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किसानों, महिलाओं के प्रति दिखाई दी चिंता

Thu, 05 Mar 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2020 12:18 AM IST
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There was concern about farmers and women
रणवीर सैनी
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल महिलाओं और किसानों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील दिखाई दी। प्रसव के दौरान होने वाली महिलाओं की मौतों से उनका मन आहत दिखा। किसानों के प्रति उनके जज्बात अलग ही रहे। उनकी वाणी में किसानों के प्रति हमदर्दी साफ झलकी। उनका पूरा फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर ही रहा।

प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का पूरा कार्यक्रम बेटियों की शिक्षा और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति समर्पित रहा। एक महिला होने के नाते उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर फोकस किया। हुसैनपुर बोपाडा के परिषदीय स्कूल में निरीक्षण के दौरान उन्होंने नन्हीं बालिकाओं से बात की और शिक्षा के प्रति उनको प्रोत्साहित किया। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राएं तो राज्यपाल के कार्यक्रम से गद्गद् दिखाई दी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कक्षा आठ की छात्राओं से सीधे बातकर उन्हें अपने पन का अहसास भी कराया। महिला अस्पताल में उन्होंने महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं को देखा। राज्यपाल ने अपने भाषण में भी यही कहा कि समाज रोगमुक्त होना चाहिए। उनकी वाणी में प्रसव पीड़ा के दौरान मौत के आगोश में जाने वाली महिलाओं की पीड़ा साफ झलकी। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज भी बच्चे को जन्म देने के दौरान हजारों महिलाओं की मौत हो रही है। महिलाओं को कुपोषण से मुक्त करने के लिए आंगनबाडी केंद्रों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जज्बातों को झकझोरते हुए कहा कि गर्भवती महिला को फल और दूध की जिम्मेदारी पति की है। सरकार इसमें आर्थिक सहयोग करती है। घर में नये मेहमान की खुशियां चाहते हो तो जन्म देने वाली मॉ का ख्याल भी रखना होगा। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उन्होंने कहा कि वह अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी जागरूक करने का काम करें। राज्यपाल ने किसानों के प्रति भी अपनी संवेदनशीलता प्रकट की। उन्होंने कहा कि वह एक किसान की बेटी है। घर पर खेती का काम करती थी, पशु पालन में सहयोग करती थी और इसी बीच पढाई के लिए भी समय निकालती थी। किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो इसे लेकर उनकी चिंता साफ नजर आई। उन्होंने जैविक खेती पर जोर देने के साथ ही किसानों को बाजार उपलब्ध कराने पर फोकस किया। उनके कार्यक्रम का केंद्र बिंदू महिला, किसान, शिक्षा और स्वास्थ्य ही रहा।
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