UP: गैस किल्लत का असर, बीआरसी केंद्र पर चूल्हे और तंदूर पर बनाया जा रहा प्रशिक्षण के लिए आए शिक्षकों का भोजन
बिजनौर के धामपुर स्थित बीआरसी केंद्र में गैस सिलिंडर की कमी के कारण शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन लकड़ी के चूल्हों पर पकाया जा रहा है। कारीगरों को गैस के बजाय तंदूर और लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ा।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर में धामपुर स्थित बीआरसी केंद्र पर गैस सिलिंडरों की कमी का असर देखने को मिला। शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन बनाने के लिए गैस उपलब्ध न होने पर कारीगरों को लकड़ी के चूल्हे बनाकर खाना पकाने की व्यवस्था करनी पड़ी।
प्रशिक्षण में शिक्षकों के लिए पहली बार भोजन की व्यवस्था
बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देश पर बीआरसी केंद्र पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल शिक्षकों के लिए पहली बार भोजन की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन की तरह ही शिक्षकों के लिए भोजन तैयार कराया जा रहा है। हालांकि गैस सिलिंडरों की कमी के कारण भोजन पकाने में कठिनाई सामने आई। ऐसे में कारीगरों को मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ा।
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लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में बढ़ी परेशानी
भोजन बनाने वाले कारीगर मनोज कुमार, वीर बहादुर सिंह और बासु राम ने बताया कि गैस सिलिंडरों का टोटा होने के कारण लकड़ी के चूल्हों पर खाना पकाना पड़ रहा है। लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाने में समय अधिक लगता है और काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि लकड़ी भी करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल रही है, जिससे खर्च भी बढ़ गया है। गैस सिलिंडर होने पर कम समय में आसानी से भोजन तैयार किया जा सकता है।
तंदूर लगाकर बनाई जा रही रोटियां
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए कचौड़ी के स्थान पर तंदूर लगाया गया है। लकड़ी के जरिए तंदूर में रोटियां बनाकर शिक्षकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि प्रशिक्षण के दौरान भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो।