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कसौली दूषित पानी से फैल रहा टायफाइड
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चरथावल क्षेत्र के गांव कसौली में प्रदूषित हिन्डन नदी का पानी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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चरथावल/मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के गांव कसौली में कई दिनों ने बुखार ने कहर बरपा रखा है। कुछ दिन पूर्व एक पुजारी की मौत के बाद एक अन्य व्यक्ति ने मंगलवार की रात बुखार के चलते दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग का कहना हैं कि ग्रामीण टायफाइड से पीड़ित हैं। इसका कारण वहां के हैंडपंपों का प्रदूषित पानी है। जल निगम समेत अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने के लिए कहा है।
चरथावल के गांव कसौली में काफी दिनों से बुखार फैल रहा है। गांव के 100 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं। 21 अक्तूबर को गांव के पुजारी सुखपाल की बुखार के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाकर लोगों का उपचार भी कराया लेकिन बुखार का कहर फिर भी कम नहीं हुआ। ग्रामीण सूबेदार ध्यान सिंह, योगेश, मामचंद आदि ने बताया कि 35 वर्षीय कर्मवीर पुत्र बुद्ध सिंह की भी बुखार के चलते मौत हो गई है। परिजनों ने चरथावल, मुजफ्फरनगर और मेरठ में उसका उपचार कराया था। वहां उसकी ब्लड प्लेटलेट्स में कमी बताई गई थी। बुधवार को उसका शव गांव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि राजबाला, कौशल, शैलेंद्र, सोनी, सोफिया, निकिता, शबनम, शआदत, शखावत, बबली, मीना, संध्या, राकेश, शौर्य, बीरा देवी, प्रमोद कश्यप समेत 50 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से गांव में कैंप लगवाकर रोगियों का उपचार कराने की मांग की है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गांव में टायफाइड का असर है। टायफाइड प्रदूषित पानी के कारण होता है। सीएमओ डा. पीएस मिश्रा ने बताया कि गांव में कैंप लगाकर मरीजों का उपचार कराया जा चुका है। जब तक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं होगा बीमारी का असर बना रहेगा। उन्होंने बताया कि गांव में लगे हैंडपंपों में खराब पानी आ रहा है। इस संबंध में जल निगम व अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिख दिया गया है।
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हिंडन में दूषित पानी का असर
चरथावल। गांव कसौली से कुछ दूरी पर हिंडन नदी बहती है। ग्रामीणों का कहना है कि हिंडन में बह रहे दूषित पानी का असर गांव में लगे हैंडपंपों के पानी में आ रहा है। पानी दिखने में तो साफ लगता है लेकिन इसका स्वाद अजीब सा हो गया है। पानी में स्मैल भी आती है। ग्राम प्रधान चंद्रबोस ने बताया कि करीब 10500 की जनसंख्या वाले गांव में 38 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। गांव में टंकी लगवाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रशासनिक अधिकारियों को दिया गया था लेकिन इस पर काम नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल में बढ़ रही बुखार पीड़ितों की संख्या
मुजफ्फरनगर। जिले में डेंगू और मलेरिया का असर भी खूब रहा है। बदलते मौसम के साथ बुखार पीड़ितों की संख्या भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में ज्यादातर बुखार पीड़ित होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 16 डेंगू रोगी सामने आ चुके हैं जबकि 100 से ज्यादा मलेरिया के रोगी मिले हैं।
मौसम में हो रहे बदलाव के साथ बीमारियां भी बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा बुखार फैल रहा है। वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के रोगी रोजाना सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 के आसपास नए रोगी आते हैं, इनमें से आधे से ज्यादा बुखार से पीड़ित होते हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी रहती है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है। बदलते मौसम में बुखार फैलना आम बात है। दिन में गरमाहट और रात में ठंडक भी बुखार का कारण बन सकती है। सीएमओ डा. पीएस मिश्रा ने बताया कि जिले में डेंगू का ज्यादा असर नहीं है। अब तक 16 डेंगू रोगी सामने आए हैं। ये सब उपचार के बाद ठीक हो गए। इनमें से कुछ तो ऐसे थे जो बाहर रहकर काम कर रहे थे और वहीं से बीमार होकर आए।
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चरथावल के गांव कसौली में काफी दिनों से बुखार फैल रहा है। गांव के 100 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं। 21 अक्तूबर को गांव के पुजारी सुखपाल की बुखार के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाकर लोगों का उपचार भी कराया लेकिन बुखार का कहर फिर भी कम नहीं हुआ। ग्रामीण सूबेदार ध्यान सिंह, योगेश, मामचंद आदि ने बताया कि 35 वर्षीय कर्मवीर पुत्र बुद्ध सिंह की भी बुखार के चलते मौत हो गई है। परिजनों ने चरथावल, मुजफ्फरनगर और मेरठ में उसका उपचार कराया था। वहां उसकी ब्लड प्लेटलेट्स में कमी बताई गई थी। बुधवार को उसका शव गांव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि राजबाला, कौशल, शैलेंद्र, सोनी, सोफिया, निकिता, शबनम, शआदत, शखावत, बबली, मीना, संध्या, राकेश, शौर्य, बीरा देवी, प्रमोद कश्यप समेत 50 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से गांव में कैंप लगवाकर रोगियों का उपचार कराने की मांग की है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गांव में टायफाइड का असर है। टायफाइड प्रदूषित पानी के कारण होता है। सीएमओ डा. पीएस मिश्रा ने बताया कि गांव में कैंप लगाकर मरीजों का उपचार कराया जा चुका है। जब तक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं होगा बीमारी का असर बना रहेगा। उन्होंने बताया कि गांव में लगे हैंडपंपों में खराब पानी आ रहा है। इस संबंध में जल निगम व अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिख दिया गया है।
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हिंडन में दूषित पानी का असर
चरथावल। गांव कसौली से कुछ दूरी पर हिंडन नदी बहती है। ग्रामीणों का कहना है कि हिंडन में बह रहे दूषित पानी का असर गांव में लगे हैंडपंपों के पानी में आ रहा है। पानी दिखने में तो साफ लगता है लेकिन इसका स्वाद अजीब सा हो गया है। पानी में स्मैल भी आती है। ग्राम प्रधान चंद्रबोस ने बताया कि करीब 10500 की जनसंख्या वाले गांव में 38 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। गांव में टंकी लगवाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रशासनिक अधिकारियों को दिया गया था लेकिन इस पर काम नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल में बढ़ रही बुखार पीड़ितों की संख्या
मुजफ्फरनगर। जिले में डेंगू और मलेरिया का असर भी खूब रहा है। बदलते मौसम के साथ बुखार पीड़ितों की संख्या भी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में ज्यादातर बुखार पीड़ित होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 16 डेंगू रोगी सामने आ चुके हैं जबकि 100 से ज्यादा मलेरिया के रोगी मिले हैं।
मौसम में हो रहे बदलाव के साथ बीमारियां भी बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा बुखार फैल रहा है। वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया के रोगी रोजाना सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 के आसपास नए रोगी आते हैं, इनमें से आधे से ज्यादा बुखार से पीड़ित होते हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. योगेंद्र त्रिखा बताते हैं कि वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी रहती है। उन्होंने बताया कि इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है। बदलते मौसम में बुखार फैलना आम बात है। दिन में गरमाहट और रात में ठंडक भी बुखार का कारण बन सकती है। सीएमओ डा. पीएस मिश्रा ने बताया कि जिले में डेंगू का ज्यादा असर नहीं है। अब तक 16 डेंगू रोगी सामने आए हैं। ये सब उपचार के बाद ठीक हो गए। इनमें से कुछ तो ऐसे थे जो बाहर रहकर काम कर रहे थे और वहीं से बीमार होकर आए।