फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   106 year old Drummond College building reminiscent of Awadh style

धरोहरः अवैध शैली की याद दिलाती 106 वर्ष पुरानी ड्रमंड कॉलेज की इमारत

Wed, 06 Jul 2022 01:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 01:30 AM IST
विज्ञापन
106 year old Drummond College building reminiscent of Awadh style
ड्रमंड इंटर कॉलेज - फोटो : PILIBHIT
राकेश कुमार
विज्ञापन

पीलीभीत। आज जिसे आप अब ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज के रूप में देख रहे हैं, इसकी इमारत 106 वर्ष पुरानी है। अतीत शानदार है। इमारत के मेहराब अवध शैली की याद दिलाते हैं। छज्जों को देखकर फ्रांस और इटली की नियो क्लासिकल शैली की झलक मिलती है। कॉलेज शहर की पहचान है। यहां से पढ़ लिख कर आगे बढ़े लोग तराई क्षेत्र का नाम पूरे संसार में रोशन कर रहे हैं।
कॉलेज में प्रदर्शित बोर्ड के मुताबिक इमारत का निर्माण 1915 में हुआ था। इस तरह यह इमारत 106 वर्ष की हो गई। अपना एक शतक पूरा करने के बाद भी यह सुरक्षित है। हेरिटेज इमारतों की तरह अतीत की यादों को ताजा करा रही है। उनकी नजर में यह जिले की एक अहम एतिहासिक धरोहर है। अतीत को लेकर बुजुर्गों से सुनी बातों के आधार पर स्थानीय लोग बताते हैं कि ड्रमंड कॉलेज की शुुरुआत एक छोटे से विद्यालय के रूप में की गई थी।
विज्ञापन

विद्यालय की शुरुआत कब हुई? इसका उल्लेख कॉलेज के किसी भी बोर्ड पर नहीं है। हां एक बोर्ड कॉलेज में लगा, जिसमें विद्यालय को मान्यता मिलने का उल्लेख है। मौजूदा प्रधानाचार्य संतोष कुमार कहते हैं कि वर्ष 1890 में विद्यालय को जूनियर स्तर पर सरकारी मान्यता मिली थी। इसी वर्ष को विद्यालय की स्थापना का वर्ष मान लिया जाए तो विद्यालय की उम्र वर्ष 2022 में 132 वर्ष की हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विद्यालय के इतिहास संबंधी बोर्ड के मुताबिक वर्ष 1905 में इसे हाईस्कूल तक किया गया। तत्कालीन अंग्रेज कलक्टर आर ड्रमंड ने इसे तब जिला स्कूल के रूप में स्थापित किया था। ड्रमंड कॉलेज की जो शानदार इमात अब पीलीभीत की पहचान बन गई है। आजादी के बाद वर्ष 1952 में विद्यालय को इंटरमीडिएट स्तर की मान्यता दी गई थी। आर्कीटेक्ट मनु जायसवाल ने बताया कि इमारत के मेहराब अवध की वास्तुशैली का नमूना है। खिड़कियों के छज्जे नियो क्लासिकल शैली में बने हैं।
अवध की शैली में जो इमारतें बनी हैं उसमें लखनऊ विश्वविद्यालय की इमारत भी है। लखनऊ विश्वविद्यालय की इमारत की तरह कालेज की इमारत के मेहराब भी दिख रहे हैं। इसलिए इसे अवध शैली से प्रभावित मानते हैं। जिस तरह से इटली और फ्रांस में पुरानी इमारतों के झज्जे बनते थे, उसी तरह से इस इमारत के छज्जे भी हैं। यह नियो क्लासिकल शैली कहलाती है।
(आर्किटेक्ट मनु जायसवाल से हुई बातचीत के मुताबिक)
एक जमाना वह भी था जब 6500 विद्यार्थी ड्रमंड कॉलेज में पढ़ा करते थे। अब 1350 विद्यार्थी हैं। ड्रमंड कॉलेज के पास बड़ा परिसर है। ट्रस्ट के पास संसाधन हैं। उनका प्रयोग विद्यालय के विकास और शिक्षा क्षेत्र में विस्तार के लिए कराए जाने का प्रयास है ताकि विद्यालय एक बार फिर अपना गौरव हासिल करे और शहर के साथ जिले की पहचान को पूरे विश्व में रोशन करे।
-संतोष कुमार, प्रधानाचार्य, ड्रमंड राजकीय इंटर कालेज, पीलीभीत
इन हस्तियों ने नाम रोशन किया
ड्रमंड कॉलेज के सेवा निवृत्त कार्यवाहक प्रधानाचार्य नरेंद्र मोहन सक्सेना ने बताया कि कालेज का गौरवशाली इतिहास है। कॉलेज में अमित कुमार सिंह ने पढ़ाई की और 1990 में इंटरमीडिएट की मेरिट में यूपी टॉप किया था। शशांक सक्सेना गेल इंडिया में चीफ मैनेजर बने। नरेश पाल गंगवार आईएएस बने। राजस्थान में तैनाती है। राकेश मालपानी पहले पीसीएस थे अब आईएएस अधिकारी हैं। गृह विभाग लखनऊ में विशेष सचिव हैं। कई और हस्तियां इस कालेज से पढ़कर निकली हैं। शिशिर अग्रवाल टाटा स्पेस में बड़े पद पर हैं।
मैं मानता हूं कि कॉलेज शहर की नहीं, जिले की शान है। इसके विकास के लिए हर संभव प्रयास स्थानीय नेताओं को करना चाहिए। -नरेंद्र मोहन सक्सेना, ड्रमंड कॉलेज के सेवानिवृत्त कार्यवाहक प्रधानाचार्य

मेरी यादे जुड़ीं हैं कॉलेज से
भले ही मैं आईएएस बन गया लेकिन इस कॉलेज का योगदान कभी भूल नहीं सकता। मैंने 1986 में हाईस्कूल कॉमर्स में जिला टॉप किया था। तब प्रधानाचार्य आरए अग्रवाल हुआ करते थे। उनका अनुशासन आज भी याद है। -राकेश मालपानी, आईएएस, अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed