{"_id":"629bab1647568a55a815cd0e","slug":"water-and-forest-is-our-life-let-s-save-together-muzaffarnagar-news-mrt591562391","type":"story","status":"publish","title_hn":"जल और जंगल हमारी जिंदगी है आओ मिलकर बचाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जल और जंगल हमारी जिंदगी है आओ मिलकर बचाएं
विज्ञापन
अपने हरे-भरे आंगन में खड़ी पर्यावरण प्रेमी भोकरहेड़ी निवासी मंजू सहरावत।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। शुद्ध पर्यावरण के बिना जिंदगी की कल्पना बेमानी है। आधुनिकता की भागदौड़ में लोग पर्यावरण को कहीं ना कहीं नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्राकृतिक साधनों के अति दोहन, पेड़ों के कटान और सिमटते जंगलों के कारण मुश्किलें खड़ी हो रही है। प्रकृति दिन पर दिन दूषित होती जा रही है। वन और पर्यावरण का गहरा नाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में वन कम होते गए, जिससे लगातार मुश्किलें खड़ी हो रही है। प्रदूषण बढ़ने से बीमारियां बढ़ रही है।
हरे भरे पेड़ पौधों से महकता है घर-आंगन
चरथावल। कस्बे के मोहल्ला महाब्रहमणान निवासी अजय वर्मा पेशे में सराफा कारोबारी है। पर्यावरण के प्रति सजग और रहना उनका बचपन का शौक है। करीब तीन दशक से वह घर के बाहर क्यारियों में खुशबूदार फूल औषधिय गुणों से भरपूर गिलोय व तुलसी के पौध सजाकर रखते है। मकान की तीसरी मंजिल पर पर्याप्त ऑक्सीजन और पर्यावरण शुद्धि के लिए 60 गमलों में गुलाब, गेंदा आदि के फूलवारी महक रही है। कहते है बचपन से पेड़-पौधों से लगाव है। परिचितों और रिश्तेदारों को पेड़ लगाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना उनका शौक है। बाग में भी नीम, पीपल और आम के पेड़ों को बड़ी संख्या में लगा रखा है। जीवन संगिनी मंजू वर्मा भी क्यारियों की सफाई में पूरा ख्याल रखती है। वह शनिवार को गमलों और क्यारियोंकी सफाई करते है और पौधों की जड़ों को पोषकता प्रदान करते है।
घर के आंगन को हरा भरा कर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रही है मंजू
भोपा। भोकरहेड़ी निवासी समाजसेवी वरुण सहरावत की पत्नी मंजू सहरावत ने अपने आंगन में सैकड़ों हरे भरे पेड़ पौधे लगाए हुए हैं, जिनकी प्रतिदिन वह देखभाल भी करती हैं। इसी के कारण उनका आंगन ही नहीं आसपास में भी हरियाली की छटा नजर आती है। मंजू सहरावत बताती है कि वह प्रतिदिन सुबह सवेरे अपने परिवार को साथ लेकर पेड़-पौधों के रखरखाव के लिए कार्य करती है। वह जब किसी जन्मदिन शादी शादी के कार्यक्रम में जाती है तो वह पौधे ले जाकर भेंट करती हैं। अब तक वह सैकड़ों महिलाओं को पौधे बाट चुकी है। मंजू ने कहा कि हरियाली से हर घर- आंगन चहकेगा तो जीवन भी महकेगा।
विज्ञापन
भोपा। मखियाली गांव निवासी वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी केपी सिंह पर्यावरण प्रेमी है। उनके द्वारा जंगल ही नहीं घर में भी अनेकों पेड़ पौधे लगाए गए हैं जिससे आसपास के लोगों को भी पर्यावरण का संदेश दे रहे हैं। उनके आंगन में पारिजात जैसा पौधा भी उपलब्ध है। इससे अलग बागवानी में बादाम,काजू,छोटी हेड,सेब के पौधे भी है। वे अधिकांश पौधे खुद ही तैयार करते हैं एक से बढकऱ एक फुलवारी से भी उनका आंगन महका हुआ।
सबको मिलकर बचानी होगी प्रकृति : आशीष
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के शोधार्थी आशीष कुमार आर्य ने बताया कि इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय प्रकृति के साथ सद्भाव रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों को पर्यावरण की अहमियत, इंसानों व पर्यावरण के बीच के गहरे ताल्लुक का पता चले। प्रकृति एक ऐसी नींव है जो भूमि और पानी के नीचे जीवन का बनाती है. किसी भी तत्व में बदलाव और उसे हटाने से पूरी जीवन प्रणाली इससे प्रभावित हो सकती है। जिससे नकारात्मक परिणाम पैदा हो सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण मे पक्षियों की बेहद अहम भूमिका होती है। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से ही प्राकृतिक सफाई कर्मचारी कहे जाने वाले गिद्ध विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुके है।
विज्ञापन
हरे भरे पेड़ पौधों से महकता है घर-आंगन
चरथावल। कस्बे के मोहल्ला महाब्रहमणान निवासी अजय वर्मा पेशे में सराफा कारोबारी है। पर्यावरण के प्रति सजग और रहना उनका बचपन का शौक है। करीब तीन दशक से वह घर के बाहर क्यारियों में खुशबूदार फूल औषधिय गुणों से भरपूर गिलोय व तुलसी के पौध सजाकर रखते है। मकान की तीसरी मंजिल पर पर्याप्त ऑक्सीजन और पर्यावरण शुद्धि के लिए 60 गमलों में गुलाब, गेंदा आदि के फूलवारी महक रही है। कहते है बचपन से पेड़-पौधों से लगाव है। परिचितों और रिश्तेदारों को पेड़ लगाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना उनका शौक है। बाग में भी नीम, पीपल और आम के पेड़ों को बड़ी संख्या में लगा रखा है। जीवन संगिनी मंजू वर्मा भी क्यारियों की सफाई में पूरा ख्याल रखती है। वह शनिवार को गमलों और क्यारियोंकी सफाई करते है और पौधों की जड़ों को पोषकता प्रदान करते है।
विज्ञापन
घर के आंगन को हरा भरा कर पर्यावरण बचाने का संदेश दे रही है मंजू
भोपा। भोकरहेड़ी निवासी समाजसेवी वरुण सहरावत की पत्नी मंजू सहरावत ने अपने आंगन में सैकड़ों हरे भरे पेड़ पौधे लगाए हुए हैं, जिनकी प्रतिदिन वह देखभाल भी करती हैं। इसी के कारण उनका आंगन ही नहीं आसपास में भी हरियाली की छटा नजर आती है। मंजू सहरावत बताती है कि वह प्रतिदिन सुबह सवेरे अपने परिवार को साथ लेकर पेड़-पौधों के रखरखाव के लिए कार्य करती है। वह जब किसी जन्मदिन शादी शादी के कार्यक्रम में जाती है तो वह पौधे ले जाकर भेंट करती हैं। अब तक वह सैकड़ों महिलाओं को पौधे बाट चुकी है। मंजू ने कहा कि हरियाली से हर घर- आंगन चहकेगा तो जीवन भी महकेगा।
विज्ञापन
भोपा। मखियाली गांव निवासी वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी केपी सिंह पर्यावरण प्रेमी है। उनके द्वारा जंगल ही नहीं घर में भी अनेकों पेड़ पौधे लगाए गए हैं जिससे आसपास के लोगों को भी पर्यावरण का संदेश दे रहे हैं। उनके आंगन में पारिजात जैसा पौधा भी उपलब्ध है। इससे अलग बागवानी में बादाम,काजू,छोटी हेड,सेब के पौधे भी है। वे अधिकांश पौधे खुद ही तैयार करते हैं एक से बढकऱ एक फुलवारी से भी उनका आंगन महका हुआ।
सबको मिलकर बचानी होगी प्रकृति : आशीष
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के शोधार्थी आशीष कुमार आर्य ने बताया कि इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय प्रकृति के साथ सद्भाव रखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि लोगों को पर्यावरण की अहमियत, इंसानों व पर्यावरण के बीच के गहरे ताल्लुक का पता चले। प्रकृति एक ऐसी नींव है जो भूमि और पानी के नीचे जीवन का बनाती है. किसी भी तत्व में बदलाव और उसे हटाने से पूरी जीवन प्रणाली इससे प्रभावित हो सकती है। जिससे नकारात्मक परिणाम पैदा हो सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण मे पक्षियों की बेहद अहम भूमिका होती है। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से ही प्राकृतिक सफाई कर्मचारी कहे जाने वाले गिद्ध विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुके है।

घर के आंगन में खड़े पारिजात पौधे के पास खड़े के पी सिंह।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

चरथावल में पौधों की देखभाल करते अजय वर्मा- फोटो : MUZAFFARNAGAR