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Muzaffarnagar News: महिलाओं ने ठाना, बेटियों को है सशक्त बनाना

Fri, 29 Aug 2025 02:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 02:03 AM IST
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Women have decided to empower their daughters
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रुड़की रोड स्थित कार्यालय पर आयोजित संवाद में महिलाओं ने सशक्त महिला, समृद्ध समाज विषय पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने के लिए माताओं को मोर्चा संभालना होगा। संस्कारों के साथ लड़कियों को बेटों के सामान हक दें, ताकि उनमें आत्मबल बढ़े। बेटियों को शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना होगा ताकि वह अपने खिलाफ होने वाले अत्याचार का विरोध करने में सक्षम हों।
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रोटरी क्लब की अध्यक्ष अंजलि गुप्ता ने कहा कि बेटियों को मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत होना चाहिए। बात चाहे छोटी और या बड़ी, उसको बिना डरे अपने परिजनों से साझा कर सके ताकि समय रहते समस्या का समाधान हो जाए। इसके साथ ही आर्थिक निर्भरता के लिए बेटों के समान ही पूरे अवसर देना हमारी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।
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बैंक से सेवानिवृत मधु भार्गव
ने कहा कि महिला सशक्त तभी होगी जब वह आत्मनिर्भर होगी। इसलिए महिलाओं को बेटियों की आत्मनिर्भरता पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे निश्चित रूप से समाज भी आगे बढ़ेगा।
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नीरा शर्मा ने कहा कि
बेटियां किसी भी विषय या कोर्स की पढ़ाई करें लेकिन उनको अपने अधिकारों और कानूनों की जानकारी होनी चाहिए। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और किसी अत्याचार को सहने के लिए मजबूर नहीं होंगी।
भारती साहनी ने कहा कि आज के समय में बेटी और बेटा कोई फर्क नहीं है। इस बात को बेटों को भी सिखाना चाहिए ताकि लड़कियों के प्रति एक स्वस्थ सोच वाला समाज तैयार हो सके।


कवियत्री निधि ने
कहा कि आज के दौर में महिलाओं के आगे बढ़ने को लेकर सोच बदली है। इसलिए वह हर मोर्चे पर सहयोग दे रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है।


मुध गोयल ने कहा कि परिवार में बेटा-बेटी के प्रति समानता की भावना को बढ़ाएं। इससे एक स्वस्थ समाज का विकास होगा। इसके साथ ही बेटियों को आजादी के साथ महिला जीवन के मूल्यों से भी सींचे।

शिप्रा गुप्ता ने कहा
कि बेटियों को आजादी और हिम्मत दी जाए तो वह जरूरत पड़ने अपनी ही नहीं, औरों की भी रक्षा कर सकती हैं। इसलिए हर मां को अपनी बेटी को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग जरूर दिलानी चाहिए।

श्वेता गोयल ने कहा कि हर मां अपनी बेटी को अच्छे संस्कार तो जरूर देती है लेकिन अब खुद के लिए आवाज उठाने की हिम्मत भी दें।
पूनम गुप्ता ने कहा कि बेटियों को यह मानसिक संबल जरूर दें कि उनके परिजन हर परिस्थिति में उनके साथ हैं ताकि वह अपने मन की बात को निसंकोच शेयर कर सकें।
राखी कुच्छल ने कहा
कि समाज के विकास के लिए संतुलन जरूरी है। बेटा और बेटी को समान आजादी, समान जीवन मूल्य और समान जिम्मेदारियों को दें ताकि किसी प्रकार का द्वंद पैदा न हो।
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