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जाट धर्मशाला में दो दिवसीय चतुर्वेद शतयम वेदपाठ का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 17 Apr 2017 12:08 AM IST
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यज्ञ में आहुति देते आर्य समाज के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना के शुक्रताल स्थित जाट धर्मशाला में दो दिवसीय चतुर्वेद शतयम वेदपाठ का आयोजन किया गया। जिसमें विद्वानों द्वारा वेदपाठ किया गया। यज्ञ में आहुति देकर विश्व शांति के लिए प्रार्थना की गई। यज्ञ के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया।
रविवार को दो दिवसीय चतुर्वेद शतयम वेदपाठ के समापन पर वेदपाठी सुनीता शास्त्री, साक्षी शास्त्री ने वेद मंत्रों का जाप किया। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद चारों वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरंभ के पूर्व ज्ञानवान परमेश्वर ने क्रमश: चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा को दिया। उन्होंने यह ज्ञान ब्रह्मा को दिया।
फिर आगे आगे अन्य ऋषि मुनियों और मनुष्यों तक पहुंचा जो आज तक चला आ रहा है। वह सब सत्य ज्ञान जिसकी मनुष्यों को जरूरत हो सकती है, मूल रूप से वेदों में विद्यमान है। चारों वेद उसी शुद्ध रूप में अब तक सुरक्षित हैं।
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कार्यक्रम के आयोजक जगपाल वैद्य ने कहा कि यज्ञ करने से वातावरण और मनुष्य की आत्मा शुद्ध होती है। वेद केवल ज्ञान के ग्रंथ हैं। चारों वेदों में कुल बीस हजार दो सौ तेरह मंत्र हैं। वेदों में सब बातें सत्य व तर्कसंगत हैं। इस मौके पर प्रधान रोशनलाल बत्रा यज्ञ ब्रह्मा रहे। सहभागी के रूप में श्याम मल्होत्रा, राजीव मल्होत्रा, यजमान रूपल मल्होत्रा, रश्मि मल्होत्रा रहे।
उपदेशक सत्यप्रिय, सन्नी, मगन, सोनू नारंग, लवण, शियाल, सरदार बन्नी सिंह खुराना, राकेश मेहरा, महात्मा गोपाल दास, महात्मा राजेंद्र, मीनू, ऋचा, मगन, सोनल मल्होत्रा, अतुल बत्रा, विमला रानी मल्होत्रा आदि उपस्थित रहे।
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रविवार को दो दिवसीय चतुर्वेद शतयम वेदपाठ के समापन पर वेदपाठी सुनीता शास्त्री, साक्षी शास्त्री ने वेद मंत्रों का जाप किया। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद चारों वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरंभ के पूर्व ज्ञानवान परमेश्वर ने क्रमश: चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा को दिया। उन्होंने यह ज्ञान ब्रह्मा को दिया।
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फिर आगे आगे अन्य ऋषि मुनियों और मनुष्यों तक पहुंचा जो आज तक चला आ रहा है। वह सब सत्य ज्ञान जिसकी मनुष्यों को जरूरत हो सकती है, मूल रूप से वेदों में विद्यमान है। चारों वेद उसी शुद्ध रूप में अब तक सुरक्षित हैं।
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कार्यक्रम के आयोजक जगपाल वैद्य ने कहा कि यज्ञ करने से वातावरण और मनुष्य की आत्मा शुद्ध होती है। वेद केवल ज्ञान के ग्रंथ हैं। चारों वेदों में कुल बीस हजार दो सौ तेरह मंत्र हैं। वेदों में सब बातें सत्य व तर्कसंगत हैं। इस मौके पर प्रधान रोशनलाल बत्रा यज्ञ ब्रह्मा रहे। सहभागी के रूप में श्याम मल्होत्रा, राजीव मल्होत्रा, यजमान रूपल मल्होत्रा, रश्मि मल्होत्रा रहे।
उपदेशक सत्यप्रिय, सन्नी, मगन, सोनू नारंग, लवण, शियाल, सरदार बन्नी सिंह खुराना, राकेश मेहरा, महात्मा गोपाल दास, महात्मा राजेंद्र, मीनू, ऋचा, मगन, सोनल मल्होत्रा, अतुल बत्रा, विमला रानी मल्होत्रा आदि उपस्थित रहे।