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एक बेड पर दो-दो मरीज, फर्श बना बिछौना, महिला अस्पताल की व्यवस्था चरमराई
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:40 AM IST
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महिला अस्पताल में बेड पर बैठे मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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जिला महिला अस्पताल की व्यवस्थाओं के आगे मरीज बेहाल हैं। एक बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार हो रहा है। हालात इस कद्र बेकाबू हैं कि प्रसूता नवजात बच्चों के साथ फर्श पर सोने के लिए मजबूर हैं। हालांकि महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग पर करोड़ों रुपये खर्च हो गए हैं, लेकिन उसको चालू कराने में विभाग ने सुस्त चाल अपनाई हुई है।
महिला चिकित्सालय में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना 30 से अधिक प्रसुताओं की डिलीवरी होती है, जबकि आधा दर्जन से अधिक केस आपरेशन के भी हैं। ऐसे में नोर्मल स्थिति के मरीज को अस्पताल में एक सप्ताह ठहरना पड़ता है, जबकि आपरेशन वाले मरीज को 10 से 15 दिनों के बीच रहना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों के सामने व्यवस्थाएं बौनी हो गई हैं। बिल्डिंग के भीतर एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किया रहा है, जबकि विवशता में कुछ प्रसूता नवजात शिशुओं को लेकर फर्श पर ही आराम कर रही हैं।
एक ही बेड पर दो मरीज होने से इंफेक्शन का खतरा भी अधिक है। वहीं, यह व्यवस्था नवजात शिशुओं के लिए भी घातक है। एक माह में अस्पताल में करीब 1000 से अधिक डिलीवरी होती हैं, जिनमें 300 आपरेशन और 700 के करीब नॉर्मल तरीके से डिलीवरी हैं। वहीं, परिसर में 100 बेड की क्षमता है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण 40 बेड अतिरिक्त रूप से रखे गए हैं।
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सीएमएस डॉ. अमिता गर्ग ने बताया कि अस्पताल में मजबूरी है। एक बेड पर दो मरीजों का उपचार करना स्टॉफ, डॉक्टरों की मजबूरी बन गया है। जगह कम है, लेकिन मरीजों का प्रेशर अधिक है। नई बिल्डिंग जल्द चालू हो तो कुछ बात बन सकती है।
अस्पताल में स्टॉफ की कमी
जिला अस्पताल सभी सीएचसी-पीएचसी का गढ़ है। यहां से केस काबू से बाहर होने पर अस्पताल पर पहुंचता है। इससे डॉक्टरों और स्टॉफ का अनुपात बिगड़ रहा है। नर्स से लेकर वार्ड आया तक कम हैं। जिसके चलते स्थिति पर कंट्रोल नहीं किया जा रहा है।
नई बिल्डिंग शुरू होने में लगेंगे दो महीने
करोड़ों रुपये खर्च कर जिला अस्पताल में ही महिला विंग के लिए नई बिल्डिंग तैयार की गई है। 100 बेड की यह बिल्डिंग शुरू होने से प्रसुताओं और मरीजों को राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग बिल्डिंग को शुरू कराने में सुस्त है। जून में बिल्डिंग चालू होनी थी, मगर अब विद्युत कनेक्शन मिला है। इसके बाद बिजली फिटिंग के साथ अन्य कार्य किया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल को शुरू होने में करीब दो माह का समय लगेगा।
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महिला चिकित्सालय में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोजाना 30 से अधिक प्रसुताओं की डिलीवरी होती है, जबकि आधा दर्जन से अधिक केस आपरेशन के भी हैं। ऐसे में नोर्मल स्थिति के मरीज को अस्पताल में एक सप्ताह ठहरना पड़ता है, जबकि आपरेशन वाले मरीज को 10 से 15 दिनों के बीच रहना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों के सामने व्यवस्थाएं बौनी हो गई हैं। बिल्डिंग के भीतर एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किया रहा है, जबकि विवशता में कुछ प्रसूता नवजात शिशुओं को लेकर फर्श पर ही आराम कर रही हैं।
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एक ही बेड पर दो मरीज होने से इंफेक्शन का खतरा भी अधिक है। वहीं, यह व्यवस्था नवजात शिशुओं के लिए भी घातक है। एक माह में अस्पताल में करीब 1000 से अधिक डिलीवरी होती हैं, जिनमें 300 आपरेशन और 700 के करीब नॉर्मल तरीके से डिलीवरी हैं। वहीं, परिसर में 100 बेड की क्षमता है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण 40 बेड अतिरिक्त रूप से रखे गए हैं।
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सीएमएस डॉ. अमिता गर्ग ने बताया कि अस्पताल में मजबूरी है। एक बेड पर दो मरीजों का उपचार करना स्टॉफ, डॉक्टरों की मजबूरी बन गया है। जगह कम है, लेकिन मरीजों का प्रेशर अधिक है। नई बिल्डिंग जल्द चालू हो तो कुछ बात बन सकती है।
अस्पताल में स्टॉफ की कमी
जिला अस्पताल सभी सीएचसी-पीएचसी का गढ़ है। यहां से केस काबू से बाहर होने पर अस्पताल पर पहुंचता है। इससे डॉक्टरों और स्टॉफ का अनुपात बिगड़ रहा है। नर्स से लेकर वार्ड आया तक कम हैं। जिसके चलते स्थिति पर कंट्रोल नहीं किया जा रहा है।
नई बिल्डिंग शुरू होने में लगेंगे दो महीने
करोड़ों रुपये खर्च कर जिला अस्पताल में ही महिला विंग के लिए नई बिल्डिंग तैयार की गई है। 100 बेड की यह बिल्डिंग शुरू होने से प्रसुताओं और मरीजों को राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग बिल्डिंग को शुरू कराने में सुस्त है। जून में बिल्डिंग चालू होनी थी, मगर अब विद्युत कनेक्शन मिला है। इसके बाद बिजली फिटिंग के साथ अन्य कार्य किया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल को शुरू होने में करीब दो माह का समय लगेगा।