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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   UP: Student set herself on fire, gave statement before death, I want to live...; Court punished

UP: छात्रा ने लगाई आग, मौत से पहले दिया बयान, मैं जीना चाहती हूं...; कोर्ट ने यौन उत्पीड़न करने वाले को दी सजा

Mon, 01 Jun 2026 09:22 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 01 Jun 2026 09:22 PM IST
सार

Muzaffarnagar News: शामली में छात्रा ने छेड़छाड़ और उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने छात्रा के मृत्युपूर्व बयान को सत्य माना और दोषी आकाश कौशिक को उम्रकैद की सजा सुनाई। 

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UP: Student set herself on fire, gave statement before death, I want to live...; Court punished
कोर्ट। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

शामली के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र में कक्षा 12 की छात्रा के साथ छेड़छाड़ और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी आकाश कौशिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मृत्यु से पहले दिया गया पीड़िता का बयान सजा का आधार बना। अदालत ने बयान को सत्य से ओत-प्रोत माना। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट)-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसला सुनाया।
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पीड़िता ने 17 अगस्त 2017 की रात घर में केरोसिन छिड़कर खुद को आग लगा ली थी। पीड़िता की मां ने मोहल्ले के ही आकाश कौशिक और शुभम के खिलाफ ब्लैकमेल और छेड़छाड़ की प्राथमिकी दर्ज कराई। 19 अगस्त को मेरठ में उपचार के दौरान पीड़िता की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा 305 भी जांच में बढ़ाई। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
 
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प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट)-1 में हुई। मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान सुनवाई में महत्वपूर्ण साबित हुए। बयानों के आधार पर आकाश कौशिक पर दोष सिद्ध हुआ और अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास और 70 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। छेड़छाड़ में पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई। दूसरे आरोपी शुभम को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया।
 
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अदालत ने निष्कर्ष में यह लिखा
अभियुक्त आकाश कौशिक ने निरंतर पीड़िता का मानसिक और लैंगिक उत्पीड़न किया, उसे ब्लैकमेल किया और उसकी ऐसी बेइज्जती की जिसने उस अवयस्क बालिका को आत्मदाह जैसा चरम कदम उठाने के लिए विवश कर दिया। मृत्युकालिक कथन अपने आप में इतना स्पष्ट, स्वैच्छिक और सत्यता से ओत-प्रोत है कि वह दोष सिद्धि का एकमात्र और पर्याप्त आधार बनने की पूर्ण विधिक क्षमता रखता है।
 

आखिरी शब्द....फिर शुरू करना चाहती हूं जिंदगी
पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में कहा कि उसकी यानी आकाश की वजह से खुद को आग लगाई है। जन्मदिन के दिन भी उसने मेरा पीछा किया। उसकी मां से शिकायत की गई तो मुझे बेइज्जत किया गया। मजिस्ट्रेट ने कुल 20 सवाल पूछे। पीड़िता ने हर सवाल का जवाब दिया। साथ ही यह भी कहा कि वह फिर से जिंदगी शुरू करना चाहती है। यह भी कहा कि वह आकाश को जानती है और फेसबुक के माध्यम से जान पहचान हुई थी।

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