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गायत्री मंत्र के बड़े उपासक थे स्वामी गुरु देवेश्वर

Mon, 06 Dec 2021 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Dec 2021 12:30 AM IST
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Swami Guru Deveshwar was a great worshiper of Gayatri Mantra
मुजफ्फरनगर : ब्रह्मलीन दंडी स्वामी गुरुदेवेश्वर महाराज की फाइल फोटो। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मोरना। प्रारब्ध के पुण्य और प्रभु कृपा से बाल्यवस्था में ही उन्हें वैराग्य की अनुभूति हो गई थी। साधु-संतों के सानिध्य में जिंदगी ध्यान और उपासना में ऐसी रमी कि मात्र 12 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर दिया। उन्होंने जीवन को तपस्वी बनाया और शुकतीर्थ की तपोभूमि में सनातन संस्कृति को ज्योतिर्मय करते रहे। दंडी आश्रम के महंत पूज्य स्वामी गुरु देवेश्वर आश्रम जी महाराज का त्याग और उपासना उनके भक्तों की मार्गदर्शक रहेगी।
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अंनत श्री विभूषित स्वामी विष्णु आश्रम महाराज के त्याग, ध्यान और उपासना की परंपरा को स्वामी गुरु देवेश्वर आश्रम ने निष्ठा और समर्पण भाव से आगे बढ़ाया है। शुकतीर्थ के जीर्णोद्वारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर भागवत के प्रख्यात विद्वान स्वामी विष्णु आश्रम ने धार्मिक नगरी में दंड़ी आश्रम की स्थापना की थी। तपस्वी दंड़ी संत और महात्मा यहाँ रहते है। भगवान की भक्ति में बचपन से ही ब्रह्मचारी गुरुदत्त का भाव दर्शन देख उन पर साधु-संतों का स्नेह बरसने लगा।
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गृह त्याग के उपरांत वेद, भागवत, शास्त्र और उपनिषद का अध्ययन किया। उनके त्याग और भक्ति भावना को देखकर स्वामी विष्णु आश्रम ने उन्हें दंडी आश्रम का नेतृत्व सौंप दिया। गुरु के आदर्शों, मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाया। तीर्थ में दंडी आश्रम आज एक दिव्य धाम है। स्वामी दिव्यानंद तीर्थ से उनकी गहरी आत्मीयता थी। गुरु स्मृति में प्रति वर्ष वह दंड़ी आश्रम में श्री मद भागवत कथा सप्ताह का भव्य आयोजन करते थे। ‘गायत्री मंत्र’ के बड़े उपासक थे। कई घंटे की ध्यान और उपासना उनकी नियमित दिनचर्या था। शांत और सौम्य ब्रह्मचारी गुरुदत्त जी ने कुछ वर्ष पूर्व सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी गुरु देवेश्वर आश्रम का नामकरण ग्रहण किया था। प्रभु की परम शक्ति में विलीन हो गए स्वामी जी को पतित पावनी गंगा की जलधारा में वहीं समाधि दी गई, जहाँ उनके गुरु स्वामी विष्णु आश्रम जी महाराज समाधिस्थ हुए थे।
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शुकतीर्थ की गौरव थे स्वामी गुरु देवेश्वर
- भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने दी श्रद्धांजलि
(फोटो समाचार)
मोरना। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि तपस्वी स्वामी गुरु देवेश्वर आश्रम जी शुकतीर्थ का गौरव थे। उन्हें सदैव श्रद्धा से याद किया जाएगा। वर्ष, 1970 के दशक में जब दंडी आश्रम गया, तब उनके पहली बार दर्शन किये। उन्होंने मुझसे कहा था कि आप यहीं मेरे पास दंडी आश्रम में ही निवास कीजिये। उनके आत्मीयतापूर्ण व्यवहार से बड़ा प्रभावित हुआ। बड़े भाई के रूप में सदैव उनका आदर करता रहा। स्वामी जी वास्तव में शुकतीर्थ की शोभा थे। महान तपस्वी संत को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संवाद

मुजफ्फरनगर : शुकतीर्थ में ब्रहमलीन स्वामी गुरूदेवेश्वर महाराज के पार्थिव शरीर की नगर परिक्रमा क

मुजफ्फरनगर : शुकतीर्थ में ब्रहमलीन स्वामी गुरूदेवेश्वर महाराज के पार्थिव शरीर की नगर परिक्रमा क- फोटो : MUZAFFARNAGAR

मुजफ्फरनगर : ब्रह्मलीन हुए स्वामी गुरूदेवेश्वर महाराज को पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए शुकदेव आश?

मुजफ्फरनगर : ब्रह्मलीन हुए स्वामी गुरूदेवेश्वर महाराज को पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए शुकदेव आश?- फोटो : MUZAFFARNAGAR

मुजफ्फरनगर : दंडी आश्रम शुकतीर्थ में ब्रह्मलीन स्वामी गुरूदेवेश्वर आश्रम महाराज की अंतिम यात्र?

मुजफ्फरनगर : दंडी आश्रम शुकतीर्थ में ब्रह्मलीन स्वामी गुरूदेवेश्वर आश्रम महाराज की अंतिम यात्र?- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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