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Muzaffarnagar News: वेयर हाउस से ली गई दवाइयों की जानकारी जुटा रही जांच समिति
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जिला अस्पताल के पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट पर मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट पर मुकदमा दर्ज होने के बाद दवा घोटाले की जांच कर रही कमेटी अब ड्रग वेयर हाउस से जारी हुई सभी दवाइयों का लेखा-जोखा तलाश रही है। जांच के दौरान ड्रग वेयर हाउस से ली गई सभी दवाइयों का ब्योरा सामने आएगा। सरकारी दवाइयों का घोटाला उजागर होने के बाद इस मामले में सीएमओ ने कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दिए थे।
सरकारी वेयर हाउस से उड़ाई गईं दवाइयों का प्रयोग डकैती की घटना में किए जाने का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता दिखाई थी। इस मामले में एक आरोपित के विरुद्ध नामजद एफआईआर कराई गई, जबकि कोर्ट में भी परिवाद दर्ज हुआ है। इसके साथ ही जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय के चिकित्सकों की एक संयुक्त कमेटी भी मामले की जांच कर रही है। जांच कमेटी ने पहली बैठक में ही ड्रग वेयर हाउस का रिकार्ड तलब कर लिया था, जबकि जिला अस्पताल के फार्मेसी विभाग से भी आवश्यक जानकारी जुटाई गई।
-अस्पताल का प्रशिक्षु फार्मासिस्ट घोटाले का मास्टरमाइंड
सरकारी दवा का घोटाला करने के मामले में जिला अस्पताल के पूर्व प्रशिक्षु फार्मेसिस्ट पर आरोप की सुईं घूम चुकी है। उसे ही मास्टरमाइंड मानते हुए ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां लेकर गायब करने के मामले में जिला अस्पताल के मुख्य फार्मासिस्ट हरीश उनियाल ने पांच जनवरी को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अस्पताल में काम करने वाले पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट गुल सनव्वर ने ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां लेकर उनके वाउचर और औषधियां जिला अस्पताल में जमा नहीं कराए।
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-बिना इंडेंट ही ड्रग वेयर हाउस से ले ली गईं दवाइयां
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. शैलेष जैन की अध्यक्षता में गठित चिकित्सकों की कमेटी दवा घोटाले की जांच कर रही है। कमेटी ने शुरुआती जांच ड्रग वेयर हाउस पर केंद्रित की हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला अस्पताल फार्मेसी से दवा की डिमांड के लिए इंडेंट ही जारी नहीं किया गया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि इंडेंट जारी किये बिना ही ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां कैसे दे दी गईं। औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य की ओर से 21 दिसंबर को मदीना काॅलोनी स्थित मुख्य आरोपी गुल सनव्वर के मेडिकल स्टोर से सरकारी दवाइयों की बरामदगी से यह साबित भी हुआ कि घोटाले के तार कहीं न कहीं ड्रग वेयर हाउस से भी जुड़े हैं।
-संयुक्त कमेटी की जांच में उजागर होगा मामला
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि सरकारी दवाइयों के घोटाले के मामले में संयुक्त कमेटी जांच कर रही है। कमेटी के अध्यक्ष एसीएमओ बनाए गए हैं। कमेटी शीघ्र ही मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट पर मुकदमा दर्ज होने के बाद दवा घोटाले की जांच कर रही कमेटी अब ड्रग वेयर हाउस से जारी हुई सभी दवाइयों का लेखा-जोखा तलाश रही है। जांच के दौरान ड्रग वेयर हाउस से ली गई सभी दवाइयों का ब्योरा सामने आएगा। सरकारी दवाइयों का घोटाला उजागर होने के बाद इस मामले में सीएमओ ने कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दिए थे।
सरकारी वेयर हाउस से उड़ाई गईं दवाइयों का प्रयोग डकैती की घटना में किए जाने का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता दिखाई थी। इस मामले में एक आरोपित के विरुद्ध नामजद एफआईआर कराई गई, जबकि कोर्ट में भी परिवाद दर्ज हुआ है। इसके साथ ही जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय के चिकित्सकों की एक संयुक्त कमेटी भी मामले की जांच कर रही है। जांच कमेटी ने पहली बैठक में ही ड्रग वेयर हाउस का रिकार्ड तलब कर लिया था, जबकि जिला अस्पताल के फार्मेसी विभाग से भी आवश्यक जानकारी जुटाई गई।
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-अस्पताल का प्रशिक्षु फार्मासिस्ट घोटाले का मास्टरमाइंड
सरकारी दवा का घोटाला करने के मामले में जिला अस्पताल के पूर्व प्रशिक्षु फार्मेसिस्ट पर आरोप की सुईं घूम चुकी है। उसे ही मास्टरमाइंड मानते हुए ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां लेकर गायब करने के मामले में जिला अस्पताल के मुख्य फार्मासिस्ट हरीश उनियाल ने पांच जनवरी को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अस्पताल में काम करने वाले पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट गुल सनव्वर ने ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां लेकर उनके वाउचर और औषधियां जिला अस्पताल में जमा नहीं कराए।
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-बिना इंडेंट ही ड्रग वेयर हाउस से ले ली गईं दवाइयां
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. शैलेष जैन की अध्यक्षता में गठित चिकित्सकों की कमेटी दवा घोटाले की जांच कर रही है। कमेटी ने शुरुआती जांच ड्रग वेयर हाउस पर केंद्रित की हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिला अस्पताल फार्मेसी से दवा की डिमांड के लिए इंडेंट ही जारी नहीं किया गया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ कि इंडेंट जारी किये बिना ही ड्रग वेयर हाउस से दवाइयां कैसे दे दी गईं। औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य की ओर से 21 दिसंबर को मदीना काॅलोनी स्थित मुख्य आरोपी गुल सनव्वर के मेडिकल स्टोर से सरकारी दवाइयों की बरामदगी से यह साबित भी हुआ कि घोटाले के तार कहीं न कहीं ड्रग वेयर हाउस से भी जुड़े हैं।
-संयुक्त कमेटी की जांच में उजागर होगा मामला
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि सरकारी दवाइयों के घोटाले के मामले में संयुक्त कमेटी जांच कर रही है। कमेटी के अध्यक्ष एसीएमओ बनाए गए हैं। कमेटी शीघ्र ही मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी।