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28 साल से फुलत में संचालित है मौलाना का मदरसा

Thu, 23 Sep 2021 12:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Sep 2021 12:17 AM IST
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The Madrasa of Kalim is spread over 50 bighas
मुजफ्फरनगर के खतौली के गांव फुलत में मौलाना कलीम के मदरसे में बना मेहमान खाना। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
खतौली (मुजफ्फरनगर)। धर्मांतरण प्रकरण में एटीएस की गिरफ्त में आए मौलाना कलीम सिद्दीकी रतनपुरी क्षेत्र के गांव फुलत के मूल निवासी हैं। मौलाना कलीम सिद्दीकी ने वर्ष 1993 में फुलत में मदरसे की स्थापना की, आज यह करीब 50 बीघा भूमि में फैला हुआ है। इसमें कई प्रदेशों के 300 छात्र अध्ययनरत है। मदरसे में ही मस्जिद व मेहमानखाना भी है, जिसमें आए दिन बड़े आयोजन होते रहते हैं।
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रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव फुलत निवासी मोहम्मद अमीन के चार बेटों में तीसरे नंबर के मौलाना कलीम सिद्दीकी वर्ष 1987 में गांव स्थित पुराने ऐतिहासिक मदरसे फैजुल इस्लाम से जुड़े थे। इसके बाद वर्ष 1993 में उन्होंने इस मदरसे के पास ही अपना मदरसा शुरू किया, जिसका नाम मदरसा जामिया इमाम वलीउल्लाह इस्लामिया रखा गया। समय के साथ धीरे-धीरे मदरसे का विस्तार किया गया। यहां होने वाले आयोजनों में पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और डॉ अनंत भागवत सहित कई प्रमुख हस्तियां भी भी शामिल हो चुकी हैं। प्रदेश के अलावा कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार व झारखंड से भी सैकड़ों छात्र पढ़ने आते हैं। करीब तीन सौ छात्र मदरसे में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में छात्रों की पढ़ाई ऑन लाइन चल रही है। मदरसे के स्टाफ में कुल 56 सदस्य हैं, जिनमें 41 शिक्षक हैं। इनमें किसी भी आयोजन और मेहमानों के खाने का इंतजाम मौलाना सलमान और शैक्षिक प्रबंधन मौलाना वसी करते हैं। प्रशासनिक मामलों के लिए मोहतमिम मोहम्मद ताहिर नियुक्त किए गए हैं। मदरसे में कक्षा-एक से कक्षा-आठ तक सरकारी कोर्स के हिसाब से पढ़ाई कराई जाती है। इसके बाद मौलवियत और कुराने-हिफ्ज की भी पढ़ाई होती है।
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वर्ष 2006 में चले गए थे दिल्ली के शाहीन बाग
खतौली। मौलाना कलीम सिद्दीकी के परिवार में पत्नी मुनीरा बेगम के साथ ही दो बेटे अहमद सिद्दीकी व असजद सिद्दीकी और दो बेटियां असमां व मसमां शामिल हैं। मौलाना कलीम सिद्दीकी का बड़ा बेटा अहमद सिद्दीकी गांव फुलत में ही रहकर पशुओं की दूध डेयरी चलाता है, जबकि वर्ष 2006 में मौलाना सिद्दीकी का बाकी पूरा परिवार दिल्ली के शाहीन बाग चला गया था और तभी से सभी लोग वहीं रहते हैं। मौलाना कलीम सिद्दीकी व छोटा बेटा असजद सिद्दीकी मदरसे की देखरेख व वहां होने वाले आयोजनों में शरीक होने के लिए लगातार फुलत मदरसे में आते-जाते रहते हैं।
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