फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   The sweetness of Lucknow and Allahabad is mingling in the gardens of Saharanpur

Muzaffarnagar News: सहारनपुर की बागवानी में घुल रही लखनऊ और इलाहाबाद की मिठास

Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Updated Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
The sweetness of Lucknow and Allahabad is mingling in the gardens of Saharanpur
बागवानी वाली खबर के फोटो-  नागल ब्लॉक में लगाए गए अमरूद का बाग।
सहारनपुर। सहारनपुर की बागवानी में लखनऊ और इलाहाबाद प्रजाति के अमरूद की मिठास घुल रही है। नई प्रजाति लगाने से बागवानों को खासा फायदा हो रहा है। सर्दी में फसल आने से दाम भी अधिक मिलते हैं। इसी का नतीजा है दस साल में 900 हेक्टेयर से अमरूद की बागवानी का रकबा 2,700 हेक्टेयर पहुंचा। तो सालभर में रकबा 3,500 हेक्टेयर पहुंच गया हैं।
विज्ञापन




जिले की जलवायु बागवानी के लिए अनुकूल है। इसके चलते यहां पर अमरूद के अलावा लीची, लोकाट, आड़ू के साथ ही अमरूद की बागवानी खूब हो रही है। खासकर जिले के बेहट, नागल, देवबंद ब्लाक में अमरूद की बागवानी हो रही है। अन्य फलों की तुलना में जनपद के बागवान अमरूद की बागवानी को काफी पसंद कर रहे हैं।
विज्ञापन

इसका कारण अमरूद का बढ़िया उत्पादन और नई प्रजाति का होना है। अच्छे भाव के चलते ज्यादातर बागवान सर्दियों की फसल को अधिक लगाते हैं। जल्दी फसल देने के साथ अमरूद की रोपाई, लीची और आम के नए बागों के बीच कर रहे हैं। कुछ बागवान अमरूद की सघन बागवानी भी कर रहे हैं। कम क्षेत्रफल में अधिक फसल देने वाली किस्मों की तरजीह दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


- इन प्रजातियों के प्रति रुझान
जिले में लखनऊ-49, फरूखाबादी, बर्फखान, इलाहाबाद सफेदा, ललित आदि का रूझान है। ज्यादातर बागवान फरूखाबादी, लखनऊ(एल-49), बर्फखान की बागवानी कर रहे हैं। जिले की जलवायु भी बागवानी के प्रति अनुकूल है। इसके साथ ही जिला उद्यान विभाग भी किसानों को नई प्रजातियों की जानकारी, पौधे और उपचार की पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
- यह बोले बागवान
करीब सौ बीघा में फरूखाबादी प्रजाति का अमरूद का बाग लगाया है। पांच वर्ष की आयु होने पर पेड़ फसल देने लगता है। इस प्रजाति का फायदा है कि इसका बीज छोटा होता है। दवाई भी कम डालनी पड़ती है। फसल अक्तूबर से आनी शुरू हो जाती है। जिसका अधिक दाम मिलता है। - बागवान श्यामवीर ग्राम गझेंडी
वर्तमान में अमरूद की नई किस्मों से अच्छा फायदा हो रहा है। आम के बाग के साथ अमरूद के पेड़ लगाए हैं। बागवान का रूख भी अमरूद की बागवानी की ओर हो रहा है। हम अपने बागों में रासायनिक खादों का कम से कम प्रयोग करते हैं। नई प्रजाति लखनऊ में कीड़ा भी कम लगता है। इसका फल भी बड़ा है। - विनोद कुमार, ब्लाॅक नागल

करीब 300 बीघा में अलग-अलग आम की किस्म लगाई है। इसमें इलाहाबादी, फरूखाबादी शामिल है। इस प्रजाति का फल मीठा और रसदार होता है। पेड़ लगाने के पांच वर्षों में पेड़ फल देने लगता है। इसके अलावा बर्फखाना भी बाग में लगाया है। लखनऊ प्रजाति का पेड़ बड़ा होता है। - बख्तावर, ब्लाॅक नागल

- वर्जन
जिले के बागवानों को अमरूद की बागवानी खासी पसंद आ रही है। इसके चलते अमरूद की बागवानी का रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में जिले में अमरूद की बागवानी का रकबा 3500 हेक्टेयर है। यह 900 हेक्टेयर से करीब चार गुना अधिक है। उद्यान विभाग भी हर संभव बागवानों की मदद कर रहे हैं। - गमपाल, जिला उद्यान अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed