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प्रशासन की बेरुखी से मुफलिसी में जी रहा बुजुर्ग
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प्रशासन की बेरुखी से मुफलिसी में जी रहा बुजुर्ग
भौराकलां। प्रशासन की बेरुखी कहें या गरीब की बेबसी, गांव मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी दीनहीन बुजुर्ग धीरू आज तक सरकार की योजनाओं से वंचित हैं। उसके लिए गरीबी अभिशाप बन गई है। आज भी बुजुर्ग बारिश में जर्जर मकान की कच्ची छत से टपकते पानी में जिंदगी गुजार रहा है।
भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी अविवाहित बुजुर्ग धीरू आर्थिक रूप से कमजोर है। धीरू अपना नाई का परंपरागत काम कर गुजर-बसर कर रहा है। पूरे दिन मेहनत मजदूरी कर शाम को खुद चूल्हेे पर पेट भरने के लिए रोटी बनाना उनकी दिनचर्या है। बुजुर्ग धीरू के पास अपने मकान के रूप में सिर्फ एक कच्ची छत का कमरा है, जिसकी बारिश में टपकती कच्ची छत और जर्जर दीवारें कब गिरकर उसके लिए कब्रगाह का रूप ले लें, वह खुद भी नहीं जानता, लेकिन उसी में रात गुजारना उसके लिए मजबूरी बन चुका है। क्योंकि इसके अलावा उसके पास कोई अन्य ठोर भी नहीं है। सालों से दीन-हीन हालत में गुजर-बसर कर रहा बुजुर्ग धीरू को आज तक मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही किसी भी अन्य सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिला है, जिसकी वजह उसका अविवाहित होना बताकर अफसर पल्ला झाड़ लेते हैं। बीपीएल राशन कार्ड व उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर की सरकारी योजनाएं भी उस तक नहीं पहुंचीं है। पीड़ित धीरू ने बताया कि कई बार वह अफसरों से मकान व राशन कार्ड बनवाने के लिए गुहार लगा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। जनप्रतिनिधि भी उसकी सुध नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते आज भी बुजुर्ग धीरू मुफलिसी में जीने को मजबूर हैं।
गांव मोहम्मदपुर रायसिंह के प्रधान का कार्यभार संभाल रहे ग्राम समिति के सदस्य पुष्पेंद्र मलिक का कहना है कि समिति कार्यकाल में अब तक धीरू ने किसी भी सरकारी योजना के लिए आवेदन नहीं किया है। यदि आवेदन आता है तो उस पर विचार किया जाएगा।
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भौराकलां। प्रशासन की बेरुखी कहें या गरीब की बेबसी, गांव मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी दीनहीन बुजुर्ग धीरू आज तक सरकार की योजनाओं से वंचित हैं। उसके लिए गरीबी अभिशाप बन गई है। आज भी बुजुर्ग बारिश में जर्जर मकान की कच्ची छत से टपकते पानी में जिंदगी गुजार रहा है।
भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी अविवाहित बुजुर्ग धीरू आर्थिक रूप से कमजोर है। धीरू अपना नाई का परंपरागत काम कर गुजर-बसर कर रहा है। पूरे दिन मेहनत मजदूरी कर शाम को खुद चूल्हेे पर पेट भरने के लिए रोटी बनाना उनकी दिनचर्या है। बुजुर्ग धीरू के पास अपने मकान के रूप में सिर्फ एक कच्ची छत का कमरा है, जिसकी बारिश में टपकती कच्ची छत और जर्जर दीवारें कब गिरकर उसके लिए कब्रगाह का रूप ले लें, वह खुद भी नहीं जानता, लेकिन उसी में रात गुजारना उसके लिए मजबूरी बन चुका है। क्योंकि इसके अलावा उसके पास कोई अन्य ठोर भी नहीं है। सालों से दीन-हीन हालत में गुजर-बसर कर रहा बुजुर्ग धीरू को आज तक मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही किसी भी अन्य सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिला है, जिसकी वजह उसका अविवाहित होना बताकर अफसर पल्ला झाड़ लेते हैं। बीपीएल राशन कार्ड व उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर की सरकारी योजनाएं भी उस तक नहीं पहुंचीं है। पीड़ित धीरू ने बताया कि कई बार वह अफसरों से मकान व राशन कार्ड बनवाने के लिए गुहार लगा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। जनप्रतिनिधि भी उसकी सुध नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते आज भी बुजुर्ग धीरू मुफलिसी में जीने को मजबूर हैं।
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गांव मोहम्मदपुर रायसिंह के प्रधान का कार्यभार संभाल रहे ग्राम समिति के सदस्य पुष्पेंद्र मलिक का कहना है कि समिति कार्यकाल में अब तक धीरू ने किसी भी सरकारी योजना के लिए आवेदन नहीं किया है। यदि आवेदन आता है तो उस पर विचार किया जाएगा।
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