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परिसीमन बदला तो जाटों की जेब से निकली खतौली
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परिसीमन बदला तो जाटों की जेब से निकली खतौली
मुजफ्फरनगर। कभी मिनी छपरौली के नाम से पहचान रखने वाली खतौली सीट का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। परिसीमन के कारण समीकरण बदल गए। खतौली की जाट बेल्ट का हिस्सा बुढ़ाना विधानसभा सीट में मिल गया, जबकि जानसठ सुरक्षित सीट का बड़ा भाग खतौली में समाहित किया गया। जानसठ नगर पंचायत भी अब खतौली सीट का हिस्सा है। जिससे खतौली सीट पर सैनी और गुर्जर बिरादरी मतों की अधिकता है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों ने यहां सैनी और गुर्जर बिरादरी के प्रत्याशियों को प्राथमिकता देनी शुरू की है। 2012 में रालोद के करतार सिंह भड़ाना और 2017 में भाजपा के विक्रम सैनी यहां से विधायक बने थे।
खतौली सीट पर इस तरह बनते गए विधायक
साल विधायक पार्टी
1967 सरदार सिंह सीपीआई
1969 वीरेंद्र वर्मा बीकेडी
1974 लक्ष्मण सिंह बीकेडी
1977 लक्ष्मण सिंह जनता पार्टी
1980 धर्मवीर सिंह कांग्रेस
1985 हरेंद्र मलिक लोकदल
1989 धर्मवीर बालियान जनता दल
1991 सुधीर बालियान भाजपा
1993 सुधीर बालियान भाजपा
1996 राजपाल बालियान बीकेकेपी
2002 राजपाल बालियान रालोद
2007 योगराज सिंह बसपा
2012 करतार भड़ाना रालोद
2017 विक्रम सैनी भाजपा
जानसठ सुरक्षित सीट से जीत का परचम
1952 रामदास कांग्रेस
1957 रामदास कांग्रेस
1962 अहमद बख्श कांग्रेस
1967 शुगन चंद कांग्रेस
1969 मनफूल सिंह बीकेडी
1974 कबूल सिंह बीकेडी
1977 कबूल सिंह जनता पार्टी
1980 दीपक कुमार कांग्रेस
1985 दीपक कुमार कांग्रेस
1989 महावीर आजाद जनता दल
1991 सुरेश तितौरिया भाजपा
1993 सुरेश तितौरिया भाजपा
1996 बिजेंद्र आर्य बीकेकेपी
2002 यशवंत सिंह रालोद
2007 यशवंत सिंह बसपा
किसान-मजदूर और व्यापारी बड़ा मुद्दा
खतौली क्षेत्र में किसान और मजदूर बड़ा मुद्दा है। किसान आंदोलन के कारण भी खतौली की पहचान रही। चीनी मिल खतौली और मंसूरपुर में भाकियू ने कई बड़े आंदोलन किए। कानून व्यवस्था भी लोग बेहतर चाहते हैं।
किसी के हिस्से में नहीं विधानसभा की हैट्रिक
खतौली से लगाता दो चुनाव जीतने का रिकॉर्ड तो तीन विधायकों ने किया, लेकिन हैट्रिक किसी के हिस्से में नहीं है। 1974 और 1977 में लक्ष्मण सिंह ने जीत दर्ज की। भाजपा लहर में 1991 और 1993 में सुधीर बालियान जीते, जबकि भारतीय किसान कामगार पार्टी के टिकट पर 1996 और रालोद के टिकट पर 2002 में राजपाल बालियान विधायक बने थे।
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वीरेंद्र वर्मा ने भी खतौली में आजमाया था भाग्य
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे वीरेंद्र वर्मा भी खतौली से भाग्य आजमाने आए थे। 1969 में बीकेडी के टिकट पर वर्मा ने यहां से जीत दर्ज की और विधायक बने थे।
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मुजफ्फरनगर। कभी मिनी छपरौली के नाम से पहचान रखने वाली खतौली सीट का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। परिसीमन के कारण समीकरण बदल गए। खतौली की जाट बेल्ट का हिस्सा बुढ़ाना विधानसभा सीट में मिल गया, जबकि जानसठ सुरक्षित सीट का बड़ा भाग खतौली में समाहित किया गया। जानसठ नगर पंचायत भी अब खतौली सीट का हिस्सा है। जिससे खतौली सीट पर सैनी और गुर्जर बिरादरी मतों की अधिकता है। यही वजह है कि राजनीतिक दलों ने यहां सैनी और गुर्जर बिरादरी के प्रत्याशियों को प्राथमिकता देनी शुरू की है। 2012 में रालोद के करतार सिंह भड़ाना और 2017 में भाजपा के विक्रम सैनी यहां से विधायक बने थे।
खतौली सीट पर इस तरह बनते गए विधायक
साल विधायक पार्टी
1967 सरदार सिंह सीपीआई
1969 वीरेंद्र वर्मा बीकेडी
1974 लक्ष्मण सिंह बीकेडी
1977 लक्ष्मण सिंह जनता पार्टी
1980 धर्मवीर सिंह कांग्रेस
1985 हरेंद्र मलिक लोकदल
1989 धर्मवीर बालियान जनता दल
1991 सुधीर बालियान भाजपा
1993 सुधीर बालियान भाजपा
1996 राजपाल बालियान बीकेकेपी
2002 राजपाल बालियान रालोद
2007 योगराज सिंह बसपा
2012 करतार भड़ाना रालोद
2017 विक्रम सैनी भाजपा
जानसठ सुरक्षित सीट से जीत का परचम
1952 रामदास कांग्रेस
1957 रामदास कांग्रेस
1962 अहमद बख्श कांग्रेस
1967 शुगन चंद कांग्रेस
1969 मनफूल सिंह बीकेडी
1974 कबूल सिंह बीकेडी
1977 कबूल सिंह जनता पार्टी
1980 दीपक कुमार कांग्रेस
1985 दीपक कुमार कांग्रेस
1989 महावीर आजाद जनता दल
1991 सुरेश तितौरिया भाजपा
1993 सुरेश तितौरिया भाजपा
1996 बिजेंद्र आर्य बीकेकेपी
2002 यशवंत सिंह रालोद
2007 यशवंत सिंह बसपा
किसान-मजदूर और व्यापारी बड़ा मुद्दा
खतौली क्षेत्र में किसान और मजदूर बड़ा मुद्दा है। किसान आंदोलन के कारण भी खतौली की पहचान रही। चीनी मिल खतौली और मंसूरपुर में भाकियू ने कई बड़े आंदोलन किए। कानून व्यवस्था भी लोग बेहतर चाहते हैं।
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किसी के हिस्से में नहीं विधानसभा की हैट्रिक
खतौली से लगाता दो चुनाव जीतने का रिकॉर्ड तो तीन विधायकों ने किया, लेकिन हैट्रिक किसी के हिस्से में नहीं है। 1974 और 1977 में लक्ष्मण सिंह ने जीत दर्ज की। भाजपा लहर में 1991 और 1993 में सुधीर बालियान जीते, जबकि भारतीय किसान कामगार पार्टी के टिकट पर 1996 और रालोद के टिकट पर 2002 में राजपाल बालियान विधायक बने थे।
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वीरेंद्र वर्मा ने भी खतौली में आजमाया था भाग्य
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे वीरेंद्र वर्मा भी खतौली से भाग्य आजमाने आए थे। 1969 में बीकेडी के टिकट पर वर्मा ने यहां से जीत दर्ज की और विधायक बने थे।