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डगा क्षेत्र में हो रही बाघ व तेंदुए की चहलकदमी
Updated Thu, 15 Mar 2018 07:15 PM IST
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डगा क्षेत्र में बाघ व तेंदुआ की चहलकदमी
एक सप्ताह पूर्व मृत अवस्था में मिला था तेंदुआ
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा। बराही जंगल से सटे क्षेत्र हल्दी डेंगा व डगा क्षेत्र में एक सप्ताह पूर्व मृत मिले तेंदुआ की मौत का राज अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन क्षेत्र में बाघ एवं तेंदुआ की चहलकदमी फिर दिखने लगी है जिससे लोगों दहशत है।
बराही रेंज से सटे डगा गांव में एक सप्ताह पूर्व हरदोई ब्रांच नहर के निकट तेंदुआ का गला सड़ा शव मिला था। वनविभाग ने उसका बरेली में पोस्टमार्टम कराया था। इसकी रिपोर्ट अभी वन विभाग को नहीं मिली है। इधर करीब तीन दिनों से बराही के जंगल से निकलकर एक तेंदुआ एवं एक बाघ फिर इस इलाके में घूमता देखा जा रहा है। लोगों को पगचिह्न देखने को मिल रहे हैं। बाघ के पगचिह्न दिखने से जंगल की सीमा से सटे किसानों में दहशत है। वहीं दूसरी ओर अभी तक न तो टाइगर रिजर्व और न ही सामाजिक वानिकी की ओर से इस क्षेत्र में कोई चौकसी अथवा निगरानी की जा रही है और न ही इन्हें जंगल में खदेड़े के प्रयास हो रहे हैं। सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर साजिद हसन ने बताया कि जंगल से के आसपास अक्सर बाघ व तेंदुआ बाहर आ जाते हैं जो कुछ समय बाद स्वत: जंगल में लौट जाते हैं। डगा क्षेत्र में चौकसी के लिए एक वनरक्षक को कुछ वाचरों के साथ लगाया गया है।
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एक सप्ताह पूर्व मृत अवस्था में मिला था तेंदुआ
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा। बराही जंगल से सटे क्षेत्र हल्दी डेंगा व डगा क्षेत्र में एक सप्ताह पूर्व मृत मिले तेंदुआ की मौत का राज अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन क्षेत्र में बाघ एवं तेंदुआ की चहलकदमी फिर दिखने लगी है जिससे लोगों दहशत है।
बराही रेंज से सटे डगा गांव में एक सप्ताह पूर्व हरदोई ब्रांच नहर के निकट तेंदुआ का गला सड़ा शव मिला था। वनविभाग ने उसका बरेली में पोस्टमार्टम कराया था। इसकी रिपोर्ट अभी वन विभाग को नहीं मिली है। इधर करीब तीन दिनों से बराही के जंगल से निकलकर एक तेंदुआ एवं एक बाघ फिर इस इलाके में घूमता देखा जा रहा है। लोगों को पगचिह्न देखने को मिल रहे हैं। बाघ के पगचिह्न दिखने से जंगल की सीमा से सटे किसानों में दहशत है। वहीं दूसरी ओर अभी तक न तो टाइगर रिजर्व और न ही सामाजिक वानिकी की ओर से इस क्षेत्र में कोई चौकसी अथवा निगरानी की जा रही है और न ही इन्हें जंगल में खदेड़े के प्रयास हो रहे हैं। सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर साजिद हसन ने बताया कि जंगल से के आसपास अक्सर बाघ व तेंदुआ बाहर आ जाते हैं जो कुछ समय बाद स्वत: जंगल में लौट जाते हैं। डगा क्षेत्र में चौकसी के लिए एक वनरक्षक को कुछ वाचरों के साथ लगाया गया है।
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