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परंपरागत कोल्हुओं का विकल्प नहीं बन सके आधुनिक कोल्हू
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- चार साल के प्रयास में भोपा में ही मात्र एक कोल्हू लग सका
साढे़ छह लाख की सब्सिडी भी कोल्हू संचालकों में नहीं लुभा पा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। एक जनपद-एक उत्पाद में जिले में प्रदूषण मुक्त आधुनिक कोल्हू लगाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। कोल्हू संचालक परंपरागत कोल्हू का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। आधुनिक कोल्हू पर दी जाने वाली साढे़ छह लाख की सब्सिडी भी कोल्हू संचालकों में नहीं लुभा पा रही है। चार साल में जिले में केवल एक आधुनिक कोल्हू लग पाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनपद एक उत्पाद में जिले में गुड़ को शामिल किया है। चार साल पहले सरकार ने इसमें सबसे पहला काम ये किया कि परंपरागत कोल्हू के स्थान पर आधुनिक कोल्हू लगाए जाएंगे। आधुनिक कोल्हू को लेकर यह तर्क दिया गया था कि यह प्रदूषण मुक्त होगा। गुड़ की रिकवरी भी इसमें ज्यादा आएगी। कोल्हू संचालकों ने पूरी जानकारी लेने के बाद इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली। परंपरागत कोल्हू से एक-डेढ़ लाख के खर्च में कार्य शुरू हो जाता है। आधुनिक कोल्हू की कीमत 25 लाख है। सरकार इस पर साढे़ छह लाख की सब्सिडी की बात कर रही है। कोल्हू संचालकों को सब्सिडी की योजना भी नहीं लुभा पाई। चार साल के अथक प्रयासों के बाद भोपा में केवल एक आधुनिक कोल्हू इस बार लग पाया। आगामी सीजन में इसमें गुड़ बन पाएगा।
कोल्हू संचालक नूनाखेड़ा गांव के नरेश कश्यप का कहना है कि हमारे यहां सैकड़ों सालों से जो प्रक्रिया चली आ रही है, वह आसान है। आम आदमी इस विधि से गुड़ बना सकता है। 25 लाख का रिस्क भी कोई नहीं लेना चाहता।
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जिले में है तीन हजार से अधिक कोल्हू
जनपद में गुड़ का सीजन एक अक्तूबर से प्रारंभ हो जाएगा। लगभग 15 दिन बाद नया गुड़ बनने लगेगा। शुरूआत में तो कोल्हू कम ही चलते हैं, लेकिन नवंबर तक जिले में तीन हजार से अधिक कोल्हू गुड़ बनाने का कार्य शुरू कर देते हैं।
नहीं छूट रहा परंपरागत कोल्हू का मोह
चार साल से विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। कोल्हू संचालकों को समझाया भी गया है। हमारे जिले में परंपरागत कोल्हुओं का मोह छूट नहीं पा रहा है। जिले में केवल एक ही आधुनिक कोल्हू इसी साल लगा है। - परमहंस मौर्य, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र
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साढे़ छह लाख की सब्सिडी भी कोल्हू संचालकों में नहीं लुभा पा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। एक जनपद-एक उत्पाद में जिले में प्रदूषण मुक्त आधुनिक कोल्हू लगाने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी। कोल्हू संचालक परंपरागत कोल्हू का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। आधुनिक कोल्हू पर दी जाने वाली साढे़ छह लाख की सब्सिडी भी कोल्हू संचालकों में नहीं लुभा पा रही है। चार साल में जिले में केवल एक आधुनिक कोल्हू लग पाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनपद एक उत्पाद में जिले में गुड़ को शामिल किया है। चार साल पहले सरकार ने इसमें सबसे पहला काम ये किया कि परंपरागत कोल्हू के स्थान पर आधुनिक कोल्हू लगाए जाएंगे। आधुनिक कोल्हू को लेकर यह तर्क दिया गया था कि यह प्रदूषण मुक्त होगा। गुड़ की रिकवरी भी इसमें ज्यादा आएगी। कोल्हू संचालकों ने पूरी जानकारी लेने के बाद इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली। परंपरागत कोल्हू से एक-डेढ़ लाख के खर्च में कार्य शुरू हो जाता है। आधुनिक कोल्हू की कीमत 25 लाख है। सरकार इस पर साढे़ छह लाख की सब्सिडी की बात कर रही है। कोल्हू संचालकों को सब्सिडी की योजना भी नहीं लुभा पाई। चार साल के अथक प्रयासों के बाद भोपा में केवल एक आधुनिक कोल्हू इस बार लग पाया। आगामी सीजन में इसमें गुड़ बन पाएगा।
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कोल्हू संचालक नूनाखेड़ा गांव के नरेश कश्यप का कहना है कि हमारे यहां सैकड़ों सालों से जो प्रक्रिया चली आ रही है, वह आसान है। आम आदमी इस विधि से गुड़ बना सकता है। 25 लाख का रिस्क भी कोई नहीं लेना चाहता।
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जिले में है तीन हजार से अधिक कोल्हू
जनपद में गुड़ का सीजन एक अक्तूबर से प्रारंभ हो जाएगा। लगभग 15 दिन बाद नया गुड़ बनने लगेगा। शुरूआत में तो कोल्हू कम ही चलते हैं, लेकिन नवंबर तक जिले में तीन हजार से अधिक कोल्हू गुड़ बनाने का कार्य शुरू कर देते हैं।
नहीं छूट रहा परंपरागत कोल्हू का मोह
चार साल से विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। कोल्हू संचालकों को समझाया भी गया है। हमारे जिले में परंपरागत कोल्हुओं का मोह छूट नहीं पा रहा है। जिले में केवल एक ही आधुनिक कोल्हू इसी साल लगा है। - परमहंस मौर्य, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र