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मुजफ्फरनगर: रामपुर तिराहा कांड में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी हेड कांस्टेबल का निधन, अलीगढ़ में ली अंतिम सांस
Tue, 25 Aug 2026 11:28 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:28 PM IST
सार
मुजफ्फरनगर में हुए 32 साल पुराने कांड में हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार को आरोपी बनाया गया था। बीमारी के कारण बृजेश कुमार का निधन हो गया। सैफई में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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बृजेश कुमार की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रामपुर तिराहा कांड में लूट, सामूहिक दुष्कर्म और छेड़छाड़ का आरोपी बनाए गए हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार की बीमारी के कारण अलीगढ़ में उपचार के दौरान मौत हो गई। वह मूल रूप से सैफई के रहने वाले थे। परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया। प्रकरण की अदालत में सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
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एक अक्तूबर 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।
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सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों व अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी पत्रावली में दिवंगत बृजेश कुमार को तत्कालीन एसओ मंसूरपुर राधा मोहन द्विवेदी के साथ आरोपी बनाया था। इस प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-9 में चल रही है। अधिवक्ता श्रवण कुमार ने बताया कि हेड कांस्टेबल को बीमारी के चलते अलीगढ़ में ही भर्ती कराया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका है।
केस की मूल पत्रावलियां ही गायब
सीबीआई ने आंदोलनकारी महिलाओं से दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूट समेत अन्य धाराओं के मुकदमे का आरोप पत्र न्यायालय स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई कोर्ट देहरादून में दाखिल किया था। इसी के साथ मूल प्रपत्र भी दाखिल किए गए थे। यह केस अदालतों में ट्रांसफर होता रहा, इस बीच मूल पत्रावली गायब हो गई। वर्तमान में मूल प्रपत्रों के सापेक्ष उनकी फोटोकॉपियां न्यायालय के रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं।
सीबीआई ने आंदोलनकारी महिलाओं से दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूट समेत अन्य धाराओं के मुकदमे का आरोप पत्र न्यायालय स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई कोर्ट देहरादून में दाखिल किया था। इसी के साथ मूल प्रपत्र भी दाखिल किए गए थे। यह केस अदालतों में ट्रांसफर होता रहा, इस बीच मूल पत्रावली गायब हो गई। वर्तमान में मूल प्रपत्रों के सापेक्ष उनकी फोटोकॉपियां न्यायालय के रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं।
इनके खिलाफ दाखिल किया था आरोपपत्र
सीबीआई ने राधा मोहन द्विवेदी, कृपाल सिंह, महेश चन्द्र शर्मा, नेत्रपाल सिंह, सुमेर सिंह, देवेन्द्र सिंह, सतीश चन्द्र शर्मा, तमकीम अहमद, मिलाप सिंह, सुरेन्द्र सिंह, ब्रजेश कुमार, कंवरपाल सिंह, प्रबल प्रकाश, राकेश कुमार मिश्रा, वीरेन्द्र कुमार, संजीव कुमार भारद्वाज, राकेश कुमार सिंह, कुशल पाल सिंह, राजपाल सिंह, विरेन्द्र प्रताप, विजयपाल सिंह, नरेश कुमार त्यागी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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