचा हुआ है।
पिछले दिनों शासन ने 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर उनकी कार्यक्षमता का आंकलन करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश जारी किए थे। शासन के इस आदेश के बाद कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की स्क्रीनिंग के लिए डीएम की अध्यक्षता में एवं विकास विभाग से जुड़े बाबुओं की स्क्रीनिंग के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया गया था। इन कमेटियों ने कई कर्मचारियों के सेवा इतिहास, वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सहित कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की थी। स्क्रीनिंग के बाद सोमवार को सीडीओ के नेतृत्व में गठित कमेटी ने विकास विभाग के प्रधान लिपिक रसकेंद्र प्रकाश को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी थी जबकि मंगलवार को अब डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने सदर तहसील में तैनात लिपिक बीना सक्सेना और पूरनपुर तहसील में तैनात लिपिक दिनेश कुमार को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। सूत्रों की मानें तो बीना सक्सेना को शारीरिक रूप से अक्षम माना गया है जबकि दिनेश कुमार की सत्यनिष्ठा ठीक नहीं मानी गई। बताते हैं कि दिनेश कुमार की सेवाएं कुछ साल पूर्व तत्कालीन डीएम ने समाप्त कर दी थीं जिसपर वह हाईकोर्ट के आदेश पर पुन: बहाल हो गए थे। एडीएम ब्रजकिशोर ने बताया कि दोनों कर्मचारियों के अभिलेख एवं सेवा इतिहास के निरीक्षण के बाद कमेटी ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया जिसपर अमल कर दोनों के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
तीन माह के वेतन सहित नोटिस
एडीएम ब्रजकिशोर ने बताया कि सेवानिवृत्ति का आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारियों को तीन माह का सावेतन नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद सेवानिवृत्ति की अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
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क्या है अनिवार्य सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया
शासनादेश के तहत 31 मार्च 2016 तक कटआफ मानते हुए कर्मचारी की दक्षता, सत्यनिष्ठा की जांच की जाती है। स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट में संबंधित को जनहित में शासकीय सेवाओं के निर्वहन में अनुपयुक्त पाए जाने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है।
द्वेषवश की गई कार्रवाई
एक दिन पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए प्रधान लिपिक रसकेंद्र सक्सेना ने सीडीओ की इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया है। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही सस्पेंड चल रहे हैं। ऐसे में उनपर चल रही कार्रवाई को पूर्ण किए बिना दूसरी कार्रवाई गलत है। उनका दावा है कि कमेटी के अन्य अधिकारियों से भी सीडीओ ने दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए हैं।
राज्य कर्मचारी परिषद की बैठक आज
उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हशमुद्दीन खां ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों पर हो रही इस कार्रवाई पर बुधवार को होने वाली बैठक में निर्णय कर रणनीति बनाई जाएगी।
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पिछले दिनों शासन ने 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर उनकी कार्यक्षमता का आंकलन करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश जारी किए थे। शासन के इस आदेश के बाद कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों की स्क्रीनिंग के लिए डीएम की अध्यक्षता में एवं विकास विभाग से जुड़े बाबुओं की स्क्रीनिंग के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया गया था। इन कमेटियों ने कई कर्मचारियों के सेवा इतिहास, वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सहित कई बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की थी। स्क्रीनिंग के बाद सोमवार को सीडीओ के नेतृत्व में गठित कमेटी ने विकास विभाग के प्रधान लिपिक रसकेंद्र प्रकाश को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी थी जबकि मंगलवार को अब डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने सदर तहसील में तैनात लिपिक बीना सक्सेना और पूरनपुर तहसील में तैनात लिपिक दिनेश कुमार को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। सूत्रों की मानें तो बीना सक्सेना को शारीरिक रूप से अक्षम माना गया है जबकि दिनेश कुमार की सत्यनिष्ठा ठीक नहीं मानी गई। बताते हैं कि दिनेश कुमार की सेवाएं कुछ साल पूर्व तत्कालीन डीएम ने समाप्त कर दी थीं जिसपर वह हाईकोर्ट के आदेश पर पुन: बहाल हो गए थे। एडीएम ब्रजकिशोर ने बताया कि दोनों कर्मचारियों के अभिलेख एवं सेवा इतिहास के निरीक्षण के बाद कमेटी ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया जिसपर अमल कर दोनों के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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तीन माह के वेतन सहित नोटिस
एडीएम ब्रजकिशोर ने बताया कि सेवानिवृत्ति का आदेश जारी होने के बाद संबंधित कर्मचारियों को तीन माह का सावेतन नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद सेवानिवृत्ति की अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
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क्या है अनिवार्य सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया
शासनादेश के तहत 31 मार्च 2016 तक कटआफ मानते हुए कर्मचारी की दक्षता, सत्यनिष्ठा की जांच की जाती है। स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट में संबंधित को जनहित में शासकीय सेवाओं के निर्वहन में अनुपयुक्त पाए जाने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाती है।
द्वेषवश की गई कार्रवाई
एक दिन पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए प्रधान लिपिक रसकेंद्र सक्सेना ने सीडीओ की इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया है। उन्होंने बताया कि वह पहले से ही सस्पेंड चल रहे हैं। ऐसे में उनपर चल रही कार्रवाई को पूर्ण किए बिना दूसरी कार्रवाई गलत है। उनका दावा है कि कमेटी के अन्य अधिकारियों से भी सीडीओ ने दबाव बनाकर हस्ताक्षर कराए हैं।
राज्य कर्मचारी परिषद की बैठक आज
उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हशमुद्दीन खां ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों पर हो रही इस कार्रवाई पर बुधवार को होने वाली बैठक में निर्णय कर रणनीति बनाई जाएगी।