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Muzaffarnagar News: पीड़िता ने 29 साल बाद सामने आते ही पहचान लिए आरोपी

Wed, 26 Jul 2023 12:34 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 12:34 AM IST
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The victim recognized the accused as soon as he came to the fore after 29 years
रामपुर तिराहा ​स्थित शहीद स्मारक

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रामपुर तिराहा कांड

- आरोपी मिलाप सिंह की पत्रावली पर अदालत ने की सुनवाई
- उत्तराखंड पुलिस की सुरक्षा में अदालत में लाई गई महिला

अमर उजाला ब्यूरो

मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड पुलिस की सुरक्षा के बीच रामपुर तिराहा कांड की पीड़िता को अदालत में पेश किया गया। बुजुर्ग महिला ने दो आरोपियों को पहचान लिया और अदालत के सामने पुलिस की बर्बरता की कहानी बयान की। पीड़िता की आंखें डबडबा गई। अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपने परिवार की जान को खतरा बताया। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की। अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी।

शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, जोगेंद्र गोयल और उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली पर मंगलवार को सुनवाई हुई। उत्तराखंड पुलिस पौड़ी गढ़वाल से पीड़िता को कड़ी सुरक्षा में लेकर अदालत पहुंची। गवाह ने अदालत में आरोपियों को पहचान लिया है। पीड़िता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसके परिवार को खतरा बना हुआ है। पहले भी दो बार हमले हो चुके हैं। बार-बार धमकी दी जा रही है। अदालत ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के आदेश दिए हैं।
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पीड़िता पहुंची तो कक्ष में बढ़ा दी सुरक्षा

गवाही के दौरान न्यायालय कक्ष में पीड़िता, सीबीआई के अधिवक्ता धारा सिंह मीणा, शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा, एडीजीसी परवेंद्र सिंह और आरोपी के अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा को ही प्रवेश दिया गया। गवाही के दौरान न्यायालय कक्ष में किसी दूसरे व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया।
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जिले की सीमा के बाहर छोड़कर आई पुलिस

उत्तराखंड पुलिस पीड़िता को लेकर पहुंची थी। गवाही के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस भी पीड़िता को पुरकाजी में उत्तराखंड बॉर्डर तक छोड़कर आई।


ये था मामला

एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशन ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।
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