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प्रसव के दौरान महिलाओं की मौते दुर्भाग्यपूर्ण: आनंदी

Thu, 05 Mar 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2020 12:30 AM IST
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Unfortunate deaths of women during childbirth: Anandi
मुजफ्फरनगर के बघरा के स्वामी कल्याण देव कृषि अनुसंधान केद्र में ट्राईसाईकिल वितरित करतीं राज्य? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बघरा, (मुजफ्फरनगर)। प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत होना चिंता का विषय है। महिलाओं को कुपोषण से दूर करने में पति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टीबी को जड़ से खत्म करना है, इसके लिए गांवों के जागरूक लोगों को सहयोग करना होगा। लगातार बढ़ती बीमारियों से बचने के लिए किसान जैविक खेती अपनाएं। जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए शहरों में किसानों को जगह मिलनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था बने कि किसान विश्व में कहीं भी अपना उत्पाद बेच सके।
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स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र बघरा में किसान संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसान देश और दुनिया का पेट भरने का काम करता है। कीटनाशक और रासायनिक उर्वरकों से जो उत्पाद पैदा हो रहे हैं, इनसे लगातार बीमारियां बढ़ रही है। आम आदमी को इन बीमारियों से बचाने के लिए जैविक खेती की जरूरत है। जैविक खेती कर हम प्रेरक गांव भी तैयार कर सकते हैं। जो किसान जैविक खेती कर रहे हैं उन्हें मार्केट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। शहर में जिस दिन साप्ताहिक अवकाश रहता उस दिन इन किसानों को अपने सामान की बिक्री के लिए जगह अलॉट की जानी चाहिए। जिला स्तर पर डीएम को यह काम करना है। गुजरात में यह मॉडल लाभकारी साबित हुआ है। ऐसी व्यवस्था बने कि किसान विश्व में कहीं भी अपने उत्पाद की बिक्री कर सके। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में टीबी के मरीज यूपी में सबसे ज्यादा हैं। एक-एक गांव में चार-पांच मरीज मिल रहे हैं। मरीजों की जांच कराने और उनका उपचार कराने में गांव के जागरूक लोगों को सहयोग करना होगा। टीबी को हमें जड़ से खत्म करना है। उन्होंने कहा कि अच्छी बिल्डिंग और कपड़े प्रगति का मानक नहीं होते। सभी लोग शिक्षित हो और निरोगी हों यही प्रगति का आधार है। गांवों में अभी भी महिलाएं बड़ी संख्या में कुपोषण का शिकार है। कुपोषण के कारण ही देश में बड़ी संख्या में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत होती है। उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष छह हजार महिलाओं की जान प्रसव के दौरान जा रही है। आंगनबाडी केंद्रों पर महिला के साथ उसके पति को भी आना चाहिए। जो पैसा सरकार देती है उस पैसे से महिला को दूध और फल खिलाने चाहिए। पति अपनी जिम्मेदारी समझे तो इन मौतों में कमी आएगी। बच्चे के रूप में नया मेहमान घर में आता है, तो यह खुशी तभी अच्छी लगती है जब जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों को दूसरे किसानों के खेतों में प्रशिक्षण के लिए न भेजे। छात्र किसान का बेटा है तो उसे अपने खेत में ही प्रशिक्षण का मौका दिया जाए। राज्यपाल ने महिलाओं से भी खेती और पशुपालन में आगे आने की अपील की।
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प्रदर्शनी को देखा
बघरा- राज्यपाल ने कृषि विज्ञान केंद्र में लगाई गई जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी को देखा और महिला समूहों से बात की। गंगा यात्रा और स्वच्छता पर लगी प्रदर्शनी भी देखी। उन्होंने यहां दिव्यांगों को ट्राईसाईकिल भी वितरित की। जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर, प्रदेश के कौशल विकास राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, राजस्व राज्य मंत्री विजय कश्यप ने राज्यपाल का स्वागत किया। संचालन सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति आरके मित्तल ने किया।
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किसान की बेटी हूं
बघरा। राज्यपाल आनंदीबेन ने कहा कि वह एक साधारण किसान की बेटी हूं। छोटी थी खेती और पशुपालन का काम करने के साथ पढाई भी करती थी। किसानों के बीच में आती हूूं तो लगता है अपनों के बीच में आ गई हूं। बचपन की अपने खेत में काम करने की बात स्वभावित रूप से याद आ जाती है।
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