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जनता की प्यास से बेपरवाह विधायक
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:16 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। जिले के छह विधायक पांच माह में जल निगम को अपने क्षेत्र में लगने वाले 100-100 हैंडपंप की सूची नहीं दे पाए हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए एक्सईएन से लेकर मुख्य अभियंता तक माननीयों को पत्र लिख चुके हैं।
मगर हमारे जनप्रतिनिधि हैं कि उन्हें गांव के गरीबों की प्यास की कोई चिंता नहीं है। एक विधायक ने मात्र सात हैंडपंप की सूची विभाग को दी है, जबकि सभी हैंडपंप का पैसा फरवरी में ही विभाग के पास आ चुका है।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही ग्रामों में शुद्ध पीने के पानी की समस्या खड़ी हो जाती है।
प्रदेश सरकार ने इसे देखते हुए जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 हैंडपंप लगवाने की घोषणा नवंबर माह में ही कर दी थी। जल निगम को गर्मी से पहले हैंडपंप लगाने के आदेश दिए गए। मार्च का महीना बीतने को है, जनपद में विधायकों ने अपनी सूची विभाग को नहीं दी है। केवल खतौली विधायक विक्रम सैनी मात्र सात हैंडपंप की सूची ही विभाग को दे पाये हैं। हैंडपंप लगना तो बाद की बात है प्रक्रिया तक शुरु नहीं हो पाई। जल निगम के एक्सईएन वाईके शर्मा ने बताया कि उनकी ओर से नवंबर माह में ही सूची उपलब्ध कराने के लिए सभी विधायकों को पत्र जारी किया गया था। फरवरी में हैंडपंप का पैसा मिल जाने के बाद दूसरा पत्र जारी किया गया।
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एक रिमाइंडर हाल ही में सभी विधायकों को जारी किया गया। यही नहीं सभी विधायकों से व्यक्तिगत मिलकर भी उन्होंने सूची देने का आग्रह किया है। इसी के साथ मुख्य अभियंता गाजियाबाद भी अपनी ओर से सभी विधायकों को सूची देने के लिए पत्र जारी कर चुके हैं।
हम भी कर रहे हैं पत्र जारी: व्यास ः प्रभारी सीडीओ जिला विकास अधिकारी मोती लाल व्यास ने बताया कि उनके पास मात्र 37 हैंडपंप के अनुमोदन के लिए सूची आई थी। इसमें एमएलसी विरेंद्र सिंह के चार हैंडपंप, मुश्ताक चौधरी के 24, आशु मलिक के दो शामिल थे। जिले के खतौली विधायक विक्रम सैनी के सात हैंडपंप थे। बाकी पांच विधायकों का एक भी हैंडपंप शामिल नहीं था।
इस सूची को वापिस भेजकर समस्त विधायकों को पूरी सूची भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। जिले छह एमएलसी का क्षेत्र भी लगता है, इसलिए उन्हें भी पत्र लिखा गया है, हालाकि एमएलसी के हैंडपंप कम संख्या में रहते हैं। सूची देर से आयेगी तो लोगों को गर्मी में समय से लाभ नहीं मिल पाएगा।
विधायकों की बातें जुदा-जुदा
हैंडपंप की सूची को लेकर खतौली विधायक विक्रम सैनी का कहना है कि वे तीन-चार माह पहले ही सूची जल निगम को दे चुके हैं। 100 मीटर से कम दूरी के कारण कुछ नाम निरस्त हो गए थे। विभाग को दोबारा से कुछ सूची तो भेज दी है बाकी के नाम जल्द भेजे जा रहे हैं। पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊटवाल का कहना है कि हमारे पास जल निगम का कोई पत्र नहीं आया, हमने तो रिबोर की सूची भेजी थी, नये हैंडपंप की कोई सूची नहीं भेजी। बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक का कहना है कि उनके पास तो एक सप्ताह पहले ही पत्र आया है, जल्दी ही सूची भेज देंगे। शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल का कहते हैं कि 15 दिन पहले पत्र मिला था। ग्रामीण क्षेत्र में ही हैंडपंप लगने है, कार्यकर्ताओं से नाम मांगे हैं। नाम आ जायेंगे सूची बनाकर भेज देंगे। ब्यूरो
प्रक्रिया में लगता है एक माह से अधिक
विधायकों से हैंडपंप लगाने के लिए गांव और स्थान की सूची मिलने क बाद जल निगम स्थलीय निरीक्षण कराता है, सत्यापन होता है, मानक के अनुरुप है कि नहीं यह देखा जाता है। इसके बाद सीडीओ के माध्यम से डीएम को अनुमोदन के लिए सूची भेजी जाती है। अनुमोदन होने के बाद ठेकेदारों को कांट्रेक्ट दिया जाता है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ माह लग जाता है। ब्यूरो
एक हैंडपंप का खर्च 58 हजार रुपये
प्रदेश सरकार ने एक हैंडपंप का खर्च 58 हजार रुपये मानकर पैसा जारी किया है। यह पैसा जल निगम को मिल चुका है। हैंडपंप में 60 प्रतिशत खर्च सामग्री और 40 प्रतिशत खर्च लेबर पर आता है।
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मगर हमारे जनप्रतिनिधि हैं कि उन्हें गांव के गरीबों की प्यास की कोई चिंता नहीं है। एक विधायक ने मात्र सात हैंडपंप की सूची विभाग को दी है, जबकि सभी हैंडपंप का पैसा फरवरी में ही विभाग के पास आ चुका है।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही ग्रामों में शुद्ध पीने के पानी की समस्या खड़ी हो जाती है।
प्रदेश सरकार ने इसे देखते हुए जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 हैंडपंप लगवाने की घोषणा नवंबर माह में ही कर दी थी। जल निगम को गर्मी से पहले हैंडपंप लगाने के आदेश दिए गए। मार्च का महीना बीतने को है, जनपद में विधायकों ने अपनी सूची विभाग को नहीं दी है। केवल खतौली विधायक विक्रम सैनी मात्र सात हैंडपंप की सूची ही विभाग को दे पाये हैं। हैंडपंप लगना तो बाद की बात है प्रक्रिया तक शुरु नहीं हो पाई। जल निगम के एक्सईएन वाईके शर्मा ने बताया कि उनकी ओर से नवंबर माह में ही सूची उपलब्ध कराने के लिए सभी विधायकों को पत्र जारी किया गया था। फरवरी में हैंडपंप का पैसा मिल जाने के बाद दूसरा पत्र जारी किया गया।
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एक रिमाइंडर हाल ही में सभी विधायकों को जारी किया गया। यही नहीं सभी विधायकों से व्यक्तिगत मिलकर भी उन्होंने सूची देने का आग्रह किया है। इसी के साथ मुख्य अभियंता गाजियाबाद भी अपनी ओर से सभी विधायकों को सूची देने के लिए पत्र जारी कर चुके हैं।
हम भी कर रहे हैं पत्र जारी: व्यास ः प्रभारी सीडीओ जिला विकास अधिकारी मोती लाल व्यास ने बताया कि उनके पास मात्र 37 हैंडपंप के अनुमोदन के लिए सूची आई थी। इसमें एमएलसी विरेंद्र सिंह के चार हैंडपंप, मुश्ताक चौधरी के 24, आशु मलिक के दो शामिल थे। जिले के खतौली विधायक विक्रम सैनी के सात हैंडपंप थे। बाकी पांच विधायकों का एक भी हैंडपंप शामिल नहीं था।
इस सूची को वापिस भेजकर समस्त विधायकों को पूरी सूची भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। जिले छह एमएलसी का क्षेत्र भी लगता है, इसलिए उन्हें भी पत्र लिखा गया है, हालाकि एमएलसी के हैंडपंप कम संख्या में रहते हैं। सूची देर से आयेगी तो लोगों को गर्मी में समय से लाभ नहीं मिल पाएगा।
विधायकों की बातें जुदा-जुदा
हैंडपंप की सूची को लेकर खतौली विधायक विक्रम सैनी का कहना है कि वे तीन-चार माह पहले ही सूची जल निगम को दे चुके हैं। 100 मीटर से कम दूरी के कारण कुछ नाम निरस्त हो गए थे। विभाग को दोबारा से कुछ सूची तो भेज दी है बाकी के नाम जल्द भेजे जा रहे हैं। पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊटवाल का कहना है कि हमारे पास जल निगम का कोई पत्र नहीं आया, हमने तो रिबोर की सूची भेजी थी, नये हैंडपंप की कोई सूची नहीं भेजी। बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक का कहना है कि उनके पास तो एक सप्ताह पहले ही पत्र आया है, जल्दी ही सूची भेज देंगे। शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल का कहते हैं कि 15 दिन पहले पत्र मिला था। ग्रामीण क्षेत्र में ही हैंडपंप लगने है, कार्यकर्ताओं से नाम मांगे हैं। नाम आ जायेंगे सूची बनाकर भेज देंगे। ब्यूरो
प्रक्रिया में लगता है एक माह से अधिक
विधायकों से हैंडपंप लगाने के लिए गांव और स्थान की सूची मिलने क बाद जल निगम स्थलीय निरीक्षण कराता है, सत्यापन होता है, मानक के अनुरुप है कि नहीं यह देखा जाता है। इसके बाद सीडीओ के माध्यम से डीएम को अनुमोदन के लिए सूची भेजी जाती है। अनुमोदन होने के बाद ठेकेदारों को कांट्रेक्ट दिया जाता है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ माह लग जाता है। ब्यूरो
एक हैंडपंप का खर्च 58 हजार रुपये
प्रदेश सरकार ने एक हैंडपंप का खर्च 58 हजार रुपये मानकर पैसा जारी किया है। यह पैसा जल निगम को मिल चुका है। हैंडपंप में 60 प्रतिशत खर्च सामग्री और 40 प्रतिशत खर्च लेबर पर आता है।