{"_id":"607493778ebc3ef1095d2b45","slug":"supreme-court-verdict-on-rizvi-boosts-confidence-mohtamim-devband-news-mrt5342100173","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिजवी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला विश्वास बढ़ाने वाला : मोहतमिम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिजवी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला विश्वास बढ़ाने वाला : मोहतमिम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद(सहारनपुर)। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी की कुरआन की 26 आयतों पर पाबंदी लगाने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने केवल खारिज कर दी, बल्कि उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस पर इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि अदालत का यह फैसला न्याय पालिका पर विश्वास बढ़ाने वाला है।
सोमवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जिस तरह के फैसले की उम्मीद थी उसी तरह का फैसला कोर्ट ने सुनाया है। क्योंकि कुरआन-ए-करीम आसमानी किताब है। जिसमें किसी भी तरह के बदलाव और कुछ भी कम या ज्यादा करने की जरा भी गुंजाइश नहीं है। मौलाना नोमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से अपना मुकाम और और अपनी हैसियत का इजहार किया है। कोर्ट ने याचिका को तुच्छ बताते हुए याचिकाकर्ता वसीम रिजवी पर जुर्माना लगाकर इंसाफ किया है। जिसका हम दिल की गहराइयों से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्याय पालिका पर विश्वास बढ़ा है। उम्मीद है कि आगे भी कोर्ट इसी तरह इंसाफ पर आधारित फैसले करेगी। वहीं, जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि रिजवी पर जो जुर्माना लगाया गया है। वे उनके किए के लिए बहुत कम है, उन्हें इससे सख्त सजा मिलनी चाहिए। देवबंद मोमिन कांफ्रेंस के अध्यक्ष मो. नसीम अंसारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
विज्ञापन
सोमवार को दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से जिस तरह के फैसले की उम्मीद थी उसी तरह का फैसला कोर्ट ने सुनाया है। क्योंकि कुरआन-ए-करीम आसमानी किताब है। जिसमें किसी भी तरह के बदलाव और कुछ भी कम या ज्यादा करने की जरा भी गुंजाइश नहीं है। मौलाना नोमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से अपना मुकाम और और अपनी हैसियत का इजहार किया है। कोर्ट ने याचिका को तुच्छ बताते हुए याचिकाकर्ता वसीम रिजवी पर जुर्माना लगाकर इंसाफ किया है। जिसका हम दिल की गहराइयों से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्याय पालिका पर विश्वास बढ़ा है। उम्मीद है कि आगे भी कोर्ट इसी तरह इंसाफ पर आधारित फैसले करेगी। वहीं, जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि रिजवी पर जो जुर्माना लगाया गया है। वे उनके किए के लिए बहुत कम है, उन्हें इससे सख्त सजा मिलनी चाहिए। देवबंद मोमिन कांफ्रेंस के अध्यक्ष मो. नसीम अंसारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
विज्ञापन