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पुलवामा कांड के बाद नेपाल बार्डर पर अलर्ट, सतर्कता बढ़ी
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पीलीभीत। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में दो दिन पहले हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के जवानों के शहीद होने के बाद जहां पूरे देश में गम और गुस्सा है, वहीं सुरक्षा को लेकर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। नेपाल बार्डर से जुड़े इलाकों में अलर्ट जारी करते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस और एसएसबी के अधिकारी खुद निगेहबानी कर रहे हैं। बार्डर पर तैनात जवान हर आने-जाने वाले की गहनता से चेकिंग कर रहे हैं। 24 घंटे गश्त कराई जा रही है। इसको लेकर बार्डर स्कीम लागू करने की भी पुलिस अधिकारियों ने तैयारी कर ली है।
पीलीभीत जिले की सीमा नेपाल बार्डर से लगती हैं। माधोटांडा क्षेत्र के कुतिया कवर, नौजल्हा, गभिया सहराई, बूंदीभूड़, सुदंरनगर और हजारा थाना क्षेत्र के टाटरगंज, कंबोझनगर समेत कई इलाकों में नेपाल बार्डर से होकर लोगों की आवाजाही रहती है। यहां के लोग नेपाल और वहां से लोग काम के लिए जिले की सीमा में प्रवेश करते हैं। सीमा पर एसएसबी की 49वीं वाहिनी के जवान सुरक्षा की कमान संभाले हैं। वहीं पुलिस की भी सीमावर्ती इलाके में चौकियां हैं। अब पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी होते ही नेपाल बार्डर पर भी सरक्षा को लेकर सख्ती कर दी गई है। इस रास्ते किसी तरह की घुसपैठ न हो सके, इस पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। एसएसबी के जवान गश्त में लगे हैं। बार्डर से गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग करने के बाद ही जाने दिया जा रहा है। संदिग्धता मिलने पर सख्ती से पूछताछ की जा रही है। पुलिस की ओर से भी चौकसी बढ़ा गई है।
कच्चे रास्तों पर खुदवाए गड्ढे, जंगल पर भी निगाह
इंडो-नेपाल सीमा के आम रास्तों के अलावा कच्चे रास्तों पर भी प्लानिंग के तहत सुरक्षा रणनीति पर काम किया जा रहा है। एसएसबी की ओर से सीमा पर पिलर नंबर 17 और 18 क्षेत्र के कच्चे रास्तों से आवाजाही रोकने को कदम उठाए गए है। यहां पर एसएसबी ने गहरे गड्ढे खुदवा दिए गए हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाके के जंगल पर भी निगाह रखी जा रही है।
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फेक करेंसी और मानव तस्करी के लिए बदनाम रहा है नेपाल बार्डर
खुली सीमा होने के कारण इंडो-नेपाल बार्डर पर आवाजाही रहती है। पुलिस द्वारा पकड़े गए मानव तस्करी के कई मामलों में नेपाल बार्डर के रास्ते तस्करों का आना भी बताया जाता रहा है। फेक करेंसी को भारत में लाने के लिए भी नेपाल के रास्ते का इस्तेमाल होने की बात कई बार खुलकर अफसरों ने कही। कई साल पहले खुद खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया था। इसके अलावा तस्करी के अन्य मामलों में भी नेपाल बार्डर का इस्तेमाल होता रहा है।
एक आतंकी के नेपाल के रास्ते आने की सूचना पर कई दिन रहा था अलर्ट
नेपाल के रास्ते घुसपैठ की आशंका व्यक्त करते हुए वैसे तो पहले कई बार बार्डर से सटे इलाकों में अलर्ट रहा है, लेकिन करीब दस साल पहले पाकिस्तान के एक बड़े आतंकी के नेपाल बार्डर के रास्ते अलीगढ़ तक जाने की सूचना पर अलर्ट जारी होने के बाद कई दिनों तक सीमावर्ती इलाके में दिन-रात चौकसी बरती गई। हालांकि तब कोई आतंकी गतिविधि सामने नहीं आई। इसके अलावा भी कई अन्य आतंकी हमलों में नेपाल बार्डर पर विशेष ध्यान देते हुए अलर्ट किया जाता है।
माओवादियों की अक्सर इस रास्ते हुई घुसपैठ
नेपाल के रास्ते आतंकी गतिविधियां तो सामने नहीं आई, लेकिन पहले माओवादी इसी रास्ते भारत में प्रवेश करते थे। सालों पहले ऐसे कई मामले भी सामने आए थे, जिसमें माओवादी नेपाल होते हुए जिले में पहुंच गए। एक माओवादी का तो शहर के एक अस्पताल में गोली लगने के बाद इलाज होने की भी बात कही जाती है। उसे वहां से ले जाने के लिए आए अन्य माओवादी भी नेपाल के रास्ते ही यहां पहुंचे थे।
पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी किया जा चुका है। इसके तहत सुरक्षा बिंदुओं पर इंडो-नेपाल बार्डर पर कार्रवाई शुुरू कर दी गई है। मुख्य मार्गों के अलावा कच्चे रास्तों पर भी निगाह हैं। हर व्यक्ति और वाहन को चेकिंग के बाद ही गुजारा जा रहा है। - रामचंद्र रमोला, इंचार्ज नौजल्हा बीओपी चौकी एसएसबी
पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी किए जाने के बाद से ही नेपाल बार्डर से जुड़े इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसको लेकर गंभीरता बरतने को कहा गया है। उसी के आधार पर कार्रवाई भी कराई जा रही है। बार्डर स्कीम लागू करने पर भी मंथन किया जा रहा है। - मनोज कुमार सोनकर, एसपी
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पीलीभीत जिले की सीमा नेपाल बार्डर से लगती हैं। माधोटांडा क्षेत्र के कुतिया कवर, नौजल्हा, गभिया सहराई, बूंदीभूड़, सुदंरनगर और हजारा थाना क्षेत्र के टाटरगंज, कंबोझनगर समेत कई इलाकों में नेपाल बार्डर से होकर लोगों की आवाजाही रहती है। यहां के लोग नेपाल और वहां से लोग काम के लिए जिले की सीमा में प्रवेश करते हैं। सीमा पर एसएसबी की 49वीं वाहिनी के जवान सुरक्षा की कमान संभाले हैं। वहीं पुलिस की भी सीमावर्ती इलाके में चौकियां हैं। अब पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी होते ही नेपाल बार्डर पर भी सरक्षा को लेकर सख्ती कर दी गई है। इस रास्ते किसी तरह की घुसपैठ न हो सके, इस पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। एसएसबी के जवान गश्त में लगे हैं। बार्डर से गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग करने के बाद ही जाने दिया जा रहा है। संदिग्धता मिलने पर सख्ती से पूछताछ की जा रही है। पुलिस की ओर से भी चौकसी बढ़ा गई है।
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कच्चे रास्तों पर खुदवाए गड्ढे, जंगल पर भी निगाह
इंडो-नेपाल सीमा के आम रास्तों के अलावा कच्चे रास्तों पर भी प्लानिंग के तहत सुरक्षा रणनीति पर काम किया जा रहा है। एसएसबी की ओर से सीमा पर पिलर नंबर 17 और 18 क्षेत्र के कच्चे रास्तों से आवाजाही रोकने को कदम उठाए गए है। यहां पर एसएसबी ने गहरे गड्ढे खुदवा दिए गए हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाके के जंगल पर भी निगाह रखी जा रही है।
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फेक करेंसी और मानव तस्करी के लिए बदनाम रहा है नेपाल बार्डर
खुली सीमा होने के कारण इंडो-नेपाल बार्डर पर आवाजाही रहती है। पुलिस द्वारा पकड़े गए मानव तस्करी के कई मामलों में नेपाल बार्डर के रास्ते तस्करों का आना भी बताया जाता रहा है। फेक करेंसी को भारत में लाने के लिए भी नेपाल के रास्ते का इस्तेमाल होने की बात कई बार खुलकर अफसरों ने कही। कई साल पहले खुद खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया था। इसके अलावा तस्करी के अन्य मामलों में भी नेपाल बार्डर का इस्तेमाल होता रहा है।
एक आतंकी के नेपाल के रास्ते आने की सूचना पर कई दिन रहा था अलर्ट
नेपाल के रास्ते घुसपैठ की आशंका व्यक्त करते हुए वैसे तो पहले कई बार बार्डर से सटे इलाकों में अलर्ट रहा है, लेकिन करीब दस साल पहले पाकिस्तान के एक बड़े आतंकी के नेपाल बार्डर के रास्ते अलीगढ़ तक जाने की सूचना पर अलर्ट जारी होने के बाद कई दिनों तक सीमावर्ती इलाके में दिन-रात चौकसी बरती गई। हालांकि तब कोई आतंकी गतिविधि सामने नहीं आई। इसके अलावा भी कई अन्य आतंकी हमलों में नेपाल बार्डर पर विशेष ध्यान देते हुए अलर्ट किया जाता है।
माओवादियों की अक्सर इस रास्ते हुई घुसपैठ
नेपाल के रास्ते आतंकी गतिविधियां तो सामने नहीं आई, लेकिन पहले माओवादी इसी रास्ते भारत में प्रवेश करते थे। सालों पहले ऐसे कई मामले भी सामने आए थे, जिसमें माओवादी नेपाल होते हुए जिले में पहुंच गए। एक माओवादी का तो शहर के एक अस्पताल में गोली लगने के बाद इलाज होने की भी बात कही जाती है। उसे वहां से ले जाने के लिए आए अन्य माओवादी भी नेपाल के रास्ते ही यहां पहुंचे थे।
पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी किया जा चुका है। इसके तहत सुरक्षा बिंदुओं पर इंडो-नेपाल बार्डर पर कार्रवाई शुुरू कर दी गई है। मुख्य मार्गों के अलावा कच्चे रास्तों पर भी निगाह हैं। हर व्यक्ति और वाहन को चेकिंग के बाद ही गुजारा जा रहा है। - रामचंद्र रमोला, इंचार्ज नौजल्हा बीओपी चौकी एसएसबी
पुलवामा कांड के बाद अलर्ट जारी किए जाने के बाद से ही नेपाल बार्डर से जुड़े इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसको लेकर गंभीरता बरतने को कहा गया है। उसी के आधार पर कार्रवाई भी कराई जा रही है। बार्डर स्कीम लागू करने पर भी मंथन किया जा रहा है। - मनोज कुमार सोनकर, एसपी