{"_id":"6015a4da8ebc3e56846c5c28","slug":"swaroop-family-recalls-against-the-decision-muzaffarnagar-news-mrt522985972","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वरूप परिवार ने निर्णय के खिलाफ किया रिकॉल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वरूप परिवार ने निर्णय के खिलाफ किया रिकॉल
विज्ञापन
उद्यमी अनिल स्वरुप व आलोक स्वरुप।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
स्वरूप परिवार ने निर्णय के खिलाफ किया रिकॉल
मुजफ्फरनगर। भोपा रोड की जमीन महाल रुस्तम अली खां की 51 बीघा जमीन को लेकर एसडीएम के न्यायालय से हुए आदेश पर आलोक स्वरूप और अनिल स्वरूप ने सवाल खड़ा किया है। इनका कहना है कि यह पूरी जमीन 570 बीघा है। यह शत्रु संपत्ति घोषित करनी है तो समस्त जमीन को करे। केवल हमारे कब्जे की जमीन पर ही निर्णय दिया गया है। उन्हाेंने एसडीएम के न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ रिकॉल किया है।
बालाजी चौक पर एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता में उद्यमी आलोक स्वरूप ने दावा किया कि शुरूआत से लेकर अब तक जमीन से सरकार का कोई संबंध नहीं रहा है। न ही जमीन को लेकर सरकार से कोई विवाद चला। इस जमीन का हमारे नाम बैनामा है। यदि शत्रु संपत्ति या निष्क्रांत संपत्ति घोषित करनी है तो 570 बीघा समस्त भूमि करें। हमें ही टारगेट बनाया जा रहा है। हमारे ऊपर नाजायज दबाव डाला जा रहा है। अधिकारी दो फार्म हाउसों की बार-बार पैमाईश करने आ रहे हैं।
उद्यमी अनिल स्वरूप ने कहा कि एसडीएम ने हमारा पक्ष नहीं सुना। कोरोना काल में किसी मामले में निर्णय नहीं हो सकता था। इस बीच जमीन के मामले में एसडीएम ने निर्णय दिया है। हमने निर्णय को लेकर रिकॉल की अपील कर दी है। अपने आदेश में एसडीएम कोर्ट ने उन मूल अभिलेखों का जिक्र नहीं किया जिसमें कूटरचना की बात कही गई है। जिस धारा के अंतर्गत जमीन को राज्य सरकार में दर्ज किया गया है, उसमें स्वामित्व को नहीं बदला जा सकता। पत्रकार वार्ता में मुश्ताक अली एडवोकेट, जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष सैय्यद नसीर हैदर काजमी, ललित माहेश्वरी मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। भोपा रोड की जमीन महाल रुस्तम अली खां की 51 बीघा जमीन को लेकर एसडीएम के न्यायालय से हुए आदेश पर आलोक स्वरूप और अनिल स्वरूप ने सवाल खड़ा किया है। इनका कहना है कि यह पूरी जमीन 570 बीघा है। यह शत्रु संपत्ति घोषित करनी है तो समस्त जमीन को करे। केवल हमारे कब्जे की जमीन पर ही निर्णय दिया गया है। उन्हाेंने एसडीएम के न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ रिकॉल किया है।
बालाजी चौक पर एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता में उद्यमी आलोक स्वरूप ने दावा किया कि शुरूआत से लेकर अब तक जमीन से सरकार का कोई संबंध नहीं रहा है। न ही जमीन को लेकर सरकार से कोई विवाद चला। इस जमीन का हमारे नाम बैनामा है। यदि शत्रु संपत्ति या निष्क्रांत संपत्ति घोषित करनी है तो 570 बीघा समस्त भूमि करें। हमें ही टारगेट बनाया जा रहा है। हमारे ऊपर नाजायज दबाव डाला जा रहा है। अधिकारी दो फार्म हाउसों की बार-बार पैमाईश करने आ रहे हैं।
विज्ञापन
उद्यमी अनिल स्वरूप ने कहा कि एसडीएम ने हमारा पक्ष नहीं सुना। कोरोना काल में किसी मामले में निर्णय नहीं हो सकता था। इस बीच जमीन के मामले में एसडीएम ने निर्णय दिया है। हमने निर्णय को लेकर रिकॉल की अपील कर दी है। अपने आदेश में एसडीएम कोर्ट ने उन मूल अभिलेखों का जिक्र नहीं किया जिसमें कूटरचना की बात कही गई है। जिस धारा के अंतर्गत जमीन को राज्य सरकार में दर्ज किया गया है, उसमें स्वामित्व को नहीं बदला जा सकता। पत्रकार वार्ता में मुश्ताक अली एडवोकेट, जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष सैय्यद नसीर हैदर काजमी, ललित माहेश्वरी मौजूद रहे।
विज्ञापन