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Muzaffarnagar News: जवान की मौत का कारण जानने के लिए परिजनों ने किया हंगामा
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फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। आसाम के कोकराझार में एसएसबी के जवान पमनावली गांव के प्रवीण की मौत के मामले में ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। खतौली में एसएसबी की टीम से शव लेने से इन्कार कर दिया। पांच घटे तक हंगामा हुआ। एसडीएम अपूर्वा यादव ने विभाग के कंमाडेंट से परिजनों की बात कराई, जिसके बाद अंतिम संस्कार पर सहमति बनी।
गांव पमनावली निवासी शेरपाल सिंह का बेटा प्रवीण कुमार वर्ष 2007 में एसएसबी में भर्ती हुआ था। परिजनों ने बताया कि 30 दिन की छुट्टी पूरी कर वह 16 जुलाई को आसाम के कोकराझार जिले के गौंसाईं गांव में ड्यूटी पर गया था। 29 जुलाई को दोपहर करीब दो बजे उनकी बात हुई थी। इसके बाद बटालियन के कमांडेंट का फोन आया कि प्रवीण को हादसे में चोट लग गई है। परिजन उसकी जानकारी लेते रहे, आरोप है कि सही जानकारी नहीं दी गई। बाद में बताया गया कि सिर में गोली लगने से मौत हुई है।
आसाम से शव को विमान के जरिए दिल्ली लाया गया। बुधवार सुबह शव एसएसबी की गाड़ी से खतौली पहुंचा। जानकारी मिलने पर परिजन और ग्रामीण थाने पहुंच गए। परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया और थाने में बैठ गए।
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परिजनों का कहना था कि प्रवीण की मौत की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराई जाए। उन्हें बताया जा रहा है कि उसने गोली मारकर आत्महत्या की है। इसको लेकर ग्रामीण करीब पांच घंटे तक थाने में जमा रहे।
एसडीएम अपूर्वा यादव और सीओ रामआशीष यादव ने एसएसबी कमांडेंट से परिजनों की बात कराई। इस पर उन्होंने परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। आसाम प्रदेश पुलिस घटना की जांच कर रही है। इसके बाद एक प्रार्थना पत्र डीएम और एसएसपी के माध्यम से गृह मंत्रालय भेजकर जवान की मौत की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराए जाने पर परिजन सहमत हुए और शव लेकर गांव पहुंचे। गमगीन माहौल में गांव में ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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शव पहुंचते ही परिवार में छाया मातम
प्रवीण कुमार का शव गांव पहुंचने पर उसके परिवार में मातम छा गया। पत्नी सपना, मां कुसुम, पिता शेरपाल सिंह, उसके बच्चे वंशिका (13) तीन जुड़वा बच्चे विराट राणा (7) परिधि (7) प्रिया (7) ताबूत में रखे प्रवीण कुमार के शव से लिपट कर रोने लगे। इस हालात को देख वहां मौजूद हर किसी की आंखे नम हो गईं।
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दो भाइयों में बड़ा था प्रवीण
प्रवीण कुमार अपने परिवार में दो भाइयों में बड़ा था। छोटा भाई दीपक नोएडा में प्राइवेट नौकरी करता है, जबकि पिता खेती किसानी का काम करते हैं। प्रवीण की मौत से गांव शोक छाया हुआ है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। आसाम के कोकराझार में एसएसबी के जवान पमनावली गांव के प्रवीण की मौत के मामले में ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की। खतौली में एसएसबी की टीम से शव लेने से इन्कार कर दिया। पांच घटे तक हंगामा हुआ। एसडीएम अपूर्वा यादव ने विभाग के कंमाडेंट से परिजनों की बात कराई, जिसके बाद अंतिम संस्कार पर सहमति बनी।
गांव पमनावली निवासी शेरपाल सिंह का बेटा प्रवीण कुमार वर्ष 2007 में एसएसबी में भर्ती हुआ था। परिजनों ने बताया कि 30 दिन की छुट्टी पूरी कर वह 16 जुलाई को आसाम के कोकराझार जिले के गौंसाईं गांव में ड्यूटी पर गया था। 29 जुलाई को दोपहर करीब दो बजे उनकी बात हुई थी। इसके बाद बटालियन के कमांडेंट का फोन आया कि प्रवीण को हादसे में चोट लग गई है। परिजन उसकी जानकारी लेते रहे, आरोप है कि सही जानकारी नहीं दी गई। बाद में बताया गया कि सिर में गोली लगने से मौत हुई है।
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आसाम से शव को विमान के जरिए दिल्ली लाया गया। बुधवार सुबह शव एसएसबी की गाड़ी से खतौली पहुंचा। जानकारी मिलने पर परिजन और ग्रामीण थाने पहुंच गए। परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया और थाने में बैठ गए।
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परिजनों का कहना था कि प्रवीण की मौत की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराई जाए। उन्हें बताया जा रहा है कि उसने गोली मारकर आत्महत्या की है। इसको लेकर ग्रामीण करीब पांच घंटे तक थाने में जमा रहे।
एसडीएम अपूर्वा यादव और सीओ रामआशीष यादव ने एसएसबी कमांडेंट से परिजनों की बात कराई। इस पर उन्होंने परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। आसाम प्रदेश पुलिस घटना की जांच कर रही है। इसके बाद एक प्रार्थना पत्र डीएम और एसएसपी के माध्यम से गृह मंत्रालय भेजकर जवान की मौत की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराए जाने पर परिजन सहमत हुए और शव लेकर गांव पहुंचे। गमगीन माहौल में गांव में ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
शव पहुंचते ही परिवार में छाया मातम
प्रवीण कुमार का शव गांव पहुंचने पर उसके परिवार में मातम छा गया। पत्नी सपना, मां कुसुम, पिता शेरपाल सिंह, उसके बच्चे वंशिका (13) तीन जुड़वा बच्चे विराट राणा (7) परिधि (7) प्रिया (7) ताबूत में रखे प्रवीण कुमार के शव से लिपट कर रोने लगे। इस हालात को देख वहां मौजूद हर किसी की आंखे नम हो गईं।
दो भाइयों में बड़ा था प्रवीण
प्रवीण कुमार अपने परिवार में दो भाइयों में बड़ा था। छोटा भाई दीपक नोएडा में प्राइवेट नौकरी करता है, जबकि पिता खेती किसानी का काम करते हैं। प्रवीण की मौत से गांव शोक छाया हुआ है।