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Muzaffarnagar News: 15 मार्च को लगेगा तीन दिवसीय घाट मेला, दंगल में दिखेगा दमखम
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(फोटो)
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक ऐतिहासिक घाट मेला 16 मार्च से लगेगा। तीन दिवसीय मेले में झूले और मिनी सर्कस लग गए हैं। बच्चाें को लुभाने के लिए रंगीन झूले लगाए जा रहे हैं। दंगल का आयोजन मुख्य आकर्षण रहेगा। मेले की तैयारियां चल रही हैं।
फाग खेलने के बाद परस्पर गिले शिकवे भुलाने के लिए सालों से घाट का मेला लगता है। कस्बे में लगने वाला मेला ब्लॉक का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। 15 मार्च से शुरू होकर तीन दिन तक मेला सजेगा। एक छोर में तीरग्रान मोहल्ले से दूसरे छोर पर मुर्दापट्टी करबला आदि तक विराट रूप में मेला लगता है। मेला प्रांगण में हिंदू और मुस्लिम जमकर लुत्फ उठाते हैं। लाखों की तादात में लोग आते हैं।
चरथावल कस्बे एवं देहात के अलावा मुस्लिम बहुल गांव कुटेसरा, चौकड़ा, कुल्हेड़ी, निरधना, खुसरोपुर, डेहरा, दधेडू कलां, दधेडू खुर्द, चौकड़ा, पावटी आदि गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है। मेले की खासियत है कि मुस्लिम परिवारों में मेहमानों का सत्कार करने में लोग बखूबी दायित्व निभाते हैं।
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मेला स्थल पर मार्ग संकरा होने के कारण आगंतुकों को दिक्कत उठानी पड़ती है। परंपरागत मेले में पहलवानों की दांव पेंच देखने वाले में खासा चाव रहता है। नगर पंचायत चेयरमैन इस्लामुद्दीन त्यागी ने बताया मेले में हर साल कई जिलों से पहलवान दंगल में बेहतरीन कुश्तियां दिखाकर दर्शकों को रोमांचिंत करते हैं। सभासद प्रतिनिधि आलम त्यागी, असलम त्यागी, डॉ़ नौशाद त्यागी का कहना है कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि मेले की परंपरा काफी पुरानी है। दूरदराज से लोग मेले में झूलों और सर्कस का आनंद लेने पहुंचते हैं। पुलिस ने मेला प्रांगण में एक कैंप बनाया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक ऐतिहासिक घाट मेला 16 मार्च से लगेगा। तीन दिवसीय मेले में झूले और मिनी सर्कस लग गए हैं। बच्चाें को लुभाने के लिए रंगीन झूले लगाए जा रहे हैं। दंगल का आयोजन मुख्य आकर्षण रहेगा। मेले की तैयारियां चल रही हैं।
फाग खेलने के बाद परस्पर गिले शिकवे भुलाने के लिए सालों से घाट का मेला लगता है। कस्बे में लगने वाला मेला ब्लॉक का सबसे बड़ा मेला माना जाता है। 15 मार्च से शुरू होकर तीन दिन तक मेला सजेगा। एक छोर में तीरग्रान मोहल्ले से दूसरे छोर पर मुर्दापट्टी करबला आदि तक विराट रूप में मेला लगता है। मेला प्रांगण में हिंदू और मुस्लिम जमकर लुत्फ उठाते हैं। लाखों की तादात में लोग आते हैं।
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चरथावल कस्बे एवं देहात के अलावा मुस्लिम बहुल गांव कुटेसरा, चौकड़ा, कुल्हेड़ी, निरधना, खुसरोपुर, डेहरा, दधेडू कलां, दधेडू खुर्द, चौकड़ा, पावटी आदि गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है। मेले की खासियत है कि मुस्लिम परिवारों में मेहमानों का सत्कार करने में लोग बखूबी दायित्व निभाते हैं।
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मेला स्थल पर मार्ग संकरा होने के कारण आगंतुकों को दिक्कत उठानी पड़ती है। परंपरागत मेले में पहलवानों की दांव पेंच देखने वाले में खासा चाव रहता है। नगर पंचायत चेयरमैन इस्लामुद्दीन त्यागी ने बताया मेले में हर साल कई जिलों से पहलवान दंगल में बेहतरीन कुश्तियां दिखाकर दर्शकों को रोमांचिंत करते हैं। सभासद प्रतिनिधि आलम त्यागी, असलम त्यागी, डॉ़ नौशाद त्यागी का कहना है कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि मेले की परंपरा काफी पुरानी है। दूरदराज से लोग मेले में झूलों और सर्कस का आनंद लेने पहुंचते हैं। पुलिस ने मेला प्रांगण में एक कैंप बनाया है।