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बेटियां की उच्च शिक्षा में परिवहन समस्या बनी बाधा

Thu, 08 Sep 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Sep 2022 11:48 PM IST
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Transport problem became a hindrance in the higher education of daughters
मजलिसपुर तौफीर सहित चार गांवों की छात्राएं 12 वीं के बाद शिक्षा से वंचित
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आसपास क्षेत्र में नहीं हैं कोई डिग्री कॉलेज, बसों का संचालन नहीं होने से आ रही समस्या
06 किलोमीटर दूर उत्तराखंड और 25 किलोमीटर दूर मोरना डिग्री कॉलेज ही विकल्प
प्रेम सागर
भोपा (मुजफ्फरनगर)। मजलिसपुर तौफीर, खैर नगर, महाराज नगर और सिताबपुरी गांव की 12वीं पास छात्राओं नीलम, ज्योति, लक्ष्मी, रुबी, बबीता, राधा, सुंदरी आदि सपना उच्च शिक्षा हासिल कर सफलता के आसमां में उड़ान भरना है। मगर, परिवहन की समस्या उनके इस ख्वाब को पूरा करने में बाधा बन गई है। आसपास कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। छह किलोमीटर दूर उत्तराखंड का गांव दल्लावाला और 25 किलोमीटर दूर मोरना डिग्री कॉलेज ही विकल्प है, लेकिन बसों का संचालन नहीं होने से ये छात्राएं घर में रहने को मजबूर है। मांग है कि प्रशासन को उनका भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। (संवाद)
सबसे निकट उत्तराखंड, लेकिन सिर्फ दस छात्राओं को ही मिलता है दाखिला
भोपा थाना क्षेत्र के गंगा खादर की गांव पंचायत मजलिसपुर तौफीर में उससे अलग तीन गांव मजरे खैर नगर, महाराज नगर और सिताबपुरी के रुप में लगते हैं। इनकी आबादी लगभग सात हजार हैं। इन गांवों में कोई डिग्री कॉलेज नहीं हैं। उत्तराखंड के गांव दल्लावाला में डिग्री कॉलेज है, लेेकिन वहां उत्तर प्रदेश की मात्र दस छात्राओं को ही दाखिला मिलता है। उससे पहले कागजात पूरे करने के लिए मशक्कत करनी होती हैं।
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25 किलोमीटर का सफर डग्गामार वाहनों से
इन गांवों के अधिकांश छात्र-छात्राएं मोरना पढ़ने आते हैैं। 25 किलोमीटर का यह सफर डग्गामार वाहनों से तय करना होता हैं। इसके बदले प्रतिदिन छात्राओं को 70 से 80 रुपये किराया अदा करना होता हैं। यह सामर्थ्य न होने के कारण मजबूरी में अनेकों छात्राओं को शिक्षा छोड़नी पड़ जाती हैैं।
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अभिभावक मांगेराम, कमल, जयपाल, रोहित, मदन सिंह, शोभाराम, पवन ने बताया कि यहां अनेकों छात्राएं 12वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा पाती। इसका मुख्य कारण इन चारों गांव के आसपास किसी डिग्री कॉलेज का नहीं होना हैं। बसों का संचालन बंद होने से समस्या ज्यादा है। समाजसेवी कुलदीप कुमार का कहना हैं कि प्रशासन को छात्राओं के भविष्य को देखते हुए बसों का संचालन शुरू कराना चाहिए।

वाहन उपलब्ध कराएं प्रशासन
बसों का संचालन न होना एक बड़ी समस्या हैं। इस कारण अनेकों छात्राएं कक्षा 12 पास कर अपने घर बैठ जाती हैं। प्रशासन को कम से कम स्कूल समय में सस्ते किराए पर वाहन उपलब्ध कराने चाहिए। - योगेश कुमार, प्रधान
यह प्राइवेट मार्ग है। यहां पर परमिट लेने के बाद ही बसों का संचालन हो सकता है। - राजकुमार तोमर, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, रोडवेज डिपो
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