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फोटो भेजकर कराई जा रही पढाई, अभिभावक परेशान
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फोटो भेजकर कराई जा रही पढ़ाई, अभिभावक परेशान
मुजफ्फरनगर, खतौली। स्कूल खोले जाने का निर्णय उचित है, इस बार बच्चे पढ़ाई में पीछे हटते जा रहे है। स्कूल संचालक बच्चों को पढ़ाई के लिए पुस्तकों के फोटों भेज रहे हैं। जो समझ से परे है, ऐसी स्थिति में अभिभावक परेशान हैं। उधर स्कूलों द्वारा फोन कराकर अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाया जा रहा है। स्कूलों को छह चरण में खोले जाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस मामले में अभिभावकों बात की गई।
सतेंद्र इंसा का कहना है कि जैसा कि स्कूल में बच्चों की क्लास को शिफ्ट में चलाने की चर्चा हो रही है। इससे अच्छा है कि इस वर्ष पूरे सत्र को शून्य घोषित कर देना चाहिए। सभी बच्चों को प्रोन्नत कर देना चाहिए, ताकि अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी का सामना न करना पड़े। क्योंकि ऑनलाइन के नाम पर कोई भी पढ़ाई नहीं हो रही है और फीस वसूली जा रही है।
उदगन रानी का कहना है कि जब सभी बाजार पूर्ण रूप से खुल रहे हैं, तब स्कूलों को खोलने में क्या समस्या है, कोरोना वायरस को लेकर सभी लोग सुरक्षा बरत रहे हैं। स्कूलों में भी बच्चों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए शिक्षा देनी चाहिए।
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सतेंद्र ठाकुर का कहना है कि स्कूल पूर्ण रूप से खोलने का कोई समय निर्धारित न होने से बच्चों व अभिभावकों में एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, इसके बारे में भी स्पष्टीकरण होना चाहिए।
कृष्णपाल का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाएं चला दी गई हैं, कक्षाएं चलाने से पहले यह नहीं सोचा गया कि गरीब परिवार के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली से कैसे जुड़ पाएंगे। उनके पास न तो मोबाइल फोन है और नेट की भी सुविधा नहीं है, उस पर स्कूल संचालकों का फीस के लिए बढ़ता दबाव। स्कूल खुलने से ही बच्चों की पढ़ाई ठीक से होगी। बच्चों द्वारा ज्यादा मोबाइल देखने के कारण खराब हो रही आंखें भी बच सकेंगी।
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मुजफ्फरनगर, खतौली। स्कूल खोले जाने का निर्णय उचित है, इस बार बच्चे पढ़ाई में पीछे हटते जा रहे है। स्कूल संचालक बच्चों को पढ़ाई के लिए पुस्तकों के फोटों भेज रहे हैं। जो समझ से परे है, ऐसी स्थिति में अभिभावक परेशान हैं। उधर स्कूलों द्वारा फोन कराकर अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाया जा रहा है। स्कूलों को छह चरण में खोले जाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस मामले में अभिभावकों बात की गई।
सतेंद्र इंसा का कहना है कि जैसा कि स्कूल में बच्चों की क्लास को शिफ्ट में चलाने की चर्चा हो रही है। इससे अच्छा है कि इस वर्ष पूरे सत्र को शून्य घोषित कर देना चाहिए। सभी बच्चों को प्रोन्नत कर देना चाहिए, ताकि अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी का सामना न करना पड़े। क्योंकि ऑनलाइन के नाम पर कोई भी पढ़ाई नहीं हो रही है और फीस वसूली जा रही है।
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उदगन रानी का कहना है कि जब सभी बाजार पूर्ण रूप से खुल रहे हैं, तब स्कूलों को खोलने में क्या समस्या है, कोरोना वायरस को लेकर सभी लोग सुरक्षा बरत रहे हैं। स्कूलों में भी बच्चों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए शिक्षा देनी चाहिए।
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सतेंद्र ठाकुर का कहना है कि स्कूल पूर्ण रूप से खोलने का कोई समय निर्धारित न होने से बच्चों व अभिभावकों में एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, इसके बारे में भी स्पष्टीकरण होना चाहिए।
कृष्णपाल का कहना है कि ऑनलाइन कक्षाएं चला दी गई हैं, कक्षाएं चलाने से पहले यह नहीं सोचा गया कि गरीब परिवार के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली से कैसे जुड़ पाएंगे। उनके पास न तो मोबाइल फोन है और नेट की भी सुविधा नहीं है, उस पर स्कूल संचालकों का फीस के लिए बढ़ता दबाव। स्कूल खुलने से ही बच्चों की पढ़ाई ठीक से होगी। बच्चों द्वारा ज्यादा मोबाइल देखने के कारण खराब हो रही आंखें भी बच सकेंगी।