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रामलीला मे राम सीता विवाह तक की लीला का हुआ मंचन।
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:12 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
रामलीला में बुधवार की रात्रि में राजा दशरथ और ऋषि विश्वामित्र संवाद, जंगल में राम और लक्ष्मण के राक्षसों के मारने और जनकपुरी के दरबार में राम के धनुष तोड़ने तक की लीला का मंचन किया ।
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर स्थित गांधी प्याऊ पर रामलीला चल रही है। बुधवार की रात्रि में रामलीला के मंचन का शुभारंभ एमएम डिग्री कॉलेज के पूर्व प्रबंधक दिनेश शर्मा ने भगवान गणेश की आरती कर किया। मंचन में ऋषि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ से अयोध्या में आकर राम लक्षमण को राक्षसों के अंत के लिए मांग कर साथ ले जाया गया। दशरथ पुत्र मोह में आनाकानी करते हैं। वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ राम लक्ष्मण को भेज देते हैं। वहां राम लक्ष्मण कई राक्षस का वध करते हैं। विश्वामित्र राम लक्ष्मण को राजा जनक के दरबार में सीता के स्वयंवर में ले जाकर जहां राजा जनक द्वारा रखी प्रतिज्ञा के अनुसार शिव धनुष को तोड़ देते हैं। इसके बाद राम सीता का विवाह होता है। भगवान परशुराम क्रोधित होकर जनकपुरी में आ जाते हैं। अपने गुरू के धनुष के अपमान करने की बात कहकर जनक को समाप्त करने की ठान लेते है। तब विश्वामित्र राम को प्रणाम कर शांत करने का अनुग्रह करते हैं। परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर चले जाते हैं। इस दौरान प्रधान नितिन जैन, डायरेक्टर उमेश शर्मा, राजेश शर्मा, बोबी शर्मा, पुनीत शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, मुंशी जैन, प्रवेश शर्मा, पीयूष शर्मा, अजय डब्बू शर्मा, नवाब सिंह धामा, प्रवीण यादव, अतुल , सुनील, नवीन शर्मा, सुनील दत्त शर्मा, नरेंद्र शर्मा, दीपक शर्मा, मुकेश शर्मा, राजेंद्र यादव आदि रहे।
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रामलीला में बुधवार की रात्रि में राजा दशरथ और ऋषि विश्वामित्र संवाद, जंगल में राम और लक्ष्मण के राक्षसों के मारने और जनकपुरी के दरबार में राम के धनुष तोड़ने तक की लीला का मंचन किया ।
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगर स्थित गांधी प्याऊ पर रामलीला चल रही है। बुधवार की रात्रि में रामलीला के मंचन का शुभारंभ एमएम डिग्री कॉलेज के पूर्व प्रबंधक दिनेश शर्मा ने भगवान गणेश की आरती कर किया। मंचन में ऋषि विश्वामित्र द्वारा राजा दशरथ से अयोध्या में आकर राम लक्षमण को राक्षसों के अंत के लिए मांग कर साथ ले जाया गया। दशरथ पुत्र मोह में आनाकानी करते हैं। वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ राम लक्ष्मण को भेज देते हैं। वहां राम लक्ष्मण कई राक्षस का वध करते हैं। विश्वामित्र राम लक्ष्मण को राजा जनक के दरबार में सीता के स्वयंवर में ले जाकर जहां राजा जनक द्वारा रखी प्रतिज्ञा के अनुसार शिव धनुष को तोड़ देते हैं। इसके बाद राम सीता का विवाह होता है। भगवान परशुराम क्रोधित होकर जनकपुरी में आ जाते हैं। अपने गुरू के धनुष के अपमान करने की बात कहकर जनक को समाप्त करने की ठान लेते है। तब विश्वामित्र राम को प्रणाम कर शांत करने का अनुग्रह करते हैं। परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर चले जाते हैं। इस दौरान प्रधान नितिन जैन, डायरेक्टर उमेश शर्मा, राजेश शर्मा, बोबी शर्मा, पुनीत शर्मा, पुष्पेंद्र कुमार, मुंशी जैन, प्रवेश शर्मा, पीयूष शर्मा, अजय डब्बू शर्मा, नवाब सिंह धामा, प्रवीण यादव, अतुल , सुनील, नवीन शर्मा, सुनील दत्त शर्मा, नरेंद्र शर्मा, दीपक शर्मा, मुकेश शर्मा, राजेंद्र यादव आदि रहे।
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