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बैंडबाजों के साथ कलश यात्रा निकाली
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भोपा रोड पर राम कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकालते श्रद्वालु।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में दंडी स्वामी ब्रह्मलीन स्वामी विष्णु आश्रम महाराज के 18वें निर्वाण महा महोत्सव का शुभारंभ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ से हुआ। दूर दराज क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बैंडबाजों के साथ कलश यात्रा निकाली।
नगर के दंडी आश्रम से बैंड बाजों के साथ कलश यात्रा शुरू होकर कल्याण देव तिराहा, अंबेडकर तिराहा, कारगिल शहीद स्मारक से होती हुई गंगा घाट पर पहुंची। वहां पर गंगा पूजन किया गया। कलश यात्रा में दूर दराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जिसमें भजनों पर महिलाओं ने नृत्य भी किया। विधिवत रुप से व्यास पूजन के बाद भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
प्रयाग से आए कथा व्यास आचार्य राममूर्ति मिश्र ने कहा कि दरिद्र होकर दान करना। युवा अवस्था में तप करना, ज्ञानी होकर मौन रहना। प्राणी मात्र पर दया करना। यहीं साधन मनुष्य को स्वर्ग ले जाते है। पुण्य का फल सुख है, उसको प्राणी मात्र चाहता है। पाप का फल दीनता, दरित्रता, व्याधि , शोक, संताप यह जो दुख है। इनको कोई नही चाहता, पर पाप प्रयत्न पूर्वक करते है। धर्म सत्य से उत्पन्न होकर, दया दान से बढ़ता है। क्षमा में निवास करता है और क्रोध से नष्ट हो जाता है। कथा के आयोजन में जगदीश वशिष्ठ, राजकुमार राज, मनोहर लाल शर्मा, गोपाल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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नगर के दंडी आश्रम से बैंड बाजों के साथ कलश यात्रा शुरू होकर कल्याण देव तिराहा, अंबेडकर तिराहा, कारगिल शहीद स्मारक से होती हुई गंगा घाट पर पहुंची। वहां पर गंगा पूजन किया गया। कलश यात्रा में दूर दराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जिसमें भजनों पर महिलाओं ने नृत्य भी किया। विधिवत रुप से व्यास पूजन के बाद भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
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प्रयाग से आए कथा व्यास आचार्य राममूर्ति मिश्र ने कहा कि दरिद्र होकर दान करना। युवा अवस्था में तप करना, ज्ञानी होकर मौन रहना। प्राणी मात्र पर दया करना। यहीं साधन मनुष्य को स्वर्ग ले जाते है। पुण्य का फल सुख है, उसको प्राणी मात्र चाहता है। पाप का फल दीनता, दरित्रता, व्याधि , शोक, संताप यह जो दुख है। इनको कोई नही चाहता, पर पाप प्रयत्न पूर्वक करते है। धर्म सत्य से उत्पन्न होकर, दया दान से बढ़ता है। क्षमा में निवास करता है और क्रोध से नष्ट हो जाता है। कथा के आयोजन में जगदीश वशिष्ठ, राजकुमार राज, मनोहर लाल शर्मा, गोपाल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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