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Muzaffarnagar News: शरद पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी
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मुजफ्फरनगर, मोरना। शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर दूर दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा की अविरल धारा में आस्था के गोते लगाकर पुण्य अर्जित किया। घाट पर पुरोहितों से कथा सुनी। नौनिहालों का मुंडन कराया और भंडारे के प्रसाद का वितरण भी किया। दोपहर बाद चंद्र ग्रहण होने पर संत महात्मा, श्रद्धालु भजन कीर्तन में लग रहे।
धर्मनगरी शुकतीर्थ गंगा घाट पर शनिवार सवेरे से ही श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। दिल्ली हरियाणा राजस्थान उत्तर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजा अर्चना की। वहीं पित्रों का तर्पण भी किया। पुरोहितों से कथा सुनी और भंडारे का प्रसाद वितरण किया। शुकदेव आश्रम स्थित सप्तऋषि, भगवान श्री कृष्ण मंदिर के दर्शन कर प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए मन्नत का धागा बांधा।
हनुमतधाम स्थित विशाल प्रतिमा के दर्शन कर गणेश भगवान को भी नमन किया। शिव धाम, पार्वती धाम, पीतांबरा धाम, शनि धाम आदि में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया। शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज, स्वामी महामंडलेश्वर केशवानंद महाराज, स्वामी महादेव आश्रम, स्वामी विष्णु तिलकधारी महाराज, कृपाल दास महाराज, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य स्वामी अयोध्या प्रसाद महाराज, स्वामी गीतानंद गिरी महाराज आदि संतों से आशीर्वाद लिया। अनेकों आश्रम में चल रही भागवत कथा को सुन धर्म लाभ कमाया। नगर में मेले जैसा माहौल बना रहा।
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धर्मनगरी शुकतीर्थ गंगा घाट पर शनिवार सवेरे से ही श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। दिल्ली हरियाणा राजस्थान उत्तर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजा अर्चना की। वहीं पित्रों का तर्पण भी किया। पुरोहितों से कथा सुनी और भंडारे का प्रसाद वितरण किया। शुकदेव आश्रम स्थित सप्तऋषि, भगवान श्री कृष्ण मंदिर के दर्शन कर प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए मन्नत का धागा बांधा।
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हनुमतधाम स्थित विशाल प्रतिमा के दर्शन कर गणेश भगवान को भी नमन किया। शिव धाम, पार्वती धाम, पीतांबरा धाम, शनि धाम आदि में दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया। शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज, स्वामी महामंडलेश्वर केशवानंद महाराज, स्वामी महादेव आश्रम, स्वामी विष्णु तिलकधारी महाराज, कृपाल दास महाराज, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य स्वामी अयोध्या प्रसाद महाराज, स्वामी गीतानंद गिरी महाराज आदि संतों से आशीर्वाद लिया। अनेकों आश्रम में चल रही भागवत कथा को सुन धर्म लाभ कमाया। नगर में मेले जैसा माहौल बना रहा।
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