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हाईवे की शान रहा चीतल पार्क हुआ विलुप्त

Sun, 11 Jul 2021 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 11:57 PM IST
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The pride of the highway, the chital park became extinct
हाईवे की शान रहा चीतल पार्क हुआ विलुप्त
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। कभी दिल्ली-दून हाईवे की शान रहा चीतल पार्क वन विभाग की लापरवाही के चलते पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है। कई साल से पार्क का रखरखाव नहीं होने से पार्क का मिनी गॉर्डन पूरी तरह खत्म हो चुका है। वहीं, टी-प्वाइंट भी खंडहर में तब्दील हो चुका है। भोजन के अभाव में भूखे मर रहे पार्क के वन्यजीव भी शाकंभरी क्षेत्र में छोड़ दिए गए हैं। अब आलम यह है कि कोई भूले से भी पार्क की ओर रुख नहीं करता है।
कस्बे का एकमात्र पिकनिक प्वाइंट और कभी दिल्ली-दून हाईवे के मुसाफिरों की पहली पसंद रहा चीतल पार्क पूरी तरह से उजड़ चुका है। गंगनहर किनारे स्थित इस पार्क में पहले चीतल व खरगोश समेत काफी वन्यजीव होने के साथ ही मिनी गार्डन, टी-प्वाइंट और ओपन जिम भी आकर्षण का केंद्र था। इस पार्क में कस्बे के लोग सुबह-शाम घूमने आने के साथ ही मुसाफिर भी यहां कुछ देर के लिए रुककर सफर की थकान मिटाने के बाद आगे का सफर तय करते थे।
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वर्ष 2010 में हाईवे बाईपास शुरू होने के साथ ही इस पार्क के दिन बहुरने शुरू हुए। देखते ही देखते पार्क की रौनक बेनूर होने लगी। इसके बाद वन विभाग द्वारा न किए गए रखरखाव के अभाव में पार्क धीरे-धीरे अपनी पहचान खोने लगा। टी-प्वाइंट बंद हो गया, जिसके बाद यहां मुसाफिर आने भी बंद हो गए। इसके चलते पार्क में रखे गए वन्यजीव भी भोजन के अभाव में भूखे मरने लगे, जिसके चलते प्रशासन के आदेश पर उन्हें शाकंभरी क्षेत्र में छोड़ दिया गया। इसके बाद पार्क में बने ओपन जिम के उपकरण भी लापरवाही की भेंट चढ़ गए। अब आलम यह है कि कभी हाईवे के साथ ही खतौली की भी शान रहा चीतल पार्क अब पूरी तरह से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है। यहां बना मिनी गार्डन पूरी तरह से खत्म हो चुका है, जबकि टी-प्वाइंट की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील हो चुकी है। पार्क के गेट भी टूटकर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पार्क में जाने पर चारों तरफ गंदगी का आलम है, जिससे यहां अब लोग घूमने के लिए भी नहीं पहुंचते।
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इन्होंने कहा ........
पंचशील संगठन के सदस्य हितेश प्रकाश शर्मा ने बताया कि चीतल पार्क की दुर्दशा के बारे में कई बार मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखे गए, लेकिन इसके रखरखाव के बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते पार्क पूरी तरह से विलुप्त होने के कगार पर है।

क्षेत्रीय वन दरोगा नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि हाईवे बाईपास बनने के साथ ही पार्क में मुसाफिरों के साथ ही आम लोग भी आने बंद हो गए थे। आलम यह हुआ कि पार्क में रखे गए वन्य जीव भूखे मरने लगे, जिन्हें शाकंभरी क्षेत्र में छोड़ दिया गया था। फिलहाल यहां के रखरखाव के लिए विभाग के पास कोई योजना नहीं है।
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