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41 दिन पीलीभीत जेल में रहा था माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
Updated Mon, 09 Jul 2018 11:48 PM IST
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09 पीबीटीपी7
41 दिन पीलीभीत जेल में रहा था माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
क्रासर.....
जिले में शिफ्ट किए जाने के दौरान भी परिजन जताते रहे थे हमले की आशंका
क्रासर....
तब जेल में अंदर तक बढ़ा दी गई थी सुरक्षा व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बागपत जेल में बंद पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या की खबर ने सनसनी फैला दी है। एक साल पहले झांसी जेल से मुन्ना बजरंगी को पीलीभीत शिफ्ट किया गया था, उस वक्त भी उसके साथ आए परिवारवालों ने साफतौर पर हमला कर हत्या करने की आशंका जताई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर से जिला कारागार व आसपास के इलाकों की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था।
शासन के निर्देश पर मुन्ना बजरंगी नौ अप्रैल 2017 को भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच जिला कारागार पीलीभीत आया था। उसको शिफ्ट करने का कोई आदेश पीलीभीत जेल प्रशासन के पास न पहुंचने के कारण कारागार गेट पर उसे साढ़े तीन घंटे पुलिस की गाड़ी में इंतजार करना पड़ा। इसके बाद मेल पर आदेश मंगाए जाने के बाद उसकी इंट्री की गई थी। वह यहां पर 41 दिन रहने के बाद 20 मई 2017 को वापस झांसी जेल भेज दिया गया। तब मुन्ना बजरंगी के पीछे आए उसके परिवार के लोग उस वक्त भी मुन्ना की जान को खतरा जता रहे थे। उसकी हत्या न कर दी जाए, इसका उन्हें डर था। वहीं हार्ट की बीमारी को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए भी पीलीभीत में हुई शिफ्टिंग को लेकर भी परिजन संतुष्ट नहीं थे। यहां जेल में उसको अलग बैरक में रखा गया। जेल प्रशासन उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रहा था। जेल में लगाए गए जैमर को भी मुन्ना की मौजूदगी से ही जोड़ा गया। वहीं सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि जब तक कैमरे लग पाते, मुन्ना को दोबारा झांसी जेल भेज दिया गया। मुन्ना बजरंगी के यहां जेल मे रहते हुए जेल परिसर के बाहर जिला प्रशासन ने काफी सख्ती कर दी थी। जेल के आसपास आने वाले लोगों के साथ ही संदिग्ध लगने वाले वाहनों को भी चेक किया जा रहा था। एक बार एक कार को भी संदेह के आधार पर सीज किया गया। इसको लेकर बताया गया कि उस कार से बजरंगी से मिलने कुछ लोग आए थे। जेल के बाहर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई थी। मात्र 41 दिन जिला कारागार में रहा मुन्ना बजरंगी अपने अंदाज के चलते सुर्खियों में रहा था। अब उसकी हत्या का पता लगते ही जिला स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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41 दिन पीलीभीत जेल में रहा था माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
क्रासर.....
जिले में शिफ्ट किए जाने के दौरान भी परिजन जताते रहे थे हमले की आशंका
क्रासर....
तब जेल में अंदर तक बढ़ा दी गई थी सुरक्षा व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बागपत जेल में बंद पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या की खबर ने सनसनी फैला दी है। एक साल पहले झांसी जेल से मुन्ना बजरंगी को पीलीभीत शिफ्ट किया गया था, उस वक्त भी उसके साथ आए परिवारवालों ने साफतौर पर हमला कर हत्या करने की आशंका जताई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर से जिला कारागार व आसपास के इलाकों की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था।
शासन के निर्देश पर मुन्ना बजरंगी नौ अप्रैल 2017 को भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच जिला कारागार पीलीभीत आया था। उसको शिफ्ट करने का कोई आदेश पीलीभीत जेल प्रशासन के पास न पहुंचने के कारण कारागार गेट पर उसे साढ़े तीन घंटे पुलिस की गाड़ी में इंतजार करना पड़ा। इसके बाद मेल पर आदेश मंगाए जाने के बाद उसकी इंट्री की गई थी। वह यहां पर 41 दिन रहने के बाद 20 मई 2017 को वापस झांसी जेल भेज दिया गया। तब मुन्ना बजरंगी के पीछे आए उसके परिवार के लोग उस वक्त भी मुन्ना की जान को खतरा जता रहे थे। उसकी हत्या न कर दी जाए, इसका उन्हें डर था। वहीं हार्ट की बीमारी को लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए भी पीलीभीत में हुई शिफ्टिंग को लेकर भी परिजन संतुष्ट नहीं थे। यहां जेल में उसको अलग बैरक में रखा गया। जेल प्रशासन उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रहा था। जेल में लगाए गए जैमर को भी मुन्ना की मौजूदगी से ही जोड़ा गया। वहीं सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि जब तक कैमरे लग पाते, मुन्ना को दोबारा झांसी जेल भेज दिया गया। मुन्ना बजरंगी के यहां जेल मे रहते हुए जेल परिसर के बाहर जिला प्रशासन ने काफी सख्ती कर दी थी। जेल के आसपास आने वाले लोगों के साथ ही संदिग्ध लगने वाले वाहनों को भी चेक किया जा रहा था। एक बार एक कार को भी संदेह के आधार पर सीज किया गया। इसको लेकर बताया गया कि उस कार से बजरंगी से मिलने कुछ लोग आए थे। जेल के बाहर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई थी। मात्र 41 दिन जिला कारागार में रहा मुन्ना बजरंगी अपने अंदाज के चलते सुर्खियों में रहा था। अब उसकी हत्या का पता लगते ही जिला स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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