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दिव्या को आज मिलेगा अर्जुन अवार्ड
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अर्जुन अवार्ड समारोह के लिए मिले ब्लेजर को खुशी में चूमती पहलवान दिव्या काकरान।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत की शान बनीं जिले की दिव्या काकरान को खेल दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज अर्जुन अवार्ड से अलंकृत करेंगे। जिंदगी में यह सम्मान हासिल करना देश के हर खिलाड़ी का सपना होता है। दिव्या कहती हैं कि मेहनत करते जाओ, एक दिन फल अवश्य मिलेगा।
बेटी दिव्या को अर्जुन पुरस्कार मिलने की खुशी में मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान से पिता सूरज सेन और मां संयोगिता भी दिल्ली के गोकुलपुर घर जा चुके हैं। वे कोरोना की वजह से बीते कुछ माह से गांव में ही थे। हर वर्ष की तरह ये अवार्ड समारोह इस साल राष्ट्रपति भवन के अशोका हाल में आयोजित नहीं होगा। राष्ट्रपति ऑनलाइन समारोह में चयनित खिलाड़ियों को खेलों में सबसे बड़े राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजेंगे। अर्जुन अवार्ड के लिए पहनने को परंपरागत ब्लेजर और साड़ी पहलवान दिव्या को मिला तो वे खुशी से झूम उठीं। अखाड़ों और दंगल की मिट्टी में बहाए पसीने और जीतोड़ मेहनत से मिले गर्व को उन्होंने ड्रेस को बार-बार छूकर महसूस किया।
छोटी उम्र में बुलंदियों पर पहुंचीं दिव्या कहती हैं शायद आज रात को उत्साह में नींद भी न आए। अर्जुन पुरस्कार पाना मेरा सपना था। कुश्ती ही मेरा जीवन है, मेरी सांसे भी। मंत्रालय और रेलवे बोर्ड की आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया। बजरंग बली की कृपा रही तो कॉमनवेल्थ तथा एशियाड की तरह ओलंपिक में भी देश के लिए पदक जीतूंगी। उन सभी गुरुओं और प्रशिक्षकों की भी ऋणी रहूंगी। युवा खिलाड़ियों को संदेश है कि उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन को मेहनत, खुद पर भरोसा तथा इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। जिसमें ये तीनों बातें है, उसे कोई सफल होने से नहीं रोक सकता।
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बेटी दिव्या को अर्जुन पुरस्कार मिलने की खुशी में मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान से पिता सूरज सेन और मां संयोगिता भी दिल्ली के गोकुलपुर घर जा चुके हैं। वे कोरोना की वजह से बीते कुछ माह से गांव में ही थे। हर वर्ष की तरह ये अवार्ड समारोह इस साल राष्ट्रपति भवन के अशोका हाल में आयोजित नहीं होगा। राष्ट्रपति ऑनलाइन समारोह में चयनित खिलाड़ियों को खेलों में सबसे बड़े राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजेंगे। अर्जुन अवार्ड के लिए पहनने को परंपरागत ब्लेजर और साड़ी पहलवान दिव्या को मिला तो वे खुशी से झूम उठीं। अखाड़ों और दंगल की मिट्टी में बहाए पसीने और जीतोड़ मेहनत से मिले गर्व को उन्होंने ड्रेस को बार-बार छूकर महसूस किया।
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छोटी उम्र में बुलंदियों पर पहुंचीं दिव्या कहती हैं शायद आज रात को उत्साह में नींद भी न आए। अर्जुन पुरस्कार पाना मेरा सपना था। कुश्ती ही मेरा जीवन है, मेरी सांसे भी। मंत्रालय और रेलवे बोर्ड की आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया। बजरंग बली की कृपा रही तो कॉमनवेल्थ तथा एशियाड की तरह ओलंपिक में भी देश के लिए पदक जीतूंगी। उन सभी गुरुओं और प्रशिक्षकों की भी ऋणी रहूंगी। युवा खिलाड़ियों को संदेश है कि उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन को मेहनत, खुद पर भरोसा तथा इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। जिसमें ये तीनों बातें है, उसे कोई सफल होने से नहीं रोक सकता।
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