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Muzaffarnagar News: अविरल बहेगी काली नदी, खतौली ड्रेन का होगा शुद्धिकरण
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नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत खतौली ड्रेन को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कराए गए निर्माण कार्य। स्र
मुजफ्फरनगर। काली नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामी गंगे परियोजना के तहत बड़ा कदम उठाया गया है। करीब 8.25 करोड़ की लागत से काली नदी और उसमें गिर रहे खतौली नाले के दूषित जल को साफ कर गंदगी मुक्त किया जाएगा।
नमामी गंगे परियोजना के तहत मृत प्राय: पड़ी नदियों को अविरल एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जनपद में योजना की शुरुआत हुई है। गांव याहियापुर के समीप खतौली नाले के करीब 700 मीटर भाग सहित खतौली-मीरापुर मार्ग पर काली नदी पूर्वी के 1100 मीटर भाग को परियोजना के लिए चुना गया है।
खतौली नाले में चीनी मिल का दूषित जल आता है, जो काली नदी पूर्वी में जाकर गिरता है। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के अवर अभियंता सुरेश कुमार का कहना है कि नदी का पानी भी दूषित हो जाता है। काली नदी को अविरल बनाए रखने के साथ प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए 8.25 करोड़ की परियोजना पर काम चल रहा है।
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n परियोजना के तहत 6 वॉल 24 गेबियंस का निर्माण : खतौली ड्रेन यानी नाले और काली नदी पूर्वी में प्रवाहित दूषित जल की गंदगी दूर कर पानी को साफ करने के लिए नाले में 200 की दूरी पर अलग-अलग तीन वाल बनाई गई हैं।
नाले में ही आठ स्थानों पर लोहे की जाली यानी गेबियंस लगाए गए हैं, जिनमें पानी के साथ चल रही गंदगी अथवा कचरा अलग हो जाता है। जबकि काली नदी में 16 बड़े गेबियंस लगाए गए हैं। नदी में कई स्थानों पर सीढियां बनाई गई हैं, जिससे अशुद्धियां अलग होती चली जाएं।
साथ ही काली नदी के किनारे 950 मीटर लंबाई में स्लोप व पिचिंग का काम किया जाएगा। ड्रेन और नदी में जमी सिल्ट की सफाई और पौधरोपण भी प्रस्तावित है।
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नमामी गंगे परियोजना के तहत मृत प्राय: पड़ी नदियों को अविरल एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जनपद में योजना की शुरुआत हुई है। गांव याहियापुर के समीप खतौली नाले के करीब 700 मीटर भाग सहित खतौली-मीरापुर मार्ग पर काली नदी पूर्वी के 1100 मीटर भाग को परियोजना के लिए चुना गया है।
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खतौली नाले में चीनी मिल का दूषित जल आता है, जो काली नदी पूर्वी में जाकर गिरता है। कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के अवर अभियंता सुरेश कुमार का कहना है कि नदी का पानी भी दूषित हो जाता है। काली नदी को अविरल बनाए रखने के साथ प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए 8.25 करोड़ की परियोजना पर काम चल रहा है।
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n परियोजना के तहत 6 वॉल 24 गेबियंस का निर्माण : खतौली ड्रेन यानी नाले और काली नदी पूर्वी में प्रवाहित दूषित जल की गंदगी दूर कर पानी को साफ करने के लिए नाले में 200 की दूरी पर अलग-अलग तीन वाल बनाई गई हैं।
नाले में ही आठ स्थानों पर लोहे की जाली यानी गेबियंस लगाए गए हैं, जिनमें पानी के साथ चल रही गंदगी अथवा कचरा अलग हो जाता है। जबकि काली नदी में 16 बड़े गेबियंस लगाए गए हैं। नदी में कई स्थानों पर सीढियां बनाई गई हैं, जिससे अशुद्धियां अलग होती चली जाएं।
साथ ही काली नदी के किनारे 950 मीटर लंबाई में स्लोप व पिचिंग का काम किया जाएगा। ड्रेन और नदी में जमी सिल्ट की सफाई और पौधरोपण भी प्रस्तावित है।