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योगी जी! पुराना दिया नहीं, नये में काट लिया कर्जा
Updated Fri, 15 Dec 2017 06:14 PM IST
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चीनी मिल
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तराई के गन्ना किसानों पर पड़ रही दोहरी मार
पीलीभीत। भाजपा सरकार के नेताओं ने विधानसभा चुनाव में किसानों के हित की बात की थी। कहा था कि सरकार बनने पर किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान 15 दिन के भीतर होगा। किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ होगा, लेकिन कर्जा माफी के नाम पर कइयों की अठन्नी-चवन्नी तो किसी का दो रुपये माफ हुआ। ताजा मामला गन्ना मूल्य भुगतान का है। किसानों का गन्ना जिले की चार मिलों के अलावा शाहजहांपुर, बरेली और खीरी की भी आधा दर्जन चीनी मिलों को जाता है। इनमें तीन सहकारी चीनी मिलें शामिल हैं। इसके अध्यक्ष खुद डीएम होते हैं। यह मिलें किसानों का पुराना करोड़ों रुपये का भुगतान दाबे बैठीं हैं। ऊपर से इस बार गन्ना आपूर्ति का जो भुगतान बना है वह कर्ज पर ली गई खाद आदि में काट लिया गया।
कहां से दे गन्ने की छिलाई, नहीं मिला पुराना भुगतान
पीलीभीत। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र ट्रांस शारदा के ग्राम शांतिनगर निवासी किसान परवेंद्र सिंह खीरी के संपूर्णानगर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछले साल आपूर्ति किए गए गन्ने का करीब सवा दो लाख रुपये चीनी मिल पर बकाया है। नया पेराई सत्र शुरू होने पर भी वह करीब एक लाख का गन्ना चीनी मिल को आपूर्ति कर चुके हैं। उम्मीद थी कि मिल चालू होने से पहले उनका पुराना भुगतान मिल जाएगा, लेकिन भुगतान नहीं मिला। करीब 37 हजार रुपये गन्ना समिति से खाद कर्ज पर ली थी। पुराना भुगतान तो मिल ने अब तक नहीं किया, इन्होंने जो चालू सत्र में करीब 50 हजार रुपये का गन्ना आपूर्ति किया उसमें से कर्ज की पूूरी धनराशि पहली एडवाइज में ही मिल ने काट लिया।
किसान देवेंद्र सिंह भी गन्ना भुगतान की समस्या को लेकर दुखी दिखे। बताया कि उनका चीनी मिल पर पिछले साल का करीब 1.50 लाख रुपये बकाया है। मिल ने अभी तक उसका भुगतान नहीं किया। उल्टे चालू सत्र में किए गए गन्ना आपूर्ति की पहली एडवाइज कर्ज पर ली गई खाद के 14 हजार रुपये काट लिए। कमोबेश यही स्थिति किसान सुमन देवी, राजेंद्र भगत और रूपराम की है। इस सभी किसानों का चीनी मिल पर पिछला गन्ना मूल्य भुगतान बाकी है, लेकिन चीनी मिल ने पुराना भुगतान किया नहीं और इस साल आपूर्ति किए गए गन्ने के भुगतान की भेजी एडवाइज में से खाद का कर्जा काट लिया। इससे वह गन्ना छिलाई की मजदूरी भी मजदूरों को नहीं दे पाए हैं। इन किसानों का कहना है कि ऐसा कर मिल ने उन पर दोहरी मार झेलने को मजबूर कर दिया है।
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फैक्ट फाइल
सहकारी चीनी मिलों पर बकाया
मिल पिछला (करोड़ में)
पूरनपुर 5.60
बीसलपुर 1.33 करोड़
संपूर्णानगर 15.00 करोड़
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पीलीभीत। भाजपा सरकार के नेताओं ने विधानसभा चुनाव में किसानों के हित की बात की थी। कहा था कि सरकार बनने पर किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान 15 दिन के भीतर होगा। किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ होगा, लेकिन कर्जा माफी के नाम पर कइयों की अठन्नी-चवन्नी तो किसी का दो रुपये माफ हुआ। ताजा मामला गन्ना मूल्य भुगतान का है। किसानों का गन्ना जिले की चार मिलों के अलावा शाहजहांपुर, बरेली और खीरी की भी आधा दर्जन चीनी मिलों को जाता है। इनमें तीन सहकारी चीनी मिलें शामिल हैं। इसके अध्यक्ष खुद डीएम होते हैं। यह मिलें किसानों का पुराना करोड़ों रुपये का भुगतान दाबे बैठीं हैं। ऊपर से इस बार गन्ना आपूर्ति का जो भुगतान बना है वह कर्ज पर ली गई खाद आदि में काट लिया गया।
कहां से दे गन्ने की छिलाई, नहीं मिला पुराना भुगतान
पीलीभीत। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र ट्रांस शारदा के ग्राम शांतिनगर निवासी किसान परवेंद्र सिंह खीरी के संपूर्णानगर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछले साल आपूर्ति किए गए गन्ने का करीब सवा दो लाख रुपये चीनी मिल पर बकाया है। नया पेराई सत्र शुरू होने पर भी वह करीब एक लाख का गन्ना चीनी मिल को आपूर्ति कर चुके हैं। उम्मीद थी कि मिल चालू होने से पहले उनका पुराना भुगतान मिल जाएगा, लेकिन भुगतान नहीं मिला। करीब 37 हजार रुपये गन्ना समिति से खाद कर्ज पर ली थी। पुराना भुगतान तो मिल ने अब तक नहीं किया, इन्होंने जो चालू सत्र में करीब 50 हजार रुपये का गन्ना आपूर्ति किया उसमें से कर्ज की पूूरी धनराशि पहली एडवाइज में ही मिल ने काट लिया।
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किसान देवेंद्र सिंह भी गन्ना भुगतान की समस्या को लेकर दुखी दिखे। बताया कि उनका चीनी मिल पर पिछले साल का करीब 1.50 लाख रुपये बकाया है। मिल ने अभी तक उसका भुगतान नहीं किया। उल्टे चालू सत्र में किए गए गन्ना आपूर्ति की पहली एडवाइज कर्ज पर ली गई खाद के 14 हजार रुपये काट लिए। कमोबेश यही स्थिति किसान सुमन देवी, राजेंद्र भगत और रूपराम की है। इस सभी किसानों का चीनी मिल पर पिछला गन्ना मूल्य भुगतान बाकी है, लेकिन चीनी मिल ने पुराना भुगतान किया नहीं और इस साल आपूर्ति किए गए गन्ने के भुगतान की भेजी एडवाइज में से खाद का कर्जा काट लिया। इससे वह गन्ना छिलाई की मजदूरी भी मजदूरों को नहीं दे पाए हैं। इन किसानों का कहना है कि ऐसा कर मिल ने उन पर दोहरी मार झेलने को मजबूर कर दिया है।
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सहकारी चीनी मिलों पर बकाया
मिल पिछला (करोड़ में)
पूरनपुर 5.60
बीसलपुर 1.33 करोड़
संपूर्णानगर 15.00 करोड़