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बाइफरकेशन में भालू की दस्तक, सिंचाई कर्मी भागे
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:28 AM IST
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बाइफरकेशन में भालू की दस्तक, सिंचाई कर्मी भागे
माधोटांडा (पीलीभीत)। बाइफरकेशन स्थित सिंचाई विभाग की परियोजना के हेड पर अचानक एक भालू की दस्तक से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने शोरशराबा कर बमुश्किल भालू को भगाया।
सिंचाई विभाग की बाइफरकेशन कॉलोनी के पास ही सिंचाई परियोजना बनी हुई है। यहां दिन व रात कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। बुधवार सुबह अचानक एक भालू आ गया। केबिन के बाहर बैठे कुछ कर्मचारियों की निगाह भालू पर पड़ते ही वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई। बाद में एकत्र हुए कर्मचारियों ने शोरशराबा कर भालू को बमुश्किल मुस्तफाबाद जंगल की ओर भगाया। सिंचाई कर्मचारी राकेश, गंगाराम, विजयपाल, राधे ने बताया कि इन दिनों तीन भालू लगातार बराही जंगल से मुस्तफाबाद जंगल की ओर निकल रहे हैं। रात को भी फिर उसी जंगल में आ जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन लोगों के पास कोई हथियार भी नहीं है, जिससे वे अपनी सुरक्षा कर सके। रात को ड्यूटी करना एक जोखिम भरा काम है। क्योंकि नहरों में पानी के रोस्टर के मुताबिक करने के लिए लगातार निगरानी करनी होती है। विभाग द्वारा कर्मचारियों को न तो टॉर्च दी गई और न ही उनके सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं। मालूम हो कि पिछले वर्षों में दो कर्मचारी भालू के हमले से घायल भी हो चुके हैं।
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माधोटांडा (पीलीभीत)। बाइफरकेशन स्थित सिंचाई विभाग की परियोजना के हेड पर अचानक एक भालू की दस्तक से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने शोरशराबा कर बमुश्किल भालू को भगाया।
सिंचाई विभाग की बाइफरकेशन कॉलोनी के पास ही सिंचाई परियोजना बनी हुई है। यहां दिन व रात कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। बुधवार सुबह अचानक एक भालू आ गया। केबिन के बाहर बैठे कुछ कर्मचारियों की निगाह भालू पर पड़ते ही वहां हड़कंप मच गया। कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई। बाद में एकत्र हुए कर्मचारियों ने शोरशराबा कर भालू को बमुश्किल मुस्तफाबाद जंगल की ओर भगाया। सिंचाई कर्मचारी राकेश, गंगाराम, विजयपाल, राधे ने बताया कि इन दिनों तीन भालू लगातार बराही जंगल से मुस्तफाबाद जंगल की ओर निकल रहे हैं। रात को भी फिर उसी जंगल में आ जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन लोगों के पास कोई हथियार भी नहीं है, जिससे वे अपनी सुरक्षा कर सके। रात को ड्यूटी करना एक जोखिम भरा काम है। क्योंकि नहरों में पानी के रोस्टर के मुताबिक करने के लिए लगातार निगरानी करनी होती है। विभाग द्वारा कर्मचारियों को न तो टॉर्च दी गई और न ही उनके सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं। मालूम हो कि पिछले वर्षों में दो कर्मचारी भालू के हमले से घायल भी हो चुके हैं।
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