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भागवत कथा मे श्री कृष्ण की बाल लीलाओ का किया वर्णन
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:51 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
बाल साध्वी राधा देवी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर कहा भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षसों का संहार कर साधु संतों की रक्षा की।
क्षेत्र के ग्राम डूंडाहेडा स्थित बालाजी आश्रम में महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए बाल साध्वी राधा देवी ने कहा भगवान कृष्ण ने अपनी अल्पायु में ऐसे राक्षसों को मारा, जिनकी शक्ति बढ़ती जा रही थी और वह बडे़ बडे़ बलवानों से नहीं मारे गए। उन्होंने बाल लीलाओं में कई दुष्टों का अंत किया। गिरा जी महाराज की पूजा से इंद्र देव का अहंकार दूर करने के लिए इंद्र देव क्रोधित हो गए और तेज तूफान के साथ बारिश कराते रहे। भगवान कृष्ण ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर लाए और ब्रजवासियों की रक्षा की। गोवर्धन महाराज को अपना ही गुरू बताकर उनकी पूजा प्रारंभ कराई। भगवान श्री कृष्ण ने कहा गुरू पूर्णिमा के रूप में जो भी गिराज जी महाराज की पूजा करेगा, वह निश्चित मेरी पूजा कर मुझसे आशीर्वाद प्राप्त कर लेगा। गिराज पर्वत की परिक्रमा करने वाला प्राणी निश्चित सांसारिक सुख भोगकर स्वर्ग की प्राप्ति करेगा। इस दौरान भंडारे एवं गुरू पूजा का आयोजन भी किया।
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बाल साध्वी राधा देवी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर कहा भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षसों का संहार कर साधु संतों की रक्षा की।
क्षेत्र के ग्राम डूंडाहेडा स्थित बालाजी आश्रम में महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए बाल साध्वी राधा देवी ने कहा भगवान कृष्ण ने अपनी अल्पायु में ऐसे राक्षसों को मारा, जिनकी शक्ति बढ़ती जा रही थी और वह बडे़ बडे़ बलवानों से नहीं मारे गए। उन्होंने बाल लीलाओं में कई दुष्टों का अंत किया। गिरा जी महाराज की पूजा से इंद्र देव का अहंकार दूर करने के लिए इंद्र देव क्रोधित हो गए और तेज तूफान के साथ बारिश कराते रहे। भगवान कृष्ण ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर लाए और ब्रजवासियों की रक्षा की। गोवर्धन महाराज को अपना ही गुरू बताकर उनकी पूजा प्रारंभ कराई। भगवान श्री कृष्ण ने कहा गुरू पूर्णिमा के रूप में जो भी गिराज जी महाराज की पूजा करेगा, वह निश्चित मेरी पूजा कर मुझसे आशीर्वाद प्राप्त कर लेगा। गिराज पर्वत की परिक्रमा करने वाला प्राणी निश्चित सांसारिक सुख भोगकर स्वर्ग की प्राप्ति करेगा। इस दौरान भंडारे एवं गुरू पूजा का आयोजन भी किया।