मुजफ्फरनगर जनपद में कई बड़ी वारदातों में सरकारी असलाह दगा दे चुके है। इनमें मुख्यत: हाईवे पर धौलापुल पर पुलिस वाहन पर एके-47 से की गई फायरिंग की घटना और कोर्ट रूम में की गई विक्रांत उर्फ विक्की त्यागी की हत्या शामिल हैं। इसे पुलिस प्रशासन के रखरखाव में लापरवाही कहें या फिर कारण दूसरे हैं लेकिन ऐसा कई बार है जब सरकारी असलहे अपराधियों के सामने नाकारा साबित हुए हैं-
यूपी: हर बड़ी घटना में दगा दे जाता है सरकारी असलहा, रखरखाव का काला सच उजागर
जनपद में करीब पांच साल पूर्व बुलंदशहर जेल से हत्या के मुकदमे में कोर्ट में पेशी पर लाए गए छपार निवासी अनिल दुजाना गैंग के सक्रिय सदस्य रॉबिन त्यागी को बुलंदशहर ले जाते समय हाईवे पर सरकारी वाहन पर एके-47 से फायरिंग की गई थी। इसमें एक सिपाही की मौत हुई थी, जबकि बुलंदशहर पुलिस लाइन में तैनात दरोगा घायल हुए थे।
घायल दरोगा ने जांच में बताया कि उन्होंने अपने सरकारी असलहा से हमलावरों पर जवाबी फायरिंग की थी, लेकिन दुर्भाग्य से असलाह से एक भी गोली नहीं चली। मौके पर पहुंचे आईजी जोन ने दरोगा की उक्त रिवाल्वर की मंसूरपुर थाने में खुद जांच की थी, जिसमें सभी गोलियों पर पिन-शॉट के निशान मिले, लेकिन उससे एक भी गोली नहीं चली।
इस घटना के कुछ माह बाद ही 16 फरवरी 2015 को कुख्यात माफिया विक्रांत उर्फ विक्की त्यागी की कोर्ट रूम में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। दुस्साहसिक हत्याकांड के समय एक चौकी प्रभारी कोर्ट रूम में ही मौजूद थे, जो किसी मामले में गवाही के लिए पहुंचे थे।
उक्त चौकी प्रभारी ने विक्की पर पिस्टल से गोलियां बरसा रहे हमलावर सागर मलिक पर अपनी सरकारी रिवाल्वर से फायर किए थे, लेकिन रिवाल्वर से एक भी गोली नहीं निकली। चौकी प्रभारी ने बाद में अफसरों को इसकी जानकारी देते हुए रिवाल्वर भी चेक कराई थी, जिसमें उनकी बात की पुष्टि हुई थी और सभी गोलियों पर पिन-शॉट पाए गए थे।
इनके अलावा भी कई घटनाओं में सरकारी असलाह के ऐनवक्त पर धोखा देने की बात सामने आ चुकी है। मामले में एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि पूर्व में सामने आ चुकी घटनाओंं के मद्देनजर ही शस्त्रों को पुलिसकर्मियों के नाम से आवंटित करने की योजना की शुरूआत की गई है।