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अक्षय तृतीया पर आहार दान की परम्परा शुरू हुई
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खतौली में यज्ञ करते हुए।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, खतौली। जैन मंदिरो में पुण्यकारी अक्षय तृतीया पर्व भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रात: काल में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व पूजा अर्चना की।
अशोक शास्त्री ने बताया कि बैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव (आदिनाथ) ने राजा श्रेयांस के यहाँ इक्षुरस (गन्ना रस) का आहार लिया था। उस दिन वैशाख शुक्ल तृतीया थी। उस दिन राजा श्रेयांस के यहाँ भोजन अक्षीण (कभी न खत्म होने वाला) हो गया था । जैन धर्म के अनुसार इसी दिन से आहार दान की परंपरा शुरू हुई। राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को आहार दान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया था। नगर के जक्की वाला मंदिर में विराजमान परम पूज्य शिव भूषण महाराज की आहार व्यवस्था में श्रद्धालुओं ने सम्मलित होकर असीम पुण्य का सौभाग्य प्राप्त किया। मुनिश्री ने अपने भक्तों को बताया कि यह दिन बहुत ही शुभ होता है। इस दिन बिना मुहूर्त निकाले शुभ कार्य संपन्न होते हैं।
सभी मंदिरों में भक्तामर स्तोत्र का पाठ व 48 दीपकों से श्रद्धामयी आरती की गई। इस अवसर पर नीरज जैन, नीलम, सरिता, रीतिका, रेणु, बबीता, सारिका, प्रीति, स्नेह, छवि, राजरानी, सुषमा, अंजली, मंजू, डा ज्योति जैन, प्रीति, करुणा, कविता, अंजू, विभा, वर्षा, उमा, अविका, ममता, मीनू, डा आशा, अलका, रजनी प्रवक्ता, सर्वेश, मनीषा, सुधा, मुस्कान, अंजना, सरला, नैना, अर्चना, गीता, सीमा, रीतू, निधि, सीमा, पिंकी, शिल्पी, रूची, राखी, रेशी, काशी, दीपाली आदि उपस्थित रहे।
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अशोक शास्त्री ने बताया कि बैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव (आदिनाथ) ने राजा श्रेयांस के यहाँ इक्षुरस (गन्ना रस) का आहार लिया था। उस दिन वैशाख शुक्ल तृतीया थी। उस दिन राजा श्रेयांस के यहाँ भोजन अक्षीण (कभी न खत्म होने वाला) हो गया था । जैन धर्म के अनुसार इसी दिन से आहार दान की परंपरा शुरू हुई। राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को आहार दान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया था। नगर के जक्की वाला मंदिर में विराजमान परम पूज्य शिव भूषण महाराज की आहार व्यवस्था में श्रद्धालुओं ने सम्मलित होकर असीम पुण्य का सौभाग्य प्राप्त किया। मुनिश्री ने अपने भक्तों को बताया कि यह दिन बहुत ही शुभ होता है। इस दिन बिना मुहूर्त निकाले शुभ कार्य संपन्न होते हैं।
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सभी मंदिरों में भक्तामर स्तोत्र का पाठ व 48 दीपकों से श्रद्धामयी आरती की गई। इस अवसर पर नीरज जैन, नीलम, सरिता, रीतिका, रेणु, बबीता, सारिका, प्रीति, स्नेह, छवि, राजरानी, सुषमा, अंजली, मंजू, डा ज्योति जैन, प्रीति, करुणा, कविता, अंजू, विभा, वर्षा, उमा, अविका, ममता, मीनू, डा आशा, अलका, रजनी प्रवक्ता, सर्वेश, मनीषा, सुधा, मुस्कान, अंजना, सरला, नैना, अर्चना, गीता, सीमा, रीतू, निधि, सीमा, पिंकी, शिल्पी, रूची, राखी, रेशी, काशी, दीपाली आदि उपस्थित रहे।

खतौली में छबील लगाकर रूअफजा वितरित करते हुए।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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