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बाजार में गेहूं और आटे का व्यापार धड़ाम
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बाजार में गेहूं और आटे का व्यापार धड़ाम
मुजफ्फरनगर। गेहूं और आटे का व्यापार इस बार काफी कम हो गया है। मंडी में गेहूं का खरीदार नहीं हैं। चक्कियों से आटा खरीदने वाले लोगों को सरकार का फ्री का गेहूं मिल गया है। हालात यह है कि मंडी में गेहूं का थोक भाव 1550 से 1600 रुपये पर आ गया है और चक्की पर आटा 22 रुपये किलो बिक रहा है।
सीजन के शुरूआत में मंडी में सरकारी मूल्य के बराबर बिकने वाले गेहूं के दाम मार्केट में अचानक गिर गए हैं। सरकार किसानों से 1975 रुपये क्विंटल गेहूं खरीद रही है। शुरू में मंडी में भी लगभग यही रेट रहा। कोरोना के चलते सरकार ने जैसे ही गरीब लोगों को नि:शुल्क गेहूं देना शुरू किया, तो बाजार में गेहूं के दाम 1550 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं।
कूकड़ा नवीन मंडी के प्रमुख गेहूं व्यापारी जितेंद्र कुच्छल का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर अच्छा दाम मिलने के कारण अब मंडी में गेहूं नहीं आ रहा है। हालात यह है कि इस बार व्यापारियों के पास प्रति वर्ष के मुकाबले केवल दस प्रतिशत गेहूं ही आया है। इस समय अच्छे गेहूं का दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल है। आटे के लिए गेहूं खरीदने वाले चक्की मालिक इस बार गेहूं खरीदने मंडी नहीं आ रहे हैं। उन्हें गली मोहल्लों में ही 1500 रुपये क्विंटल गेहूं मिल रहा है। मंडी में गेहूं के लगभग 35 थोक व्यापारी हैं, इस बार सभी का व्यापार बहुत कम रह गया है।
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व्यापारी राजेंद्र कुमार का कहना है कि डिमांड नहीं होने से गेहूं के दाम लगातार घटते जा रहे हैं। 1550 रुपये क्विंटल में अच्छा गेहूं मिल रहा है। मध्य प्रदेश से आने वाले गेहूं का रेट अभी भी ज्यों का त्यों है। यह क्वालिटी के हिसाब से 2200 से तीन हजार तक बिक रहा है, लेकिन डिमांड इस बार इसकी भी कम है। व्यापार बहुत कम रह गया है। आटा चक्की चलाने वाले रामपुरी के अजय सैनी ने बताया कि इस बार चक्की पर आटा 22 रुपये किलो बिक रहा है। हालांकि दुकानों पर ब्रांडेड आटा पुराने दामों पर ही बिक रहा है। हमारे यहां 22 रुपये किलो में भी ग्राहक नहीं है। जो लोग आटा खरीदते थे उन्हें सरकार हर माह फ्री गेहूं दे रही है, अब तो वह अपना गेहूं पिसवा कर ले जा रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर। गेहूं और आटे का व्यापार इस बार काफी कम हो गया है। मंडी में गेहूं का खरीदार नहीं हैं। चक्कियों से आटा खरीदने वाले लोगों को सरकार का फ्री का गेहूं मिल गया है। हालात यह है कि मंडी में गेहूं का थोक भाव 1550 से 1600 रुपये पर आ गया है और चक्की पर आटा 22 रुपये किलो बिक रहा है।
सीजन के शुरूआत में मंडी में सरकारी मूल्य के बराबर बिकने वाले गेहूं के दाम मार्केट में अचानक गिर गए हैं। सरकार किसानों से 1975 रुपये क्विंटल गेहूं खरीद रही है। शुरू में मंडी में भी लगभग यही रेट रहा। कोरोना के चलते सरकार ने जैसे ही गरीब लोगों को नि:शुल्क गेहूं देना शुरू किया, तो बाजार में गेहूं के दाम 1550 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं।
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कूकड़ा नवीन मंडी के प्रमुख गेहूं व्यापारी जितेंद्र कुच्छल का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर अच्छा दाम मिलने के कारण अब मंडी में गेहूं नहीं आ रहा है। हालात यह है कि इस बार व्यापारियों के पास प्रति वर्ष के मुकाबले केवल दस प्रतिशत गेहूं ही आया है। इस समय अच्छे गेहूं का दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल है। आटे के लिए गेहूं खरीदने वाले चक्की मालिक इस बार गेहूं खरीदने मंडी नहीं आ रहे हैं। उन्हें गली मोहल्लों में ही 1500 रुपये क्विंटल गेहूं मिल रहा है। मंडी में गेहूं के लगभग 35 थोक व्यापारी हैं, इस बार सभी का व्यापार बहुत कम रह गया है।
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व्यापारी राजेंद्र कुमार का कहना है कि डिमांड नहीं होने से गेहूं के दाम लगातार घटते जा रहे हैं। 1550 रुपये क्विंटल में अच्छा गेहूं मिल रहा है। मध्य प्रदेश से आने वाले गेहूं का रेट अभी भी ज्यों का त्यों है। यह क्वालिटी के हिसाब से 2200 से तीन हजार तक बिक रहा है, लेकिन डिमांड इस बार इसकी भी कम है। व्यापार बहुत कम रह गया है। आटा चक्की चलाने वाले रामपुरी के अजय सैनी ने बताया कि इस बार चक्की पर आटा 22 रुपये किलो बिक रहा है। हालांकि दुकानों पर ब्रांडेड आटा पुराने दामों पर ही बिक रहा है। हमारे यहां 22 रुपये किलो में भी ग्राहक नहीं है। जो लोग आटा खरीदते थे उन्हें सरकार हर माह फ्री गेहूं दे रही है, अब तो वह अपना गेहूं पिसवा कर ले जा रहे हैं।