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यज्ञ ही संसार का आधार है : अंकित प्रभाकर
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मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कॉलोनी में तीन दिवसीय ऋषिबोधोत्सव पर्व पर असत्य को छोड़ने और सत्य को ग्रहण करने का संदेश दिया गया। परोपकारिणी सभा अजमेर से पधारे उपदेशक अंकित प्रभाकर ने कहा कि यज्ञ ही संसार का आधार है, यज्ञ ही विष्णु है, यज्ञ ही पालक है। सेवा, त्याग और दायित्वों का निर्वहन कर गृहस्थ जीवन को सफल बनायें।
आर्य समाज मंदिर में महाशिवरात्रि एवं ऋषिबोधोत्सव पर्व पर त्रिदोष नाशक औषधियों से युक्त सामग्री से यज्ञ किया गया। यज्ञ ब्रह्म संगीता आर्या रहीं। यज्ञमान पूर्व मंत्री योगराज सिंह और विजयदीप सिंह रहे। वैदिक उपदेशक अंकित प्रभाकर ने कहा कि यज्ञ अपनाए, पुण्य और शुभ कर्मों की भावना जागृत होगी।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ में सुख, शांति और समृद्धि के लिए समन्वय, सहयोग, स्नेह और मर्यादा आवश्यक है। विवाह संस्कार में जिन वचनों का पति और पत्नी संकल्प लेते है, उन्हें सदैव निभाये। संस्कृति के मूल्यों और संस्कारों के मार्गदर्शन से परिवार और समाज का निर्माण होता है।
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पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार आंदोलन को गांव-गांव पहुँचाये, ताकि युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कृति का ज्ञान हो सके। पाखंड, अंधविश्वास, कुरीतियों के उन्मूलन से समाज में सत्य स्थापित होगा। राकेश ढींगरा एवं गजेंद्र राणा, अवनीश त्यागी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उषा पटपटिया, नीलम ढींगरा, उमा भाटिया, नंदनी आर्या, चंद्रवती चौधरी, अशोक राठी, भूप सिंह आर्य, जय सिंह धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन संयोजक इंद्रपाल सिंह आर्य ने किया।
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आर्य समाज मंदिर में महाशिवरात्रि एवं ऋषिबोधोत्सव पर्व पर त्रिदोष नाशक औषधियों से युक्त सामग्री से यज्ञ किया गया। यज्ञ ब्रह्म संगीता आर्या रहीं। यज्ञमान पूर्व मंत्री योगराज सिंह और विजयदीप सिंह रहे। वैदिक उपदेशक अंकित प्रभाकर ने कहा कि यज्ञ अपनाए, पुण्य और शुभ कर्मों की भावना जागृत होगी।
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उन्होंने कहा कि गृहस्थ में सुख, शांति और समृद्धि के लिए समन्वय, सहयोग, स्नेह और मर्यादा आवश्यक है। विवाह संस्कार में जिन वचनों का पति और पत्नी संकल्प लेते है, उन्हें सदैव निभाये। संस्कृति के मूल्यों और संस्कारों के मार्गदर्शन से परिवार और समाज का निर्माण होता है।
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पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार आंदोलन को गांव-गांव पहुँचाये, ताकि युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कृति का ज्ञान हो सके। पाखंड, अंधविश्वास, कुरीतियों के उन्मूलन से समाज में सत्य स्थापित होगा। राकेश ढींगरा एवं गजेंद्र राणा, अवनीश त्यागी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उषा पटपटिया, नीलम ढींगरा, उमा भाटिया, नंदनी आर्या, चंद्रवती चौधरी, अशोक राठी, भूप सिंह आर्य, जय सिंह धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन संयोजक इंद्रपाल सिंह आर्य ने किया।