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स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगनाओं की अमिट गाथा, टोली बनाकर गांव-गांव फूंका था आजादी का बिगुल

Tue, 14 Aug 2018 12:41 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला/ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 14 Aug 2018 12:41 AM IST
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Women of Muzaffarnagar
राष्ट्रीय ध्वज
अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी वीरांगनाओं की अमिट गाथा है। मुल्क की आजादी के लिए टोलियां बनाकर वीर महिलाओं ने गांव-गांव में स्वाधीनता का जोश जगाया था। हर धर्म और वर्ग से जुड़ी महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर जंग-ए आजादी का बिगुल फूंका। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के आंदोलन तक मुजफ्फरनगर और शामली की वीरांगनाएं इतिहास के पन्नों में अपने त्याग, संघर्ष, देशभक्ति और बलिदान के लिए दर्ज हैं।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर का योगदान श्रंखला में उनकी वीरता के किस्से अमर हैं। आशादेवी गुर्जर के पति मेरठ सैनिक विद्रोह में अग्रणी रहे थे। कैराना और शामली में युवतियों की टोलियां बनाकर आशा देवी ने जनक्रांति फैलाई। बख्तावरी देवी, भगवती त्यागी ने फिरंगी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। भगवती देवी को ब्रिटिश सरकार ने तोप से उड़ा दिया था। थानाभवन की हबीबा खातून महिलाओं का जत्था लेकर गांव-गांव में घूमती थीं, उसे फांसी दी गई। शोभादेवी ने महिला टोली की सेना बना ली।
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पकड़े जाने पर उन्हें भी सूली पर लटका दिया गया। मामकौर पाल के जत्थे में 250 महिलाएं थी, जो पुरुष वेश में रहती थी। मुजफ्फरनगर शहर में हमले के बाद अंग्रेजों ने उसे पकड़कर फांसी पर लटका दिया था। भगवानी देवी, इंद्रकौर, जमीला पठान, रहीमो राजपूत, राजकौर, रणवीरी वाल्मीकि को भी क्रांति का बिगुल बजाने पर अंग्रेजों ने इन सभी को मौत की सजा सुनाई।  
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असलमगर्दी की शिकार हुई थी ज्ञानदेवी
मुजफ्फरनगर। स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी ज्ञान देवी धीमान पत्नी प्यारेलाल कैराना का संघर्ष और त्याग उल्लेखनीय है। वर्ष 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन में उन्हें पांच साल की कड़ी सजा मिली। सविनय अवज्ञा आंदोलन और सत्याग्रह आंदोलन में भी उन्होंने तीन-तीन माह की सजा काटी और दस रुपये जुर्माना भरा था। भारत छोड़ो आंदोलन में जिला कारागार में नजरबंद रहीं ज्ञानदेवी को ब्रिटिश दौर में अत्याचार झेलना पड़ा। दरोगा असलम खां ने बुटराड़ा बस स्टैंड पर उनकी इतनी पिटाई की कि ज्ञानवती का गर्भपात हो गया था।  

बढ़ता रहा महिलाओं का कारवां
मुजफ्फरनगर। आजादी की लड़ाई में जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महिलाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की, उनमें राजेश्वरी देवी नईमंडी, जानसठ की जानकी देवी, शहर की सावित्री देवी वर्मा, शिव देवी, ज्ञानवती पत्नी सूरज सिंह, गायत्री रस्तोगी, तारावती आर्यपुरी, चारुशिला, कृष्णाकुमारी आदि मुख्य रहीं। चारुशिला को आजादी के बाद कांग्रेस से शहर विधायक बनने का भी सौभाग्य मिला।


बुढ़ाना के बसी अंजना देवी, इंद्री देवी, शहर की गंगादेवी, दुर्गादेवी पत्नी श्यामलाल, दुर्गादेवी पत्नी लाल सिंह, बिरालसी की ब्रहमादेवी, विद्यावती, शैल कुमारी, कृष्णा कुमारी को भी आजादी आंदोलन में सजा मिली। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष रही सुश्री शांति शर्मा बताती हैं कि स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर और शामली की वीरांगनाओं ने देश प्रेम और राष्ट्र भक्ति को बलिदान की मिसाल लिखी है। 
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